परमाणु बिजली घरों में किस प्रकार की न्यूक्लियर अभिक्रिया होती है?

Sanjay Yadav
परमाणु बिजली घरों में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन (Controlled Nuclear Fission) अभिक्रिया होती है। ऊर्जा आधुनिक सभ्यता की जीवनरेखा है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और तकनीकी विकास के साथ-साथ ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सीमित हैं तथा इनके उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक वैकल्पिक, उच्च-ऊर्जा घनत्व वाला और अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्रोत है।

परमाणु बिजली घरों में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन (Controlled Nuclear Fission) अभिक्रिया होती है।

परमाणु बिजली घरों में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन की अभिक्रिया के माध्यम से अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न की जाती है जिसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

नाभिकीय ऊर्जा का इतिहास

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में वैज्ञानिकों ने परमाणु संरचना और नाभिकीय बलों का अध्ययन शुरू किया। जब यह ज्ञात हुआ कि भारी नाभिकों को तोड़ने पर विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है तब नाभिकीय विखंडन की खोज ने ऊर्जा विज्ञान में क्रांति ला दी।

प्रारंभ में इसका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए हुआ किंतु शीघ्र ही यह समझ में आया कि यदि इस प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाए तो इसे शांतिपूर्ण विद्युत उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसी विचार से परमाणु बिजली घरों का विकास हुआ।

नाभिकीय विखंडन क्या है?

नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी भारी परमाणु नाभिक (जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239) पर न्यूट्रॉन के प्रहार से वह नाभिक टूटकर दो या अधिक हल्के नाभिकों में विभाजित हो जाता है। इस विभाजन के साथ-साथ:
  • अत्यधिक ऊष्मा ऊर्जा निकलती है
  • 2 से 3 नए न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं
  • गामा विकिरण उत्पन्न होता है
यह ऊर्जा आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सिद्धांत (E = mc²) के अनुसार द्रव्यमान की क्षति से प्राप्त होती है।

नियंत्रित और अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन में अंतर

नाभिकीय विखंडन दो प्रकार से हो सकता है:

अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन:
  • न्यूट्रॉनों की संख्या पर कोई नियंत्रण नहीं होता
  • अभिक्रिया अत्यंत तीव्र होती है
  • बहुत कम समय में विशाल ऊर्जा निकलती है
  • परमाणु बम इसका उदाहरण है
नियंत्रित नाभिकीय विखंडन:
  • न्यूट्रॉनों की संख्या को नियंत्रित किया जाता है
  • अभिक्रिया क्रमिक और स्थिर गति से चलती है
  • उत्पन्न ऊष्मा को सुरक्षित रूप से उपयोग किया जाता है
  • परमाणु बिजली घरों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है

परमाणु बिजली घर का मूल सिद्धांत

परमाणु बिजली घर का कार्य सिद्धांत पारंपरिक ताप विद्युत संयंत्र जैसा ही है। अंतर केवल ऊष्मा के स्रोत में होता है। जहाँ कोयला या गैस संयंत्रों में ईंधन जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है वहीं परमाणु संयंत्र में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन से ऊष्मा उत्पन्न होती है।

मुख्य चरण:
  • नाभिकीय ऊर्जा → ऊष्मा ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा

परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactor)

परमाणु बिजली घर का हृदय परमाणु रिएक्टर होता है। यहीं नियंत्रित नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया संचालित की जाती है।

परमाणु रिएक्टर के प्रमुख घटक:

नाभिकीय ईंधन
  • सामान्यतः यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239
  • ईंधन छड़ों (Fuel Rods) के रूप में व्यवस्थित
  • विखंडन का मूल स्रोत
मंदक (Moderator)
  • न्यूट्रॉनों की गति कम करता है
  • धीमे न्यूट्रