Anuvad(Translation)(अनुवाद)

Anuvad(Translation)(अनुवाद)

    अनुवाद की परिभाषा:

    एक भाषा में प्रकट किये गये विचारों को दूसरी भाषा में रूपान्तरित करने को अनुवाद कहते हैं।
    अनुवाद करने वाले को अनुवादक और अनुवाद की हुई रचना को अनूदित कहते हैं। अनुवाद की श्रेष्ठता अनुवादक की योग्यता पर निर्भर है। अनूदित रचना तभी निर्दोष समझी जाएगी जब मूल लेखों के भावों की पूर्ण रक्षा की जाय और अनूदित रचना में वही शक्ति हो जो मूल रचना में वर्त्तमान है। यह काम आसान नहीं है। वास्तव में अनुवादक का कार्य स्वतंत्र लेखक से कहीं अधिक कठिन है।

    मूल लेखक तो स्वतंत्र हो कर सोचता-विचारता हुआ अपने विचारों को उन्मुक्त भाव से प्रकट करता चलता है लेकिन अनुवादक को इतनी स्वतंत्रता नहीं रहती। उसकी शक्ति और दृष्टि बँधी रहती है। मूल लेखक के विचारों से असहमत होते हुए भी अनुवादक को उसी के विचारों को प्रकट करना पड़ता हैं। अतः अनुवादक को तभी सफलता मिलती है वह दोनों भाषाओं के शब्दों, मुहावरों, कहावतों और शक्तियों का ठीक-ठीक ज्ञान रखता है।

    किसी भी भाषा में अनुवाद के अनेक प्रयोजन होते हैं। इसके बिना कोई भी भाषा विकसित नहीं होती। जिस तीव्रता के साथ अँग्रेजी में अनूदित ग्रन्थों का प्रकाशन हर वर्ष होता है, उतना हमारी भाषा में नहीं होता। यद्यपि पिछले सौं वर्षों में दूसरी-दूसरी भाषाओं से, जिनमें अँग्रेजी, बँगला, मराठी, गुजराती, उर्दू, फारसी इत्यादि मुख्य हैं, हिन्दी में अनेक ग्रंथों के अनुवाद हुए तथापि अभी बहुत-सारे काम पड़े हैं।

    अनुवाद की आवश्यकता के निम्नलिखित कारण हैं :-
    (1) हिन्दी भाषा में अपने पैरों पर खड़ा होने की क्षमता उत्पत्र करने के लिए यह आवश्यक है कि संसार की समृद्ध भाषाओं में लिखित महान् ग्रन्थों का अनुवाद किया जाय। अब तक हमारी दृष्टि अँग्रेजी तक ही सीमित रही, लेकिन अब हम चीनी, जापानी, रूसी, जर्मन, फ्रेंच इत्यादि भाषाओं से भी अनुवाद की सामग्रियाँ लेने लगे हैं। यह शुभ लक्षण है। कोई भी भाषा अनुवादों से परिपुष्ट और समृद्ध होती है। शब्दों का भांडार बढ़ता है, \ नये प्रयोग सामने आते हैं और नयी-नयी शैलियों का जन्म होता है।

    (2) अनुवाद पाठकों के ज्ञान को भी समृद्ध करता है। इनसे एक ओर हमारा ज्ञान बढ़ता है और दूसरी ओर हमारी विचारधारा में नये मोड़ जन्म लेते हैं। इन्हीं अनुवादों के द्वारा हम दूसरे देशों की सभ्यता, संस्कृति, विचार-दृष्टि और साहित्य से परिचित होते हैं और फिर हम भी उनके धरातल पर पहुँचने की चेष्टा करते हैं।

