तेल का जल के तल पर फैल जाने का क्या कारण है?

Sanjay Yadav
तेल का जल के तल पर फैल जाने का कारण यह है कि तेल का पृष्ठ तनाव जल की अपेक्षा कम होना है। हम अपने दैनिक जीवन में अनेक ऐसी घटनाएँ देखते हैं जिनके पीछे गहरे वैज्ञानिक सिद्धांत छिपे होते हैं। जब कभी आप पानी से भरे बर्तन में तेल की कुछ बूँदें डालते हैं तो आप यह अवश्य देखते होंगे कि तेल पानी के ऊपर एक पतली परत के रूप में फैल जाता है। यह घटना केवल रसोई तक सीमित नहीं है बल्कि समुद्र में तेल रिसाव (ऑयल स्पिल), रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाएँ, औद्योगिक प्रक्रियाएँ और पर्यावरण विज्ञान सभी जगह इसका महत्त्व है।

तेल का जल के तल पर फैल जाने का कारण यह है कि तेल का पृष्ठ तनाव जल की अपेक्षा कम होना है।

पृष्ठ तनाव की अवधारणा (Surface Tension)

पृष्ठ तनाव किसी द्रव की वह विशेषता है जिसके कारण उसकी सतह एक खिंची हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है। यह द्रव के अणुओं के बीच आकर्षण बल (cohesive force) के कारण उत्पन्न होता है।
  • द्रव के अंदर स्थित अणु चारों दिशाओं से समान आकर्षण बल अनुभव करते हैं।
  • सतह पर स्थित अणु ऊपर की ओर पड़ोसी अणुओं की कमी के कारण अंदर की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।
परिणामस्वरूप सतह सिकुड़ने की प्रवृत्ति दिखाती है और न्यूनतम क्षेत्रफल ग्रहण करती है। यही पृष्ठ तनाव है।

जल का पृष्ठ तनाव अधिक क्यों होता है?

जल का पृष्ठ तनाव अपेक्षाकृत अधिक (लगभग 72 mN/m कमरे के ताप पर) होता है। इसके प्रमुख कारण हैं:

हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bonding):
  • जल अणुओं के बीच शक्तिशाली हाइड्रोजन बंध बनते हैं जो अणुओं को मजबूती से जोड़े रखते हैं।
ध्रुवीय प्रकृति (Polarity):
  • जल एक ध्रुवीय अणु है। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बीच विद्युत आवेश का असमान वितरण मजबूत आकर्षण उत्पन्न करता है।
सघन आणविक संरचना:
  • जल के अणु पास-पास व्यवस्थित रहते हैं जिससे पृष्ठ पर खिंचाव अधिक होता है।
इन्हीं कारणों से जल की सतह अपेक्षाकृत “कठोर” या अधिक खिंची हुई प्रतीत होती है।

तेल का पृष्ठ तनाव कम क्यों होता है?

तेल विभिन्न प्रकार के हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण होता है और इसकी विशेषताएँ जल से भिन्न होती हैं:

अध्रुवीय प्रकृति (Non-polar):
  • तेल के अणु अध्रुवीय होते हैं। इनके बीच हाइड्रोजन बंध नहीं बनते।
कम आकर्षण बल:
  • तेल के अणुओं के बीच आकर्षण बल जल की तुलना में कमजोर होता है।
लचीली सतह:
  • कम पृष्ठ तनाव (लगभग 20–35 mN/m, तेल के प्रकार पर निर्भर) के कारण तेल की सतह आसानी से फैल सकती है।
इसीलिए तेल जल की तुलना में अधिक सरलता से फैलता है।

तेल का जल पर फैलना: मूल कारण

जब तेल और जल संपर्क में आते हैं तो तीन प्रकार के पृष्ठ तनाव/अंतरफलीय तनाव (Interfacial Tension) महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं:
  • जल–वायु पृष्ठ तनाव
  • तेल–वायु पृष्ठ तनाव
  • तेल–जल अंतरफलीय तनाव
तेल का पृष्ठ तनाव जल से कम होने के कारण प्रणाली की कुल सतही ऊर्जा कम करने के लिए तेल जल की सतह पर फैल जाता है। यह फैलाव तब तक जारी रहता है जब तक ऊर्जा न्यूनतम न हो जाए।

सरल शब्दों में:
  • प्रकृति हमेशा न्यूनतम ऊर्जा की अवस्था चुनती है।
  • तेल का फैलना इसी सिद्धांत का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

क्या तेल “डूबता” है या “तैरता” है?

