आँतों (Intestine) में प्रोटीनों को अमीनो अम्ल में अपघटित करने में उत्प्रेरक कौन होता है?

Sanjay Yadav
आँतों (Intestine) में प्रोटीनों को अमीनो अम्ल में अपघटित करने में उत्प्रेरक पेप्सिन एन्जाइम होता है। मानव शरीर में भोजन का पाचन एक अत्यंत जटिल, समन्वित और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। भोजन के माध्यम से प्राप्त पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन तथा खनिज तभी शरीर के लिए उपयोगी बनते हैं जब वे पाचन तंत्र द्वारा छोटे-छोटे अवशोषण योग्य घटकों में परिवर्तित हो जाएँ। इन पोषक तत्वों में प्रोटीन का विशेष महत्व है क्योंकि यही शरीर की संरचना, एन्जाइमों, हार्मोनों, प्रतिरक्षा तंत्र तथा ऊतकों की मरम्मत का आधार होते हैं।

आँतों (Intestine) में प्रोटीनों को अमीनो अम्ल में अपघटित करने में उत्प्रेरक पेप्सिन एन्जाइम होता है।

प्रोटीन अत्यधिक जटिल और बड़े अणु होते हैं। अतः उनका प्रत्यक्ष अवशोषण संभव नहीं होता। इन्हें पहले छोटे घटकों पेप्टाइड और अंततः अमीनो अम्ल में तोड़ा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में एन्जाइमों की भूमिका निर्णायक होती है। इन्हीं एन्जाइमों में एक प्रमुख एन्जाइम पेप्सिन (Pepsin) है जो प्रोटीन पाचन की प्रारंभिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

मानव पाचन तंत्र का परिचय

मानव पाचन तंत्र एक लंबी नलीनुमा संरचना है जिसकी लंबाई लगभग 8–9 मीटर होती है। इसके प्रमुख भाग हैं:
  • मुख (Mouth)
  • ग्रसनी (Pharynx)
  • अन्ननलिका (Oesophagus)
  • आमाशय (Stomach)
  • छोटी आँत (Small Intestine)
  • बड़ी आँत (Large Intestine)
पाचन की वास्तविक रासायनिक प्रक्रिया मुख से प्रारंभ होकर छोटी आँत में पूर्ण होती है। प्रोटीन पाचन का पहला प्रमुख चरण आमाशय में आरंभ होता है जहाँ पेप्सिन एन्जाइम सक्रिय भूमिका निभाता है।

प्रोटीन क्या हैं?

प्रोटीन उच्च अणुभार वाले कार्बनिक यौगिक हैं जो मुख्यतः कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा कभी-कभी सल्फर से बने होते हैं।

प्रोटीन की मूल इकाई अमीनो अम्ल है। लगभग 20 प्रकार के अमीनो अम्ल मिलकर विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों का निर्माण करते हैं।

प्रोटीन के कार्य

  • शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों का निर्माण
  • एन्जाइम और हार्मोन का निर्माण
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास
  • मांसपेशियों की वृद्धि और मरम्मत
  • ऊर्जा की आपूर्ति (आपात स्थिति में)

प्रोटीन पाचन की आवश्यकता

भोजन में उपस्थित प्रोटीन बड़े, जटिल और अघुलनशील होते हैं। आँतों की दीवारें केवल छोटे, घुलनशील अणुओं को ही अवशोषित कर सकती हैं। इसलिए प्रोटीन को पहले तोड़कर छोटे-छोटे अमीनो अम्लों में बदलना अनिवार्य है। यही कार्य विभिन्न प्रोटियोलाइटिक एन्जाइम करते हैं।

पेप्सिन एन्जाइम का परिचय

पेप्सिन एक प्रमुख प्रोटियोलाइटिक (Protein-digesting) एन्जाइम है जो प्रोटीन पाचन की शुरुआत करता है।

पेप्सिन की खोज
  • पेप्सिन की खोज 1836 में जर्मन वैज्ञानिक थियोडोर श्वान ने की थी। यह खोज जैव रसायन विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।

पेप्सिन का स्राव (Secretion of Pepsin)

पेप्सिन सीधे सक्रिय रूप में स्रावित नहीं होता बल्कि इसके निष्क्रिय रूप पेप्सिनोजन (Pepsinogen) का स्राव होता है।
  • पेप्सिनोजन का स्राव आमाशय की मुख्य कोशिकाओं (Chief cells) द्वारा किया जाता है।
  • आमाशय की पार्श्व कोशिकाएँ (Parietal cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का स्राव करती हैं।

पेप्सिनोजन से पेप्सिन में रूपांतरण

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की उपस्थिति में पेप्सिनोजन सक्रिय होकर पेप्सिन में बदल जाता है।
  • पेप्सिनोजन + HCl → पेप्सिन (सक्रिय)
यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि पेप्सिन सक्रिय रूप में ही स्रावित हो जाए तो वह आमाशय की दीवारों को ही पचाना प्रारंभ कर सकता है।

पेप्सिन के कार्य की प्रकृति

पेप्सिन एक एंडोपेप्टिडेज़ एन्जाइम है,अर्थात यह प्रोटीन अणु के भीतर उपस्थित पेप्टाइड बंधों को तोड़ता है।

पेप्सिन क्या करता है?

