यूनेस्को ने केरल के अनुष्ठान नाटक 'मुडियेट्टू' को 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' के रूप में मान्यता कब दी?

यूनेस्को ने केरल के अनुष्ठान नाटक 'मुडियेट्टू' को 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' के रूप में मान्यता कब दी?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”!  🎉  जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराएँ सदियों से विश्व को आकर्षित करती रही हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है ‘मुडियेट्टू’ जो केरल राज्य की एक पारंपरिक अनुष्ठानिक नाट्य कला है। वर्ष 2010 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ के रूप में शामिल किया जो भारतीय लोकसंस्कृति के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। मुडियेट्टू का परिचय मुडियेट्टू एक लोकनाट्य रूप है जिसका प्रदर्शन केरल के मध्य भागों विशेषकर एर्नाकुलम, इडुक्की, और कोट्टायम जिलों के मंदिरों में किया जाता है। यह नाटक देवी और दानव दारिका के बीच हुए युद्ध की पौराणिक कथा को प्रस्तुत करता है। प्रस्तुति देवी काली की आराधना के रूप में होती है जिसमें भक्ति, नृत्य, संगीत और मुखावरण कला (mask making) का अद्भुत संगम दिखाई देता है।  धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व मुडियेट्टू केवल एक नाट्य प्रदर्शन नहीं है बल्कि यह एक सामुदायिक अनुष्ठान भी है। इ…

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