सैला, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा नृत्य किस राज्य से संबंधित हैं?

सैला, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा नृत्य किस राज्य से संबंधित हैं?
सैला, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा नृत्य छत्तीसगढ़ से संबंधित हैं। छत्तीसगढ़, भारतीय उपमहाद्वीप का हृदयस्थल अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और रंगारंग उत्सवों के लिए विख्यात है। यहाँ की लोकपरंपराएँ सदियों से सजीव हैं। नज़र आएं तो गाँवों की चौपालों से लेकर मेले‑तिहारों तक हर जगह लोककथाएँ, गीत और नृत्य समाज की साँस बनकर जी रहे हैं। सैला नृत्य (Saila) उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सैला नृत्य छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण परिवेश से उत्पन्न हुआ लोकनृत्य है। यह मुख्यतः कृषि जीवन, प्राकृतिक चक्र और सामूहिक कार्यों से जुड़ा हुआ है। "सैला" शब्द के अर्थ पर कुछ विद्वान अलग‑अलग व्याख्याएँ देते हैं पर सामान्य समझ यह है कि सैला नृत्य सामूहिक उत्सवों, फसल कटाई या विजय उत्सवों में किए जाने वाले नृत्य रूटीनों से जुड़ा है। नृत्य की संरचना और प्रवाह सैला आमतौर पर समूह में किया जाता है। पुरुष और महिलाएँ अलग‑अलग कतारों में या एक साथ वृत्ताकार बनाकर नृत्य करते हैं। कदम सरल पर किफायती होते हैं जिनमें ताल और तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नृत्य के मूवमेंट में कदमों की झंझट कम और हाथों‑हाथों के सिंक…

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