  • जटिल प्रोटीन → छोटे पॉलीपेप्टाइड
  • एल्ब्यूमिन, केसिन, मांस प्रोटीन आदि का अपघटन
पेप्सिन अमीनो अम्लों में पूर्ण विघटन नहीं करता बल्कि केवल प्रोटीन को छोटे टुकड़ों में तोड़ता है।

पेप्सिन की कार्य-स्थिति (Optimum Conditions)

पेप्सिन एक प्रमुख प्रोटियोलाइटिक एन्जाइम है जो प्रोटीन पाचन की प्रारंभिक अवस्था में सक्रिय भूमिका निभाता है। इसका प्रभावी कार्य कुछ विशिष्ट भौतिक एवं रासायनिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इन परिस्थितियों को पेप्सिन की कार्य-स्थिति या ऑप्टिमम कंडीशन्स कहा जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण कारक pH है। पेप्सिन अत्यंत अम्लीय माध्यम में ही सक्रिय रहता है। इसका आदर्श pH लगभग 1.5 से 2.0 होता है जो आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की उपस्थिति के कारण उपलब्ध रहता है। इसी अम्लीय वातावरण में पेप्सिन प्रोटीन अणुओं के पेप्टाइड बंधों को तोड़ने में सक्षम होता है।

दूसरा महत्वपूर्ण कारक तापमान है। पेप्सिन लगभग 37°C तापमान पर सबसे अधिक सक्रिय रहता है जो मानव शरीर का सामान्य तापमान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेप्सिन मानव शरीर की आंतरिक परिस्थितियों के अनुरूप ही कार्य करने के लिए अनुकूलित है।

तीसरा आवश्यक कारक माध्यम है। पेप्सिन केवल आमाशय के अम्लीय वातावरण में ही प्रभावी ढंग से कार्य करता है। जैसे ही अर्ध-पचित भोजन आमाशय से छोटी आँत में पहुँचता है और माध्यम क्षारीय हो जाता है पेप्सिन निष्क्रिय हो जाता है।

क्या पेप्सिन आँतों में कार्य करता है?

यहाँ एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक स्पष्टता आवश्यक है। तकनीकी रूप से पेप्सिन का सक्रिय कार्य आमाशय तक सीमित होता है। जब अर्ध-पचित भोजन (काइम) आमाशय से छोटी आँत में प्रवेश करता है तो वहाँ का माध्यम क्षारीय हो जाता है। इस क्षारीय वातावरण में पेप्सिन निष्क्रिय हो जाता है। अतः
  • प्रोटीन पाचन की शुरुआत पेप्सिन करता है*
  • पूर्ण अपघटन छोटी आँत में अन्य एन्जाइमों द्वारा होता है

छोटी आँत में प्रोटीन पाचन

छोटी आँत में अग्न्याशय (Pancreas) और आंत्र ग्रंथियों द्वारा कई शक्तिशाली एन्जाइम स्रावित होते हैं:

प्रमुख एन्जाइम
  • ट्रिप्सिन (Trypsin)
  • काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin)
  • कार्बोक्सीपेप्टिडेज़
  • अमीनोपेप्टिडेज़
ये एन्जाइम पेप्सिन द्वारा बने पॉलीपेप्टाइड को अमीनो अम्लों में बदल देते हैं।

पेप्सिन और ट्रिप्सिन में अंतर

पेप्सिन और ट्रिप्सिन दोनों ही प्रोटीन पाचन में सहायक प्रमुख एन्जाइम हैं किंतु इनके कार्य-स्थल, कार्य-विधि और परिस्थितियों में स्पष्ट अंतर पाया जाता है। पाचन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए दोनों एन्जाइम क्रमबद्ध रूप से कार्य करते हैं।

पेप्सिन प्रोटीन पाचन की प्रारंभिक अवस्था में सक्रिय होता है। इसका कार्य-स्थल आमाशय है जहाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की उपस्थिति के कारण वातावरण अम्लीय रहता है। पेप्सिन का स्राव आमाशय की ग्रंथियों द्वारा उसके निष्क्रिय रूप पेप्सिनोजन के रूप में किया जाता है जो अम्लीय माध्यम में सक्रिय होकर प्रोटीन को छोटे पेप्टाइडों में तोड़ देता है। इसलिए पेप्सिन को प्रोटीन के प्रारंभिक पाचन का एन्जाइम कहा जाता है।

इसके विपरीत, ट्रिप्सिन प्रोटीन पाचन के अगले चरण में कार्य करता है। इसका कार्य-स्थल छोटी आँत है जहाँ पित्त एवं अग्न्याशयी रस के कारण माध्यम क्षारीय हो जाता है। ट्रिप्सिन का स्राव अग्न्याशय द्वारा ट्रिप्सिनोजन के रूप में किया जाता है जो छोटी आँत में सक्रिय होकर पेप्सिन द्वारा बने पेप्टाइडों को आगे तोड़कर अमीनो अम्लों में परिवर्तित करता है। इस कारण ट्रिप्सिन को प्रोटीन के पूर्ण पाचन में सहायक एन्जाइम माना जाता है।

पेप्सिन की जैविक महत्ता

  • प्रोटीन पाचन की पहली कड़ी
  • अन्य एन्जाइमों के लिए प्रोटीन को तैयार करना
  • पाचन प्रक्रिया को तीव्र बनाना
  • पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता

पेप्सिन की कमी के प्रभाव

यदि किसी व्यक्ति में पेप्सिन या HCl का स्राव कम हो जाए तो:
  • अपच (Indigestion)
  • प्रोटीन की कमी
  • कमजोरी और कुपोषण
  • पेट में भारीपन
  • गैस और सूजन

चिकित्सीय उपयोग

  • पेप्सिन युक्त दवाएँ पाचन विकारों में दी जाती हैं
  • कृत्रिम पाचन (Artificial digestion) में प्रयोग
  • जैव रसायन प्रयोगशालाओं में प्रोटीन अध्ययन

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