पेंसिल का लेड क्या होता है?

Sanjay Yadav
पेंसिल का लेड ग्रेफाइट होता है। हम सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी पेंसिल से अवश्य लिखा है। बचपन की पहली लिखावट से लेकर बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कलाकारों तक पेंसिल मानव सभ्यता के बौद्धिक विकास की एक सरल किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण साधन रही है। परंतु एक सामान्य-सी दिखने वाली पेंसिल के बारे में एक आम भ्रांति बहुत समय से प्रचलित है कि पेंसिल के अंदर जो पदार्थ होता है वह लेड (सीसा) है। वास्तविकता यह है कि पेंसिल में लेड नहीं बल्कि ग्रेफाइट (Graphite) होता है जो कार्बन का ही एक विशेष रूप है।

पेंसिल का लेड ग्रेफाइट होता है।

पेंसिल का परिचय

पेंसिल एक ऐसा लेखन उपकरण है जिसमें लकड़ी या किसी अन्य आवरण के भीतर एक पतली छड़ (कोर) होती है। यह कोर काग़ज़ पर घर्षण के कारण निशान बनाती है जिससे हम अक्षर या चित्र बनाते हैं।

पेंसिल का मुख्य भाग जिसे आम भाषा में “लेड” कहा जाता है असल में ग्रेफाइट और मिट्टी (क्ले) का मिश्रण होता है। इसी मिश्रण के अनुपात के आधार पर पेंसिल की कठोरता या कोमलता निर्धारित की जाती है।

“लेड” शब्द की भ्रांति कैसे पैदा हुई?

16वीं शताब्दी में जब पहली बार इंग्लैंड के कंबरलैंड क्षेत्र में ग्रेफाइट की बड़ी मात्रा खोजी गई तब लोगों को इसके वास्तविक रासायनिक स्वरूप की जानकारी नहीं थी। उस समय यह पदार्थ देखने में धातु जैसा था और काले निशान छोड़ता था। इसलिए लोगों ने इसे लेड (सीसा) समझ लिया। इसी कारण इसे Black Lead कहा जाने लगा।

हालाँकि बाद में वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह स्पष्ट हो गया कि यह पदार्थ सीसा नहीं बल्कि कार्बन का एक अपरूप (Allotrope) है। फिर भी “पेंसिल लेड” शब्द प्रचलन में बना रहा।

ग्रेफाइट क्या है?

परिभाषा
  • ग्रेफाइट कार्बन का एक क्रिस्टलीय रूप है जिसमें कार्बन के परमाणु षट्भुज (Hexagonal) जाल के रूप में व्यवस्थित होते हैं।
रासायनिक संरचना
  • रासायनिक तत्व: कार्बन (C)
  • कोई धातु नहीं
  • पूर्णतः अधात्विक पदार्थ
भौतिक स्वरूप
  • रंग: काला या गहरा स्लेटी
  • चमक: धात्विक-सी चमक
  • स्पर्श: चिकना
  • कठोरता: बहुत कम

कार्बन के अपरूप और ग्रेफाइट

कार्बन एक ऐसा तत्व है जो विभिन्न रूपों में पाया जाता है। इन्हें अपरूप (Allotropes) कहा जाता है।

कार्बन के प्रमुख अपरूप:
  • हीरा (Diamond) – अत्यंत कठोर
  • ग्रेफाइट (Graphite) – मुलायम, फिसलनदार
  • फुलरीन (Fullerene)
  • ग्रैफीन (Graphene)
  • कोयला (Coal)
इनमें ग्रेफाइट ही वह अपरूप है जो पेंसिल में उपयोग किया जाता है।

ग्रेफाइट के भौतिक गुण

ग्रेफाइट के गुण ही उसे पेंसिल के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

मुलायम संरचना
  • ग्रेफाइट की परतें एक-दूसरे पर कमजोर बलों से जुड़ी होती हैं। लिखते समय ये परतें आसानी से टूटकर काग़ज़ पर चिपक जाती हैं।
चिकनापन
  • इसका चिकना स्वभाव लिखते समय घर्षण को कम करता है।
विद्युत चालकता
  • ग्रेफाइट एक अच्छा विद्युत चालक भी है जो इसे अन्य कार्बन अपरूपों से अलग बनाता है।
उच्च ताप सहनशीलता
  • ग्रेफाइट उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है।

