शरीर का सारा रक्त किसके माध्यम से शुद्ध होता है?

Sanjay Yadav
शरीर का सारा रक्त वृक्क (किडनी) के माध्यम से शुद्ध होता है। मानव शरीर एक अत्यंत जटिल एवं सुव्यवस्थित जैविक तंत्र है जिसमें प्रत्येक अंग अपनी-अपनी विशिष्ट भूमिका निभाता है। इन अंगों में वृक्क (किडनी) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामान्यतः कहा जाता है कि शरीर का सारा रक्त वृक्कों के माध्यम से शुद्ध होता है। यह कथन पूर्णतः वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। किडनी न केवल रक्त को शुद्ध करती है बल्कि शरीर में जल-संतुलन, लवण-संतुलन, अम्ल-क्षार संतुलन तथा अनेक हार्मोनल क्रियाओं को भी नियंत्रित करती है।

शरीर का सारा रक्त वृक्क (किडनी) के माध्यम से शुद्ध होता है।

वृक्क का स्थान एवं संरचना

मानव शरीर में दो वृक्क होते हैं जो पेट के पिछले भाग में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित रहते हैं। प्रत्येक वृक्क सेम के आकार का होता है और इसका रंग गहरा लाल-भूरा होता है। वयस्क मनुष्य में प्रत्येक वृक्क की लंबाई लगभग 10–12 सेंटीमीटर होती है।

प्रत्येक वृक्क के भीतर सूक्ष्म संरचनात्मक इकाइयाँ पाई जाती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। एक वृक्क में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं। यही नेफ्रॉन रक्त के शोधन की वास्तविक इकाई होते हैं।

नेफ्रॉन की संरचना

नेफ्रॉन मुख्यतः दो भागों से मिलकर बना होता है:
  • बोमैन कैप्सूल एवं ग्लोमेरुलस
  • वृक्क नलिकाएँ (ट्यूब्यूल्स)
ग्लोमेरुलस सूक्ष्म केशिकाओं का जाल होता है जहाँ रक्त का प्राथमिक निस्यंदन (Filtration) होता है। इसके चारों ओर बोमैन कैप्सूल होता है जिसमें छना हुआ द्रव एकत्रित होता है। इसके बाद यह द्रव नलिकाओं से होकर गुजरता है जहाँ पुनः अवशोषण एवं स्रवण की प्रक्रियाएँ होती हैं।

रक्त शोधन की प्रक्रिया

वृक्क में रक्त शोधन की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में संपन्न होती है:

निस्यंदन (Filtration)
  • जब रक्त ग्लोमेरुलस से होकर गुजरता है तो उच्च दाब के कारण उसमें उपस्थित जल, लवण, ग्लूकोज, यूरिया आदि बोमैन कैप्सूल में छन जाते हैं। इस अवस्था में रक्त से अपशिष्ट पदार्थ अलग होने लगते हैं।
पुनः अवशोषण (Reabsorption)
  • निस्यंदित द्रव जब नलिकाओं से गुजरता है तब शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, आवश्यक लवण एवं अधिकांश जल पुनः रक्त में अवशोषित कर लिए जाते हैं।
स्रवण (Secretion)
  • इस चरण में कुछ अवांछित पदार्थ जैसे हाइड्रोजन आयन, पोटैशियम आयन, औषधियों के अवशेष आदि सीधे रक्त से नलिकाओं में स्रावित किए जाते हैं।
इन तीनों प्रक्रियाओं के पश्चात जो द्रव बचता है वही मूत्र कहलाता है।

क्या सच में सारा रक्त किडनी से होकर गुजरता है?

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो शरीर का सारा रक्त लगातार परिसंचरण करता रहता है। औसतन एक मिनट में लगभग 1200 मिलीलीटर रक्त वृक्कों तक पहुँचता है। इसका अर्थ है कि शरीर का पूरा रक्त कुछ ही समय में बार-बार किडनी से होकर गुजरता है। इस प्रकार यह कहना उचित है कि शरीर का सारा रक्त वृक्कों के माध्यम से शुद्ध होता है।

वृक्क के अन्य महत्वपूर्ण कार्य

जल एवं लवण संतुलन
  • वृक्क शरीर में जल की मात्रा को नियंत्रित करता है। अधिक जल होने पर अधिक मूत्र बनता है और कम जल होने पर मूत्र सघन हो जाता है।
अम्ल-क्षार संतुलन
  • रक्त का pH संतुलित रखना जीवन के लिए अनिवार्य है। वृक्क हाइड्रोजन एवं बाइकार्बोनेट आयनों के संतुलन द्वारा रक्त का pH नियंत्रित करता है।
हार्मोन स्राव
  • वृक्क से कुछ महत्वपूर्ण हार्मोन भी स्रावित होते हैं जैसे:
    • एरिथ्रोपोइटिन (जो लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में सहायक है)
    • रेनिन (जो रक्तचाप नियंत्रित करता है)

विषैले पदार्थों का निष्कासन

यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रिएटिनिन जैसे अपशिष्ट पदार्थ वृक्क द्वारा ही बाहर निकाले जाते हैं। यदि ऐसा न हो तो ये पदार्थ रक्त में जमा होकर विषाक्तता उत्पन्न कर सकते हैं।

वृक्क की कार्यक्षमता में कमी के दुष्परिणाम

यदि वृक्क ठीक प्रकार से कार्य न करे तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इससे निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:
  • रक्त में यूरिया की मात्रा बढ़ जाना
  • शरीर में सूजन आना
  • रक्तचाप का बढ़ना
  • एनीमिया
  • गंभीर अवस्था में मूत्रविषाक्तता (Uremia)

वृक्क को स्वस्थ रखने के उपाय

वृक्क हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक अंग हैं इसलिए इनका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। कुछ सरल उपाय इस प्रकार हैं:
  • पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ जल पीना
  • अत्यधिक नमक और तैलीय भोजन से बचना
  • नियमित व्यायाम करना
  • मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना
  • अनावश्यक दवाओं का सेवन न करना

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