    अनुवादों से देशों में नव-जागरण आया है, इसके कई प्रमाण हैं। वेदों और उपनिषदों के अनुवादों से जर्मनी जगी; रूसी, बाल्टेयर आदि फ्रांसीसी साहित्यकारों के ग्रंथानुवाद से रूस, इंगलैंड इत्यादि देशों में नवचेतना की लहर आयी और फिर हमारा देश पश्चिमी साहित्य के सम्पर्क में आ कर जागृत हुआ। अनुवादों से एक ओर देश में राष्ट्रीयता की उमंग आयी और दूसरी ओर राष्ट्रीय एकता का जन्म हुआ। अतः अनुवाद के प्रयोजन या महत्त्व को हम किसी भी अवस्था में गौण नहीं मान सकते। इससे हमारा प्रत्यक्ष कल्याण हुआ है।

    इन्हीं प्रयोजनों या उद्देश्यों को ध्यान में रख कर भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुवाद सम्बन्धी प्रश्न आज भी पहले की तरह दिये जाते हैं। लेकिन देश के हरेक प्रान्त में अँग्रेजी का स्तर एक तरह का नहीं है। फलतः कहीं अनुवाद की आवश्यकता समझी गयी हैं और कहीं नहीं। अँग्रेजी के लिए हमें विशेष आग्रह न हो तो भी अनुवाद-कला का अभ्यास हमारे लिए बहुत आवश्यक है।

    अनुवाद की विशेषता
    प्रत्येक भाषा की एक स्वतन्त्र प्रकृति होती है और उसमें भाव-व्यंजन की कुछ विशिष्ट प्रणालियाँ होती हैं। इसके अतिरिक्त भित्र-भित्र विषयों के ग्रन्थों में कुछ विशिष्ट प्रकार के भाव तथा शब्द भी होते हैं। जब हम दूसरी भाषाओं के अवतरण या ग्रन्थों के अनुवाद करते हैं, तब प्रायः हमें बहुत से नये शब्द गढ़ने पड़ते हैं और बहुत-से पद-प्रकार भी लेने पड़ते हैं। इस प्रकार के अनुवादों में वे ही अनुवाद श्रेष्ठ समझे जाते हैं जो भाव तथा विचार को ज्यों-का-त्यों प्रकट करने के अतिरिक्त अपनी भाषा की विशिष्ट प्रकृति का भी ध्यान रख कर किये जाते हैं। अन्यथा वे सदोष और अग्राह्य होते हैं।

    निर्दोष अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि अनुवादक में दो भाषाओं का सम्यक् ज्ञान हो। उसी का अनुवाद अच्छा कहा जायेगा जिसका दोनों भाषाओं पर समान अधिकार होगा और जो उनकी अभिव्यंजना-प्रणाली से भलीभाँति परिचित होगा। यदि ऐसा नहीं होगा तो अनुवाद में त्रुटियाँ रह जायँगी। अँग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करते समय अँग्रेजी और हिन्दी व्याकरण की भित्र-भित्र विशेषताओं को ध्यान में रखना चाहिए।

    अनुवाद के प्रकार

    अनुवाद के तीन प्रकार हैं।

    (1) शब्दानुवाद या अविकल अनुवाद (Literal translation)
    (2) भावानुवाद (Faithful translation)
    (3) स्वतंत्रानुवाद (Free translation)

    (1) शब्दानुवाद (Literal translation)- यह मूल भाषा का शाब्दिक अनुवाद हैं।

    उदाहरणार्थ- He first went to school in his own village, but while he was yet very young he went to Calcutta इसका शब्दानुवाद इस प्रकार होगा- 'पहले वह अपने ही गाँव की पाठशाला में पढ़ने गया। बाद में, जब वह बहुत छोटा ही था, तभी उसे कलकत्ता पढ़ने जाना पड़ा।' यहाँ 'He went to Calcutta का सीधा-सादा अनुवाद 'वह कलकत्ता गया' कर देना ठीक नहीं जँचता क्योंकि यहाँ चर्चा शिक्षा की हो रही हैं। यहाँ इसका अनुवाद 'पढ़ने जाना पड़ा' लिखना ठीक होगा।