यहाँ एक सामान्य भ्रम होता है। तेल का जल पर फैलना और तैरना दो अलग अवधारणाएँ हैं।

तैरना (Floating):
  • यह घनत्व (Density) पर निर्भर करता है। अधिकांश तेलों का घनत्व जल से कम होता है इसलिए वे तैरते हैं।
फैलना (Spreading):
  • यह पृष्ठ तनाव पर निर्भर करता है। तेल का पृष्ठ तनाव कम होने से वह सतह पर फैलता है।
इस प्रकार, तेल का फैलना केवल घनत्व के कारण नहीं बल्कि मुख्यतः पृष्ठ तनाव के कारण होता है।

प्रयोग द्वारा पुष्टि

सरल प्रयोग:
  • एक साफ कटोरी में पानी भरें।
  • पानी की सतह पर काली मिर्च छिड़कें। यह पृष्ठ तनाव को दर्शाएगी।
  • अब एक बूँद तेल डालें।
परिणाम:
  • तेल डालते ही काली मिर्च दूर हटती दिखेगी और तेल सतह पर फैल जाएगा।
यह प्रयोग दर्शाता है कि तेल सतह के पृष्ठ तनाव को कम कर देता है।

साबुन और डिटर्जेंट का प्रभाव

साबुन/डिटर्जेंट पृष्ठ तनाव घटाने वाले पदार्थ (Surfactants) होते हैं।
  • जब साबुन पानी में मिलाया जाता है तो वह जल का पृष्ठ तनाव घटा देता है।
  • इसी कारण साबुन तेल को छोटे-छोटे कणों (emulsion) में तोड़ देता है।
  • इससे तेल का फैलाव नियंत्रित हो जाता है और सफाई संभव होती है।
यह सिद्धांत कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और औद्योगिक सफाई में अत्यंत उपयोगी है।

समुद्र में तेल रिसाव (Oil Spill) और पृष्ठ तनाव

समुद्र में तेल रिसाव एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है।
  • तेल का कम पृष्ठ तनाव उसे समुद्र की सतह पर तेजी से फैलने देता है।
  • यह फैलाव समुद्री जीवों, पक्षियों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाता है।
सफाई अभियानों में विशेष डिस्पर्सेंट्स का प्रयोग किया जाता है जो पृष्ठ तनाव को बदलकर तेल को नियंत्रित करते हैं।

जैविक और औद्योगिक महत्त्व

तेल–जल पृष्ठ तनाव का अध्ययन निम्न क्षेत्रों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है:
  • औषधि उद्योग: दवाओं के इमल्शन (Emulsion)
  • खाद्य उद्योग: दूध, घी, सॉस आदि
  • पेट्रोलियम उद्योग: कच्चे तेल का परिष्करण
  • पर्यावरण विज्ञान: प्रदूषण नियंत्रण

संबंधित भ्रांतियाँ और उनका निवारण

भ्रांति 1: तेल इसलिए फैलता है क्योंकि वह हल्का है।
सत्य: हल्का होना तैरने का कारण है फैलने का नहीं।

भ्रांति 2: तेल और पानी मिल जाते हैं।

सत्य: तेल और पानी अमिश्रणीय (Immiscible) हैं; वे केवल सतह पर संपर्क करते हैं।

भ्रांति 3: सभी द्रव समान रूप से फैलते हैं।

सत्य: फैलाव पृष्ठ तनाव पर निर्भर करता है; हर द्रव का पृष्ठ तनाव अलग होता है।

गणितीय और सैद्धांतिक दृष्टि (संक्षेप)

यदि
  • γ₁ = जल का पृष्ठ तनाव
  • γ₂ = तेल का पृष्ठ तनाव
  • γ₁₂ = तेल–जल अंतरफलीय तनाव
तो फैलाव की शर्त होती है कि प्रणाली की कुल सतही ऊर्जा घटे।
  • तेल का फैलना तब संभव है जब γ₁ > γ₂ + γ₁₂ हो (सरलीकृत अवधारणा)।

दैनिक जीवन के और उदाहरण

सूप या दाल में घी की परत
बारिश के पानी पर ईंधन की पतली परत
त्वचा पर तेल लगाने पर उसका फैल जाना
ये सभी उदाहरण पृष्ठ तनाव के अंतर को दर्शाते हैं।

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