प्रति सौ ग्राम भैंस के दूध से 97 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। यह तथ्य पोषण विज्ञान, डेयरी विज्ञान, कृषि विज्ञान तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की सामान्य ज्ञान श्रेणी में महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और भैंस के दूध का उत्पादन इसमें महत्वपूर्ण योगदान देता है। यही कारण है कि दूध से संबंधित पोषण संबंधी तथ्य समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
भैंस का दूध अपने उच्च वसा प्रतिशत, अधिक ऊर्जा, बेहतर स्वाद तथा पोषक तत्वों की प्रचुरता के कारण विशेष महत्व रखता है। सामान्यतः 100 ग्राम भैंस के दूध में लगभग 82 ग्राम पानी, 4 से 5 ग्राम प्रोटीन, 6 से 8 ग्राम वसा, लगभग 5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट तथा लगभग 97 कैलोरी ऊर्जा होती है। यही अधिक वसा मात्रा इसे गाय के दूध की तुलना में अधिक ऊर्जादायक बनाती है।
ऊर्जा हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। शरीर में होने वाली सभी क्रियाएं जैसे श्वसन, रक्त संचार, पाचन, मांसपेशियों की गतिविधियां तथा मस्तिष्क का कार्य ऊर्जा पर निर्भर करता है। भोजन से प्राप्त ऊर्जा को कैलोरी या किलो कैलोरी (kcal) में मापा जाता है। जब कहा जाता है कि 100 ग्राम भैंस के दूध से 97 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, तो इसका अर्थ है कि यह दूध शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है।
भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी उद्योग का आधार भैंस पालन भी है। देश में पाई जाने वाली प्रमुख भैंस नस्लों में मुर्रा, जाफराबादी, मेहसाना, भदावरी, नागपुरी और सुरती प्रमुख हैं। इनमें मुर्रा नस्ल को सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है। हरियाणा और पंजाब में मुर्रा भैंस का विशेष महत्व है तथा इसकी दूध उत्पादन क्षमता विश्वभर में प्रसिद्ध है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि गाय और भैंस के दूध में कौन अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। इसका उत्तर भैंस का दूध है क्योंकि इसमें वसा की मात्रा अधिक होती है। गाय के दूध में सामान्यतः 60 से 70 कैलोरी प्रति 100 ग्राम ऊर्जा प्राप्त होती है जबकि भैंस के दूध में लगभग 97 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। यही कारण है कि भैंस का दूध अधिक गाढ़ा, सफेद और पौष्टिक माना जाता है।
भैंस के दूध में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटैशियम तथा विटामिन A जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है जबकि फॉस्फोरस शरीर की कोशिकाओं और ऊर्जा चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रोटीन शरीर की वृद्धि और ऊतकों के निर्माण में सहायक होता है। इस प्रकार भैंस का दूध केवल ऊर्जा का स्रोत ही नहीं बल्कि संपूर्ण पोषण प्रदान करने वाला खाद्य पदार्थ भी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से दूध से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। श्वेत क्रांति के जनक के रूप में वर्गीज़ कुरियन को जाना जाता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी। ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम ने भारत को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। गुजरात स्थित अमूल भारत के सबसे प्रसिद्ध डेयरी ब्रांडों में से एक है। इन तथ्यों से संबंधित प्रश्न UPSC, SSC, RRB, NDA, CDS, CTET, TET, राज्य लोक सेवा आयोग तथा विभिन्न बैंकिंग परीक्षाओं में पूछे जाते रहे हैं।
भैंस के दूध से दही, मक्खन, घी, पनीर, खोया, मिठाइयां और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उच्च वसा प्रतिशत के कारण भैंस का दूध डेयरी उद्योग के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है। भारत में बनने वाले अधिकांश पारंपरिक दुग्ध उत्पादों में भैंस के दूध का उपयोग किया जाता है।
सामान्य ज्ञान की परीक्षाओं में निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं— प्रति 100 ग्राम भैंस के दूध से कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है? उत्तर: 97 कैलोरी। किस दूध में वसा अधिक होती है? उत्तर: भैंस के दूध में। श्वेत क्रांति के जनक कौन हैं? उत्तर: वर्गीज़ कुरियन। भारत विश्व में दुग्ध उत्पादन में कौन-सा स्थान रखता है? उत्तर: प्रथम। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना कब हुई? उत्तर: 1965।
भैंस का दूध बच्चों, खिलाड़ियों, गर्भवती महिलाओं तथा अधिक ऊर्जा की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि अत्यधिक वसा होने के कारण सीमित मात्रा में सेवन करना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होता है। संतुलित आहार के साथ भैंस का दूध शरीर को आवश्यक ऊर्जा, प्रोटीन और खनिज तत्व प्रदान करता है।
इस प्रकार प्रति 100 ग्राम भैंस के दूध से प्राप्त होने वाली 97 कैलोरी ऊर्जा का तथ्य केवल पोषण विज्ञान की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी सामान्य ज्ञान का विषय है। कृषि, पशुपालन, डेयरी विज्ञान, पोषण विज्ञान तथा सामान्य अध्ययन की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को इस तथ्य को अवश्य याद रखना चाहिए क्योंकि यह बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों में से एक है।