    इसी प्रकार अँग्रेजी का एक पद है 'To be patient with' जिसका अर्थ होता है- किसी उद्धत या अनुचित व्यवहार पर भी शान्त रहना, गम खाना या तरह दे जाना आदि। अँग्रेजी के एक वाक्य में इसका प्रयोग 'being patient with' के रूप में हुआ था। हिन्दी के एक पत्रकार ने बिना समझे-बूझे उस वाक्य का इस प्रकार शब्दानुवाद करके रख दिया था- 'राष्ट्रपति रूजबेल्ट श्री विन्स्टेन चर्चिल के मरीज हैं।' 'Patient' शब्द दिखाई पड़ा और उसका सीधा-साधा अर्थ 'मरीज' करके रख दिया। ...... एक बार जब बंगाल के एक प्रधान मंत्री ढाका का दंगा शान्त कराने के लिए वहाँ गये थे, तब उनकी उस 'flying visit' के सम्बन्ध में एक पत्र में लिखा दिया था- 'वे हवाई जहाज से ढाका गये थे।''

    इन उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि शब्दों पर ध्यान रख कर अनुवाद करना अनुचित है। इससे अर्थ का अनर्थ हो सकता है और मूल अर्थ ही विकृत हो जायेगा। अतः शब्दानुवाद एक खतरा है, जिससे छात्रों को भरसक बचना चाहिए। यह स्मरण रखना चाहिए कि अनुवाद शब्दों का नहीं अर्थों का होता है।

    (2) भावानुवाद (Faithful translation)- लेखक के मूल भावों या अर्थों को अपनी भाषा में प्रकट कर देना 'भावानुवाद' है। अँग्रेजी में इसे 'Faithful translation' कहते हैं। इसमें यह देखना पड़ता है कि मूल भाषा का एक भी भाव छूटने न पाये। इसकी सफलता इस बात में है कि मूल भाषा के सभी भाव दूसरी भाषा में रूपान्तरित हो जायँ। यहाँ अनुवादक का ध्यान शब्दों पर न जा कर विशेष रूप से मूल भाव पर रहता हैं।

    ''भावानुवाद में हम मूल भाषा के शब्दों को तोड़-मरोड़ सकते हैं, वाक्यों को आगे-पीछे कर सकते हैं, मुहावरों को अपने साँचे में ढाल सकते हैं, लेकिन वाक्यों को अपने इच्छानुसार घटा-बढ़ा नहीं सकते। भावानुवाद तात्पर्य में, आकार-प्रकार में, मूल भाषा से बिल्कुल मिलता-जुलता हैं। इसमें न अपनी ओर से निमक-मिर्च लगा सकते हैं, न लम्बी-चौड़ी भूमिका बाँध सकते हैं। जो बात जिस उद्देश्य को ले कर जिस ढंग से कही गयी हैं, उस बात को, उसी उद्देश्य से और जहाँ तक हो उसी ढंग से कहना पड़ता हैं।''

    उदाहरणार्थ- 'Man must earn his bread by the sweat of his brow' का शाब्दिक अनुवाद होगा- आदमी को अपनी भौं के पसीने से रोटी कमानी चाहिए।' लेकिन यह अनुवाद अच्छा नहीं समझा जायेगा क्योंकि मूल भाषा के भावों का हिन्दी-रूपान्तर ठीक नहीं हुआ और न हिन्दी भाषा की प्रकृति की ही रक्षा की गयी है। इसका भावानुवाद इस प्रकार होगा- 'मनुष्य को अपने पसीने की कमाई खानी चाहिए।' छात्रों को इसी प्रकार अनुवाद करना चाहिए। लेकिन ऐसा अनुवाद निरन्तर अभ्यास के बाद ही सम्भव हैं। भावानुवाद में अपनी शब्दयोजना, वाक्य-योजना, मुहावरा इत्यादि के प्रयोग में काफी सावधान रहने की आवश्यकता होती हैं।


