कैलोमल क्या होता है?

Sanjay Yadav
कैलोमल मरक्यूरस क्लोराइड (Hg₂Cl₂) होता है। रसायन विज्ञान में अनेक ऐसे यौगिक हैं जिनका महत्व केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहता बल्कि उनका उपयोग चिकित्सा, औद्योगिक प्रक्रियाओं, विश्लेषणात्मक रसायन, तथा ऐतिहासिक संदर्भों में भी मिलता है। कैलोमल (Calomel) ऐसा ही एक प्रसिद्ध रासायनिक यौगिक है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्थापित तथ्य है कि कैलोमल मरक्यूरस क्लोराइड (Hg₂Cl₂) होता है। यह यौगिक पारे (Mercury) के यौगिकों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और लंबे समय तक औषधीय, विश्लेषणात्मक तथा वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रयुक्त होता रहा है।

कैलोमल मरक्यूरस क्लोराइड (Hg₂Cl₂) होता है।

कैलोमल का परिचय

कैलोमल एक अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र Hg₂Cl₂ है। इसे मरक्यूरस क्लोराइड कहा जाता है क्योंकि इसमें पारा +1 ऑक्सीकरण अवस्था (Mercurous state) में पाया जाता है। यह पारे का द्विमूलकीय (dimeric) यौगिक है जिसमें दो पारा परमाणु आपस में जुड़े होते हैं और दोनों के साथ एक-एक क्लोरीन परमाणु जुड़ा रहता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो:
  • कैलोमल = मरक्यूरस क्लोराइड = Hg₂Cl₂

नामकरण और शब्द-उत्पत्ति

“Calomel” शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मानी जाती है:
  • Kalos (सुंदर)
  • Melas (काला)
यद्यपि कैलोमल स्वयं श्वेत या हल्के पीले रंग का ठोस होता है लेकिन गर्म करने पर यह काले रंग के पारे में परिवर्तित हो सकता है। इसी कारण इसे यह नाम दिया गया।

रासायनिक सूत्र और संरचना

कैलोमल का रासायनिक सूत्र Hg₂Cl₂ है। इस सूत्र से निम्न तथ्य स्पष्ट होते हैं:
  • इसमें दो पारा (Hg) परमाणु होते हैं
  • इसमें दो क्लोरीन (Cl) परमाणु होते हैं
  • पारा +1 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है
संरचना की दृष्टि से Hg–Hg बंध उपस्थित रहता है जो इसे मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl₂) से अलग बनाता है। मरक्यूरिक क्लोराइड में पारा +2 अवस्था में होता है जबकि कैलोमल में +1 अवस्था में।

भौतिक गुण (Physical Properties)

कैलोमल के प्रमुख भौतिक गुण निम्नलिखित हैं:
  • रंग – श्वेत या हल्का पीला
  • अवस्था – ठोस
  • स्वाद – लगभग स्वादहीन
  • घुलनशीलता – जल में अघुलनशील, अल्कोहल में बहुत कम घुलनशील
  • घनत्व – अपेक्षाकृत अधिक
  • उष्मा का प्रभाव – गर्म करने पर यह पारे और मरक्यूरिक क्लोराइड में अपघटित हो सकता है
इन गुणों के कारण कैलोमल को लंबे समय तक औषधीय उपयोग के लिए अपेक्षाकृत “कम घातक” पारे का यौगिक माना गया।

रासायनिक गुण (Chemical Properties)

कैलोमल के कुछ प्रमुख रासायनिक गुण इस प्रकार हैं:

ऑक्सीकरण पर प्रभाव
  • कैलोमल ऑक्सीकारकों की उपस्थिति में मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl₂) में परिवर्तित हो सकता है।
अमोनिया के साथ अभिक्रिया
  • अमोनिया के साथ प्रतिक्रिया करने पर कैलोमल काले रंग का मिश्रण देता है जो पारे की उपस्थिति को दर्शाता है।
प्रकाश का प्रभाव
  • दीर्घकाल तक प्रकाश में रखने पर कैलोमल धीरे-धीरे अपघटित होने लगता है।

कैलोमल के निर्माण की विधियाँ

मरक्यूरिक क्लोराइड का अपचयन
  • मरक्यूरिक क्लोराइड को धात्विक पारे की उपस्थिति में अपचयित करके कैलोमल प्राप्त किया जा सकता है।
प्रत्यक्ष विधि
  • पारे और क्लोरीन की नियंत्रित अभिक्रिया द्वारा भी कैलोमल बनाया जा सकता है।
इन विधियों में तापमान और परिस्थितियों का नियंत्रण अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि अधिक ऑक्सीकरण से HgCl₂ बन सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कैलोमल का उपयोग प्राचीन और मध्यकालीन चिकित्सा पद्धतियों में व्यापक रूप से किया गया। आयुर्वेद, यूनानी और पश्चिमी चिकित्सा प्रणालियों में इसे:
  • विरेचक (Purgative)
  • कृमिनाशक
  • त्वचा रोगों की औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता था।
18वीं और 19वीं शताब्दी में यह यूरोप और अमेरिका में अत्यंत लोकप्रिय औषधि थी।

