नाइट्रोजन: परिचय
नाइट्रोजन पृथ्वी के वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में (लगभग 78%) उपस्थित एक निष्क्रिय गैस है। गैसीय अवस्था में नाइट्रोजन (N₂) अत्यंत स्थिर होती है और सीधे-सीधे अधिकांश जीवों द्वारा उपयोग में नहीं लाई जा सकती। किंतु यही नाइट्रोजन जब जैविक रूपों जैसे अमीनो अम्ल, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल में परिवर्तित होती है तब जीवन के लिए अनिवार्य बन जाती है। जीवों के शरीर में नाइट्रोजन का मुख्य भंडार प्रोटीन ही हैं।
प्रोटीन की परिभाषा
प्रोटीन उच्च आणविक भार वाले जैविक यौगिक हैं जो अमीनो अम्लों (Amino Acids) की लंबी शृंखलाओं से बने होते हैं। ये अमीनो अम्ल आपस में पेप्टाइड बंध (Peptide Bond) द्वारा जुड़े रहते हैं। प्रत्येक अमीनो अम्ल के अणु में कम-से-कम एक अमीनो समूह (-NH₂) होता है जिसमें नाइट्रोजन अनिवार्य रूप से उपस्थित रहता है। इसी कारण प्रोटीन नाइट्रोजन-युक्त यौगिकों का सबसे बड़ा वर्ग माने जाते हैं।
अमीनो अम्लों में नाइट्रोजन की भूमिका
अमीनो अम्ल प्रोटीन के निर्माण की आधारशिला हैं। सामान्यतः एक अमीनो अम्ल की संरचना में:
- एक केंद्रीय कार्बन परमाणु
- एक अमीनो समूह (-NH₂)
- एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH)
- एक हाइड्रोजन परमाणु
- तथा एक परिवर्ती पार्श्व शृंखला (R-ग्रुप)
अमीनो समूह में उपस्थित नाइट्रोजन ही प्रोटीन को अन्य जैव-अणुओं (जैसे कार्बोहाइड्रेट और वसा) से भिन्न बनाता है। कार्बोहाइड्रेट और वसा में प्रायः कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही होते हैं जबकि प्रोटीन में इन तीनों के साथ नाइट्रोजन भी अनिवार्य रूप से पाया जाता है।
प्रोटीन का रासायनिक संघटन
रासायनिक दृष्टि से प्रोटीन मुख्यतः निम्न तत्वों से बने होते हैं:
- कार्बन (C)
- हाइड्रोजन (H)
- ऑक्सीजन (O)
- नाइट्रोजन (N)
कुछ प्रोटीनों में सल्फर (S) और फॉस्फोरस (P) भी पाए जाते हैं। किंतु नाइट्रोजन वह तत्व है जो प्रोटीन की पहचान का मुख्य आधार बनता है। औसतन प्रोटीन में लगभग 16% नाइट्रोजन पाया जाता है। इसी आधार पर पोषण विज्ञान में नाइट्रोजन की मात्रा मापकर प्रोटीन की मात्रा का अनुमान लगाया जाता है।
प्रोटीन और नाइट्रोजन चक्र
प्रकृति में नाइट्रोजन एक चक्र (Nitrogen Cycle) के माध्यम से विभिन्न रूपों में घूमता रहता है:
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण: कुछ जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया या नाइट्रेट में बदलते हैं।
- पौधों द्वारा अवशोषण: पौधे नाइट्रेट/अमोनिया को ग्रहण कर अमीनो अम्ल और प्रोटीन का निर्माण करते हैं।
- पशुओं द्वारा उपभोग: पशु पौधों या अन्य जीवों को खाकर प्रोटीन प्राप्त करते हैं।
- अपघटन: मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों से नाइट्रोजन पुनः मिट्टी में लौट आती है।
इस पूरे चक्र में नाइट्रोजन का सबसे स्थायी जैविक रूप प्रोटीन ही होता है।
प्रोटीन के प्रकार
- संरचनात्मक प्रोटीन
- ये प्रोटीन शरीर को आकार और मजबूती प्रदान करते हैं जैसे:
- केराटिन (बाल, नाखून)
- कोलेजन (त्वचा, हड्डियाँ)
क्रियात्मक प्रोटीन
ये शरीर की जैव-रासायनिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं:
- एंजाइम
- हार्मोन
- एंटीबॉडी
संग्रहण प्रोटीन
ये पोषक तत्वों को संग्रहित करते हैं:
- बीजों में भंडारित प्रोटीन
- अंडे का एल्ब्यूमिन
इन सभी प्रकारों में नाइट्रोजन एक साझा और अनिवार्य घटक है।
मानव शरीर में प्रोटीन का महत्व
मानव शरीर में प्रोटीन का महत्व बहुआयामी है:
- ऊतकों का निर्माण और मरम्मत
- एंजाइमों का निर्माण
- हार्मोन और एंटीबॉडी का निर्माण
- ऊर्जा का स्रोत (आपात स्थिति में)
इन सभी कार्यों के लिए नाइट्रोजन आवश्यक है जो प्रोटीन के माध्यम से ही शरीर में उपलब्ध होती है।
पोषण में प्रोटीन और नाइट्रोजन
पोषण विज्ञान में प्रोटीन को नाइट्रोजन का मुख्य आहार स्रोत माना जाता है। जब हम दालें, दूध, अंडे, मांस, मछली या सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ लेते हैं तो उनके माध्यम से नाइट्रोजन शरीर में प्रवेश करती है। शरीर इस नाइट्रोजन का उपयोग:
- नई कोशिकाओं के निर्माण
- क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत
- जैव-रासायनिक संतुलन बनाए रखने के लिए करता है।
प्रोटीन की कमी और नाइट्रोजन असंतुलन
यदि आहार में प्रोटीन की कमी हो जाए तो शरीर में नाइट्रोजन संतुलन नकारात्मक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप:
- मांसपेशियों का क्षय
- प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी
- बच्चों में वृद्धि रुक जाना
- त्वचा और बालों की समस्या जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रोटीन: नाइट्रोजन का प्रमुख जैविक भंडार
संपूर्ण जीव-जगत में नाइट्रोजन का सबसे बड़ा जैविक भंडार प्रोटीन ही हैं। पौधों, पशुओं और मनुष्य सभी में नाइट्रोजन मुख्यतः प्रोटीन के रूप में ही संरक्षित और प्रयुक्त होती है। यही कारण है कि प्रोटीन को नाइट्रोजन गैस का प्रमुख यौगिक कहा जाता है।