     
    यहाँ कुछ अशुद्ध अनुवादों के उदाहरण दिये जाते हैं :-

    अँग्रेजी के शब्द अशुद्ध शब्दानुवाद शुद्ध भावानुवाद
    Still child शान्त बच्चा मरा हुआ बच्चा
    Hunger strike भूख-हड़ताल अनशन
    White ants सफेद चींटी दीमक
    Trade union व्यापार-संघ श्रमिक-संघ
    House-breaker मकान तोड़ने वाला सेंघ मारने वाला
    Coloured race रंगीन जाति काली जाति
    Scorched earth policy घर-फूँक नीति सर्वक्षार-निति
    A deed of gift दान का कार्य दान-पत्र
    A jewel of poet कवि का हीरा कविरत्न
    The dawn of intellect बुद्धि का सबेरा ज्ञानोदय
    The fountain of happiness सुख की निर्झरणी सुख-स्रोत
    An apple of discord झगड़ा का सेव कलह का मूल कारण
    A man of spirit गर्म आदमी तेजस्वी पुरुष
    A poet of first water पहले पानी का कवि उत्कृष्ट कवि
    Man and money आदमी और रुपया धन-जन
    Heaven and Earth स्वर्ग और पृथ्वी आकाश-पाताल
    Mind and matter मस्तिष्क और पदार्थ जड़-चेतन
    Land and task हरक्यूलियन कार्य भगीरथ-प्रयत्न
    Aboriginal tribes पहले की जातियाँ आदिम जातियाँ
    A rising poet उगता हुआ कवि उदीयमान कवि
    Overwhelmed with grief दुःख से आच्छादित शोकग्रस्त
    Hostile to country देश का दुश्मन देशद्रोही
    A cock-and-bull story कौआ और साँढ़ की कहानी नानी की कहानी
    (3) स्वतंत्रता (Free translation)- इसे 'छायानुवाद' भी कहते हैं। मूल भाषा के अर्थ या भाव को समझ कर स्वतंत्र रूप से किये गये अनुवाद को 'स्वतंत्रतानुवाद' कहते हैं।

    साहित्यिक कृतियों के अनुवाद में प्रायः इसका उपयोग होता हैं। लेकिन विद्यार्थियों के लिए इसमें खतरा है, क्योंकि अभ्यास न रहने के कारण ये मूल अर्थ से बहुत दूर बहक जा सकते हैं। छायानुवाद में अनुवादक मूल लेखक की भाषा-शैली के सम्बन्ध में बिल्कुल स्वतंत्र रहता हैं। यहाँ केवल लेखक के विचारों को रूपान्तरित कर दिया जाता हैं। सारा अनूदित अवतरण पढ़ कर मूल लेखक का आशय समझ में आ जाता हैं।

    यहाँ अनुवादक यह नहीं देखता कि एक वाक्य का अनुवाद एक से अधिक वाक्यों में हो रहा हैं या एक से अधिक वाक्यों का केवल एक वाक्य में, उसका उद्देश्य मूल लेखक के विचारों या भावों को अपनी भाषा में सुस्पष्ट कर देना होता हैं। अनुवादक चाहे तो मूल लेखक के भावों का विस्तार या संकोच दोनों कर सकता हैं। अनुवाद का यह ढंग विशेषतः पत्रकार अपनाते हैं। इसके लिए इतना ही बन्धन रहता है कि मूल भाषा का कोई भी विचार छूटने न पाये। लेकिन छात्रों को अँग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करने की इतनी स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती।

    उत्कृष्ट अनुवाद के लिए छात्रों को मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए। शाब्दिक अनुवाद और भावानुवाद को मिला कर चलने से सफल और सुन्दर अनुवाद किया जा सकता हैं। मूल लेखक के भावों और वाक्य-विन्यास की पूर्ण रक्षा करना एक कठिन काम हैं। इसके लिए अभ्यास और योग्यता की आवश्यकता हैं। अनभ्यासी यदि इस प्रकार के अनुवाद में प्रवृत्त होता हैं तो उसकी भाषा शिथिल हो जा सकती हैं।

