गामा (γ) किरणों पर किस प्रकार का आवेश होता है?

गामा (γ) किरणों पर किस प्रकार का आवेश होता है?
गामा (γ) किरणों पर किसी प्रकार का आवेश नहीं होता है। आधुनिक भौतिकी और नाभिकीय विज्ञान में गामा (γ) किरणों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये किरणें न केवल रेडियोधर्मिता (Radioactivity) की प्रक्रिया को समझने में सहायक हैं बल्कि चिकित्सा, उद्योग, खगोल विज्ञान और रक्षा विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में भी इनका व्यापक उपयोग होता है। गामा किरणों की सबसे प्रमुख और विशिष्ट विशेषता यह है कि इन पर किसी प्रकार का विद्युत आवेश नहीं होता। यही गुण इन्हें अल्फा (α) और बीटा (β) कणों से मूल रूप से भिन्न बनाता है। गामा किरणों का परिचय गामा किरणें विद्युतचुंबकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) का ही एक रूप हैं। इन्हें सबसे पहले 1900 ई. में फ्रांसीसी वैज्ञानिक पॉल विलार्ड ने खोजा था। बाद में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने इन्हें गामा किरणों का नाम दिया। विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम (Electromagnetic Spectrum) में गामा किरणों का स्थान सबसे उच्च ऊर्जा और सबसे कम तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाले भाग में होता है। इनकी तरंगदैर्ध्य सामान्यतः 10^-12 मीटर से भी कम होती है। गामा किरणों की उत्पत्ति गामा किरणें मुख्यतः नाभिकीय प्रक्रियाओ…

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