ग्रेफाइट और सीसा (लेड) में अंतर

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि पेंसिल में प्रयुक्त पदार्थ सीसा (लेड) होता है जबकि वास्तव में यह ग्रेफाइट होता है। ग्रेफाइट और सीसा देखने में कुछ हद तक समान लग सकते हैं लेकिन उनकी प्रकृति, रासायनिक संरचना, गुण और उपयोग एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। विज्ञान की दृष्टि से इन दोनों के बीच अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है।

सबसे पहले यदि प्रकृति की बात करें तो ग्रेफाइट एक अधातु है जबकि सीसा एक धातु है। ग्रेफाइट कार्बन का अपरूप है और इसमें धातुओं जैसे गुण नहीं पाए जाते। वहीं सीसा एक भारी धातु है जिसमें धात्विक चमक और चालकता होती है।

रासायनिक तत्व के रूप में ग्रेफाइट पूरी तरह से कार्बन (C) से बना होता है जबकि सीसा का रासायनिक संकेत Pb (Lead) होता है। दोनों की परमाणु संरचना और रासायनिक व्यवहार एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न हैं।

विषाक्तता के संदर्भ में भी दोनों में बड़ा अंतर है। ग्रेफाइट विषैला नहीं होता और सामान्य उपयोग में यह मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है। इसके विपरीत, सीसा अत्यधिक विषैला होता है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं जैसे तंत्रिका तंत्र को क्षति और रक्त विकार।

उपयोग की दृष्टि से ग्रेफाइट का प्रयोग मुख्य रूप से पेंसिल बनाने, इलेक्ट्रोड, स्नेहक और परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। वहीं सीसा का उपयोग बैटरियों, पाइपों, केबल आवरण और विकिरण से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पदार्थों के उपयोग क्षेत्र भी पूरी तरह अलग हैं।

यदि रंग की बात करें तो ग्रेफाइट का रंग सामान्यतः काला या गहरा स्लेटी होता है जबकि सीसा का रंग धूसर (Gray) होता है और उसमें हल्की धात्विक चमक दिखाई देती है।

पेंसिल में ग्रेफाइट का उपयोग क्यों?

ग्रेफाइट के कुछ विशिष्ट गुण इसे लेखन के लिए आदर्श बनाते हैं:
  • काग़ज़ पर आसानी से निशान छोड़ना
  • स्याही की तरह फैलता नहीं
  • मिटाया जा सकता है
  • टिकाऊ और सस्ता
यदि पेंसिल में वास्तव में सीसा होता तो वह न तो लिखने योग्य होता और न ही सुरक्षित।

पेंसिल का निर्माण कैसे होता है?

  • ग्रेफाइट का शोधन
    • प्राकृतिक ग्रेफाइट को खदानों से निकालकर शुद्ध किया जाता है।
  • मिश्रण तैयार करना
    • ग्रेफाइट पाउडर में मिट्टी (Clay) और पानी मिलाया जाता है।
  • कोर बनाना
    • इस मिश्रण को पतली छड़ों के रूप में ढाला जाता है।
  • ताप उपचार
    • इन छड़ों को भट्टी में पकाया जाता है ताकि वे मजबूत हो जाएँ।
  • लकड़ी में फिटिंग
    • तैयार कोर को लकड़ी के दो टुकड़ों के बीच चिपकाकर पेंसिल बनाई जाती है।

H, B और HB पेंसिल का वैज्ञानिक रहस्य

पेंसिल पर लिखे H और B अक्षर उसकी कठोरता को दर्शाते हैं।
  • H (Hard) – अधिक मिट्टी, कम ग्रेफाइट
  • B (Black) – अधिक ग्रेफाइट, कम मिट्टी
  • HB – संतुलित
ग्रेफाइट की मात्रा जितनी अधिक, पेंसिल उतनी मुलायम और गहरी लिखावट वाली होती है।

क्या पेंसिल जहरीली होती है?

यह एक आम प्रश्न है विशेषकर बच्चों के संदर्भ में।

वैज्ञानिक सत्य
  • पेंसिल में कोई सीसा नहीं होता
  • ग्रेफाइट विषैला नहीं है
  • गलती से निगलने पर भी गंभीर विषाक्त प्रभाव नहीं होते
हालाँकि, लकड़ी या नुकीले भाग से चोट लग सकती है इसलिए सावधानी आवश्यक है।

ग्रेफाइट के अन्य उपयोग

ग्रेफाइट केवल पेंसिल तक सीमित नहीं है।

प्रमुख उपयोग:
  • विद्युत मोटरों में ब्रश
  • परमाणु रिएक्टरों में मंदक
  • स्नेहक (Lubricant)
  • बैटरियों में इलेक्ट्रोड
  • उच्च ताप सहने वाले क्रूसिबल

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