औषधीय उपयोग (Medicinal Uses)

इतिहास में कैलोमल के निम्नलिखित औषधीय उपयोग रहे:
  • विरेचक औषधि – कब्ज के उपचार में
  • कृमिनाशक – आँतों के कीड़ों को नष्ट करने के लिए
  • सिफलिस जैसे रोगों के उपचार में
  • त्वचा रोगों में बाह्य उपयोग
हालाँकि बाद में इसके दुष्प्रभाव सामने आने के कारण इसका प्रयोग कम कर दिया गया।

विषाक्तता और दुष्प्रभाव

यद्यपि कैलोमल को मरक्यूरिक क्लोराइड की तुलना में कम विषैला माना जाता है फिर भी यह पारे का यौगिक है और पूर्णतः सुरक्षित नहीं है।

संभावित दुष्प्रभाव
  • पारा विषाक्तता (Mercury poisoning)
  • दाँतों और मसूड़ों पर प्रभाव
  • तंत्रिका तंत्र पर दुष्प्रभाव
  • गुर्दे को क्षति
इन्हीं कारणों से आधुनिक चिकित्सा में कैलोमल का प्रयोग लगभग समाप्त हो चुका है।

आधुनिक विज्ञान में कैलोमल

आज के समय में कैलोमल का उपयोग मुख्यतः
  • शैक्षिक उद्देश्यों
  • विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान
  • मानक संदर्भ यौगिकों तक सीमित है। 
चिकित्सा में इसके स्थान पर सुरक्षित औषधियाँ प्रयुक्त की जाती हैं।

कैलोमल बनाम मरक्यूरिक क्लोराइड

रसायन विज्ञान में कैलोमल और मरक्यूरिक क्लोराइड दोनों ही पारे (Mercury) के महत्वपूर्ण यौगिक हैं किंतु इनके गुण, प्रभाव और उपयोग में स्पष्ट अंतर पाया जाता है। इन दोनों की तुलना से पारे की ऑक्सीकरण अवस्थाओं, विषाक्तता और औषधीय महत्व को समझना सरल हो जाता है।

कैलोमल का रासायनिक सूत्र Hg₂Cl₂ है जिसमें पारा +1 ऑक्सीकरण अवस्था में पाया जाता है। इसी कारण इसे मरक्यूरस क्लोराइड कहा जाता है। इसके विपरीत, मरक्यूरिक क्लोराइड का सूत्र HgCl₂ है जिसमें पारा +2 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है। ऑक्सीकरण अवस्था का यह अंतर दोनों यौगिकों के रासायनिक व्यवहार और जैविक प्रभावों को गहराई से प्रभावित करता है।

विषाक्तता की दृष्टि से कैलोमल को मरक्यूरिक क्लोराइड की तुलना में कम विषैला माना गया है। यही कारण है कि अतीत में कैलोमल का उपयोग चिकित्सा में किया गया जबकि मरक्यूरिक क्लोराइड को अत्यधिक विषैला मानते हुए इसके औषधीय प्रयोग बहुत सीमित रखे गए। हालाँकि, आधुनिक विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि कैलोमल भी पूर्णतः सुरक्षित नहीं है क्योंकि यह पारे का यौगिक है और दीर्घकालिक उपयोग से दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

रंग के संदर्भ में दोनों यौगिक श्वेत होते हैं। इसलिए केवल रंग के आधार पर इन्हें अलग करना संभव नहीं होता। इनके बीच वास्तविक भिन्नता उनकी रासायनिक संरचना, क्रियाशीलता और जैविक प्रभावों में निहित है।

औषधीय उपयोग की बात करें तो कैलोमल का उपयोग ऐतिहासिक रूप से विरेचक, कृमिनाशक और कुछ रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। इसके विपरीत, मरक्यूरिक क्लोराइड की अत्यधिक विषाक्तता के कारण इसका औषधीय प्रयोग बहुत सीमित रहा और इसे मुख्यतः रासायनिक या प्रयोगशाला प्रयोजनों तक ही सीमित रखा गया।

इस प्रकार, कैलोमल और मरक्यूरिक क्लोराइड की तुलना से यह स्पष्ट होता है कि यद्यपि दोनों पारे के क्लोराइड यौगिक हैं और देखने में समान प्रतीत होते हैं फिर भी उनकी ऑक्सीकरण अवस्था, विषाक्तता और उपयोगिता में मूलभूत अंतर है। यही कारण है कि रसायन विज्ञान और सामान्य ज्ञान में इन दोनों यौगिकों को अलग-अलग महत्व के साथ अध्ययन किया जाता है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण

पारे के यौगिक पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। कैलोमल का अनुचित निपटान मिट्टी और जल को प्रदूषित कर सकता है। आधुनिक विज्ञान में पारे के यौगिकों के उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Post a Comment