सत्रिया का एकांकी नाटक क्या कहलाता है?

Sanjay Yadav
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सत्रिया का एकांकी नाटक अंकिया नट कहलाता है। सत्रिया नृत्य, असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसकी जड़ें वैष्णव संत और समाज-सुधारक श्रीमंत शंकरदेव की भक्ति-आधारित एकांकी नाटकीय परंपरा से जुड़ी हैं। सत्रिया परंपरा में प्रस्तुत होने वाले इन एकांकी नाटकों को अंकिया नट कहा जाता है। यह केवल नाट्यरूप ही नहीं बल्कि धार्मिक उपासना, संगीत, नृत्य, अभिनय और कथा-वाचन का अद्भुत संगम है।

सत्रिया का एकांकी नाटक

अंकिया नट की रचना 15वीं–16वीं शताब्दी में शंकरदेव और उनके शिष्य माधवदेव ने की। इन नाटकों के माध्यम से उन्होंने कृष्ण-भक्ति पर आधारित एकेश्वरवाद, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समानता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। अंकिया नट में मुख्य कथाएँ भगवान कृष्ण के जीवन, उनके लीला-परक प्रसंगों और पुराणों की घटनाओं पर आधारित होती हैं।

अंकिया नट की भाषा ब्रजावली होती है जो असमिया, मैथिली और ब्रजभाषा का मिश्रित रूप है। यह भाषा दर्शकों के लिए सरल, मधुर और सहज भावप्रवाह उत्पन्न करती है। प्रस्तुति के समय ‘सुत्रधार’ सबसे महत्वपूर्ण पात्र होता है जो कथा का परिचय देता है, पात्रों को मंच पर लाता है और नाटक की गति को नियंत्रित करता है।

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