    अनुवाद के कुछ सामान्य नियम

    अँग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करने के पहले विद्यार्थियों को निम्नलिखित कुछ सामान्य नियमों से अच्छी तरह परिचित हो जाना चाहिए। फिर इनके आधार पर हिन्दी-अनुवाद का अभ्यास करना चाहिए। अनुवाद की निश्चित रीति बताना संभव नहीं हैं क्योंकि शब्दों की तरह वाक्यों की रचना भी अनन्त होती हैं। लेकिन निम्नलिखित बातों को ध्यान में रख कर अनुवाद का अभ्यास किया जा सकता हैं :-

    (1) अँग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करते समय अपनी भाषा की पद-संघटना तथा वाक्य-रचना की रक्षा करनी चाहिए। हिन्दी में पहले कर्त्ता, फिर कर्म और अन्त में क्रिया-पद आते हैं; जैसे-

    An ideal student prepares his daily lessons .
    इसका अनुवाद इस प्रकार होगा- 'आदर्श छात्र (कर्त्ता) अपने दैनिक पाठ (कर्म) प्रस्तुत करता है (क्रिया)।' अँग्रेजी की वाक्य-रचना में पहले कर्त्ता, फिर क्रिया और अन्त में कर्म-पद आते हैं। अनुवाद करते समय दो भाषाओं की वाक्य-रचना के इस अन्तर को अच्छी तरह स्मरण रखना चाहिए।

    (2) अनुवाद करते समय मूल भाषा में आये एकाध शब्द को छोड़ा भी जा सकता हैं। ऐसा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मूल वाक्य का पूरा अर्थ विकृत न होने पाये। उदाहरणार्थ,

    There lived a saint, named Tukaram .
    It is raining .
    It was 6 o'clock in the morning .

    इन वाक्यों के अनुवाद इस प्रकार होंगे :-
    तुकाराम नामक एक सन्त रहते थे।
    वर्षा हो रही हैं।
    प्रातः काल के छह बजे थे।

    (3) आवश्यकतानुसार अनूदित वाक्य-विन्यास में एकाध नये शब्द अलग से जोड़े भी जा सकते हैं। इससे वाक्य-रचना में प्रवाह आ जाता हैं और वाक्य जानदार हो जाता हैं। लेकिन अपनी ओर से नये शब्दों का प्रयोग करते समय विद्यार्थियों को अधिक-से-अधिक सावधान रहना चाहिए।

    ऐसा न हो कि अनावश्यक शब्दों का प्रयोग हो जाय, जैसे- What are you about ? का अनुवाद इस प्रकार होगा- 'आप किस उधेड़बुन में हैं ?' या, 'आप किस चक्कर में हैं ?' या 'आप किस सोच में पड़े हैं ?' या, 'आप किस बात में लगे हैं ?' अँग्रेजी के एक वाक्य का अनुवाद प्रसंगानुसार इन वाक्यों में किया जा सकता हैं।

    (4) कभी-कभी ऐसे अवसर और स्थल भी आते हैं जब कि अँग्रेजी के कई शब्दों का अनुवाद हिन्दी के एक ही शब्द द्वारा हो सकता हैं; जैसे-

    I am at loss to determine what to do .
    He is the black-sheep of our family .
    He had an apology for a meal .
    The old man is at the point of death .

    इन वाक्यों के अनुवाद क्रमशः इस प्रकार होंगे :-
    मैं किंकर्त्तव्यविमूढ़ हूँ।
    वह हमारे वंश का कुलांगार हैं।
    उसने नाममात्र का भोजन किया।
    वृद्ध पुरुष मरणासन्न हैं।

    (5) इसके विपरीत, कभी-कभी अँग्रेजी के शब्द का अनुवाद हिन्दी के कई शब्दों के प्रयोग द्वारा होता हैं। खास कर अँग्रेजी के मुहावरों और कहावतों का प्रयोग करते समय हिन्दी में बड़ी सावधानी रखनी पड़ती हैं। उदाहरणार्थ-

    He talks big .
    He is a turn-coat .
    Might is right .
    A bad workman quarrels with his tools .

