ऐतरेय ब्राह्मण किस वेद का है?
ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद का है। वैदिक साहित्य भारतीय संस्कृति और दर्शन की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध धरोहर है। यही साहित्य भारतीय धार्मिक, सामाजिक और दार्शनिक परंपराओं की नींव रखता है। वैदिक साहित्य को सामान्यतः संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद इन चार भागों में विभाजित किया जाता है। इनमें ब्राह्मण ग्रंथ यज्ञ, कर्मकांड और वैदिक मंत्रों की व्याख्या के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं ब्राह्मण ग्रंथों में ऐतरेय ब्राह्मण का विशेष स्थान है। यह एक सुविख्यात तथ्य है कि ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ है। ब्राह्मण ग्रंथों का सामान्य परिचय ब्राह्मण ग्रंथ वैदिक साहित्य का वह भाग हैं जिनमें यज्ञों की विधि, कर्मकांड, अनुष्ठान, बलि, आहुति तथा उनके दार्शनिक अर्थों का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये ग्रंथ वैदिक मंत्रों की व्याख्या करते हैं और बताते हैं कि किस मंत्र का प्रयोग किस यज्ञ में किस उद्देश्य से किया जाना चाहिए। ब्राह्मण ग्रंथों की मुख्य विशेषताएँ: यज्ञ-केंद्रित विचारधारा देवताओं की महिमा का वर्णन कर्म और फल के सिद्धांत पर बल धार्मिक अनुष्ठानों का विस्तृत विवरण ऐतरेय ब्राह्मण का नामकरण “ऐतर…