भामा कलापम शास्त्रीय नृत्य-नाटिका किससे संबंधित है?

भामा कलापम शास्त्रीय नृत्य-नाटिका किससे संबंधित है?
भामा कलापम शास्त्रीय नृत्य-नाटिका कुचिपुड़ी से संबंधित है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य-परंपरा केवल देहगत गतियों का अभ्यास नहीं है बल्कि यह काव्य, संगीत, नाट्य, दर्शन और भक्ति का समन्वित रूप है। इसी परंपरा में कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश की वह विशिष्ट नृत्य-शैली है जो नृत्य-नाटिका (Dance-Drama) के रूप में अपनी पहचान बनाती है। कुचिपुड़ी की सबसे लोकप्रिय, प्रभावशाली और भावप्रधान प्रस्तुति “भामा कलापम” मानी जाती है। यह नृत्य-नाटिका सत्यभामा के चरित्र के माध्यम से श्रृंगार, मान (रूठना), अहं, पश्चाताप और अंततः भक्ति की यात्रा को मंच पर जीवंत करती है। भामा कलापम न केवल कुचिपुड़ी की सौंदर्यात्मक ऊँचाइयों का प्रतिनिधित्व करती है बल्कि यह दक्षिण भारतीय भक्ति-साहित्य, विशेषकर वैष्णव परंपरा, से गहरे रूप में जुड़ी हुई है। इसमें नाट्यशास्त्रीय सिद्धांत, अभिनय की सूक्ष्मता, कर्नाटक संगीत और लोक-परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है। कुचिपुड़ी नृत्य का परिचय कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है जिसकी जड़ें ग्राम-केंद्रित नाट्य परंपरा में हैं। प्रारंभ में यह केवल पुरुष कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया …

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