    इसके अनुवाद इस प्रकार होंगे :-
    वह बड़ी-बड़ी बातें करता हैं।
    वह अपने सिद्धान्तों पर अटल नहीं रहता।
    जिसकी लाठी, उसकी भैंस- हिन्दी मुहावरा।
    नाच न जाने आँगन टेढ़।

    (6) अँग्रेजी के सामासिक शब्दों (Compound words) का अनुवाद करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हिन्दी में उनके अपने शब्द हैं या नहीं। यहाँ कुछ शब्दों के हिन्दी-पर्याय दिये जा रहे हैं, जिनका प्रयोग हिन्दी अनुवाद में किया जा सकता हैं :-

    Eye-sore आँखों का काँटा Spring-time वसन्त-काल New-born baby नवजात शिशु World-wide विश्वव्यापी Mean-spirited लघुचेता Sharp-sighted सूक्ष्मदर्शी Heart-rending हृदय-विदारक Lack-lustre दीप्तिहीन Globe-trotter भू-पर्यटक Pain-killer वेदना-नाशक

    (7) अँग्रेजी के वाक्य-खण्डों (Clauses) का अनुवाद करते समय भी अपनी भाषा की प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। हो सकता हैं कि मूल वाक्य-खण्ड का अनुवाद हिन्दी के एक शब्द में हो जाय या अनेक शब्दों का प्रयोग करना पड़े। हर हालत में हिन्दी भाषा की प्रकृति का ख्याल करना पड़ेगा।

    यहाँ कुछ उदाहरण दिया जा रहा हैं-
    Merits and demerits दोष-गुण Sleight of hand हस्त-कौशल Greed of money घन-लिप्सा The struggle for existence जीवन-संघर्ष Sailing in the air गगन-विहारी Dear as life प्राणप्रिय The Iron Age कलियुग A boarding house छात्रावास A man of rank प्रतिष्ठित पुरुष Absorbed in meditation ध्यान-मग्न Wild with fear भयाकुल

    (8) हिन्दी-अनुवाद में सबसे बड़ी कठिनाई अँग्रेजी मुहावरों और कहावतों के रूपान्तर में होती हैं, क्योंकि अँग्रेजी में इनका अपना अर्थ होता हैं। हिन्दी और अँग्रेजी की भाषाओं में वही भेद हैं जो भेद दोनों के मुहावरों में हैं। अतः अँग्रेजी के मुहावरों का अर्थ जाने बिना उनका अनुवाद करना ठीक न होगा। सच तो यह है कि अँग्रेजी मुहावरों का हिन्दी-रूपान्तर, व्यावहारिक रूप से, सम्भव भी नहीं हैं। इसलिए यह आवश्यक हैं कि हम पहले मूल मुहावरों के अर्थ जान लें और फिर अपनी भाषा में उनसे मिलते-जुलते मुहावरे खोजें।

    मुहावरों के स्थान पर मुहावरों की खोज करना एक मुश्किल काम हैं लेकिन अनुवाद में वास्तविक प्रवाह और वाक्य-रचना में ओज लाने के लिए ऐसा करना पड़ता हैं। मूल भाषा के मुहावरों का शाब्दिक अनुवाद करना एक भारी संकट मोल लेना हैं, क्योंकि शब्दानुवाद के द्वारा मुहावरों का अनुवाद असम्भव यहाँ हम अँग्रेजी के कुछ मुहावरों और कहावतों के साथ उनके हिन्दी-रूपान्तर दे रहे हैं। विद्यार्थियों को इनकी जानकारी होनी चाहिए :-


     
    मुहावरे (Idioms)

    The time is up समय हो गया।
    He went to the next world उसका परलोकवास हो गया।
    He is undone उसका सर्वनाश हो गया।
    He saw the light in 1870 सन् १८७० में उसका जन्म हुआ।
    He is laughing in the sleeve वह मन-ही-मन हँस रहा हैं।
    All things were at sixes and sevens सभी चीजें तितर-बितर हो रही थीं।
    He pocketed the insult उसने चुपचाप अपमान सहन कर लिया।
    It is really a Herculean task यह वास्तव में बड़ा कठिन काम हैं।
    He calls a spade a spade वह उचित (यथार्थ) वक्ता हैं।
    I am out of pocket मेरा हाथ खाली हैं।
    He moved heaven and earth इस काम के लिए उसने आकाश-पाताल एक कर दिया।
    All is well that ends well अन्त भला तो सब भला।
    कहावतें (Proverbs)

    Many a little makes a nickle बूँद-बूँद तालाब भरता हैं।
    To give tit for tat मुँहतोड़ जवाब देना; जैसे को तैसा।
    A bird in hand is worth two in the bush नौ नगद न तेरह उधार।
    An idle mans brain is the workshop of the devil खाली मन शैतान का अड्डा।
    Birds of the same feather flock together चोर-चोर मौसेरे भाई।
    To be pure, everything is pure मन चंगा तो कठौती में गंगा।
    As we sow, so we reap जैसी करनी, वैसी भरनी।
    Might is right जिसकी लाठी उसकी भैंस।
    Distance lends enchantment to the view दूर का ढोल सुहावन; घर का जोगी जोगड़ा बाहर का सिद्ध।
    To cast pearls before swine बन्दर के हाथ में नारियल; बन्दर क्या जाने आदी का स्वाद ?
    Where there is a will, there is a way जहाँ चाह, तहाँ राह।
    To break a bruised reed जले पर नमक छिड़कना।
    It was a nine days wonder चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रात।
    It takes two people to make a quarrel एक हाथ से ताली नहीं बजती।
    (9) अनुवाद में कभी-कभी वाच्य-परिवर्तन भी किया जा सकता हैं। कर्मवाच्य का अनुवाद कर्त्तृवाच्य में और कर्त्तृवाच्य का अनुवाद कर्मवाच्य या भाववाच्य में भी हम कर सकते हैं। वाक्य-रचना में सुन्दरता और प्रवाह लाने के लिए हम ऐसा करते हैं।

    उदाहरणार्थ- I am unable to walk- कर्त्तृवाच्य।
    मुझसे चला नहीं जाता- कर्मवाच्य।

    He has been appointed as a clerk .
    उसकी नियुक्ति किरानी के पद पर हुई हैं।

    (10) अनुवाद में प्रत्यक्ष वाक्य (Direct Speech) और परोक्ष वाक्य (Indirect Speech) में भी परस्पर परिवर्तन किये जा सकते हैं। ऐसा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हिन्दी में जब सरल वाक्य परोक्ष ढंग से लिखना होता है तब सर्वनाम, क्रिया या काल को बदलने की जरूरत नहीं होती, केवल 'कि'जोड़ देने से काम चल जाता हैं। अँग्रेजी में ऐसा नहीं होता। अतः छात्रों को परोक्ष वाक्य का अनुवाद करते समय विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।

    उदाहरणार्थ- प्रत्यक्ष वाक्य- राम ने कहा- मैं जाता हूँ।
    परोक्ष वाक्य- राम ने कहा कि मैं जाता हूँ।
    अँग्रेजी के परोक्ष कथन (Indirect Narration) का हिन्दी अनुवाद प्रत्यक्ष वाक्य में भी आसानी से किया जा सकता हैं; जैसे :-
    He said that he was going home and would return soon with his family .

    इनका अनुवाद इस प्रकार किया जायेगा :-
    उन्होंने कहा, ''मैं घर जा रहा हूँ और शीघ्र ही सपरिवार लौटूँगा।''
    एक और उदाहरण लीजिये :-
    My father asked me to be truthful and dutiful, otherwise I would not prosper in life .
    मेरे पिता ने कहा- ''तुम्हें सत्यवादी और कर्त्तव्यपरायण होना चाहिए, नहीं तो तुम जीवन में उन्नति न करोगे।''

    हिन्दी में प्रत्यक्ष और परोक्ष वाक्यों के हिन्दी-अनुवाद में बड़ी गड़बड़ी दिखाई पड़ती हैं। प्रायः लोग अँग्रेजी की शैली का अंधानुकरण करते हैं। इसके बारे में श्रीयुत रामचन्द्र वर्मा ने ''अच्छी हिन्दी'' में लिखा हैं- ''अँग्रेजी व्याकरण में कथन के दो भेद किये गये हैं- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष। हमलोगों ने भी यह तत्त्व ग्रहण कर लिया हैं। यह हमारे लिए नितान्त निरर्थक तो नहीं हैं; कुछ अंशों में यह उपयोगी भी हैं और आवश्यक भी। पर बिना समझे-बूझे इनका प्रयोग नहीं होना चाहिए।

    एक उदाहरण लीजिये- 'उन्होंने हुक्म दिया था कि उनके मकान के सामने रोज छिड़काव हुआ करे।' इस वाक्य में 'उनके' बहुत भ्रामक हैं। प्रत्यक्ष कथन के प्रकार में इसका रूप होगा- 'उन्होंने हुक्म दिया था- हमारे मकान के सामने रोज छिड़काव हुआ करे।' परन्तु यदि इसे अप्रत्यक्ष कथन वाला रूप दिया जाय तो भी हिन्दी की प्रकृति के अनुसार इसमें 'था' और 'हमारे' के बीच में केवल 'कि' आना चाहिए। 'हमारे' की जगह 'उनके' नहीं होना चाहिए।

    अनुवाद के अभ्यास
    अनुवाद का कार्य बड़ा कठिन हैं। इसके लिए दो भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक हैं। अक्सर अँग्रेजी भाषा से अनुवाद के लिए अवतरण, विश्वविद्यालय के प्रश्न-पत्रों में, दिये जाते हैं। अँग्रेजी के प्रचलित और व्यावहारिक शब्दों की सूची हम दे चुके हैं। अनुवाद का अभ्यास करने के पहले विद्यार्थियों को इन शब्द-भांडारों का अध्ययन कर लेना चाहिए। यहाँ हम अँग्रेजी के कुछ अवतरण अभ्यास के लिए दे रहे हैं। परीक्षा-भवन में अनुवाद-कार्य करने के पहले इन अवतरणों का हिन्दी-अनुवाद कर लेना अपेक्षित होगा।

    (1) The light has gone out, I said, and yet I was wrong . For the light that shone in this country was no ordinary light . The light that has illumined this country for these many years and a thousand years later, that light will still be seen in this country and the world will see it and it will give solace to innumerable hearts . For that light presented something more than the immediate present . It represented the living truth and the eternal man was with us with his eternal truth reminding us of the right path, drawing us from error, taking this ancient country to freedom .

    संकेत :- Light- दीपक, प्रकाश। Gone out- बुझ गया। Wrong- भूल। Illumined- प्रकाशित किया। Solace- सांत्वना। Innumerable hearts- असंख्य लोगों। Immediate present- साम्प्रतिक वर्त्तमान। Eternal truth- शाश्वत सत्य। Right path- सत्पथ, सन्मार्ग।

    (2) Last night was the sweetest night I ever had in my life . I never before enjoyed so much of the light and rest and sweetness of heaven in my soul . Part of the night I lay awake, and sometimes awake and sometimes between sleeping and waking . A glow of divine love came down from the heart of Christ in heaven to my heart in a constant stream . My heart and soul was lost in . It was a pleasure indescribable, a joy inexplicable . This glory of God seemed to overcome me and swallow me up . This love and this sweetness I can never forget .

    संकेत :- Sweetest night- सुखदतम रात्रि। Light- प्रकाश। Rest-विश्राम। Sweetness of heaven- स्वर्गिक आनन्द। Lay awake- जगा रहना। Sleeping and awake- सुषुप्ति और जागरण। A glow of divine love- स्वर्गिक प्रेम की ज्योति। Constant stream- अजस्त्र स्रोत। Flowed out- निःसृत हुआ। Sweetness- सुख या आनन्द। Pleasure indescribable- अनिर्वचनीय आनन्द। Joy inexplicable- अव्याख्येय प्रसन्नता या सुख। Glory of God- ईश्वरीय गौरव। Overcome- प्रभावित करना।

    सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण:



    Anuvad(Translation)(अनुवाद)



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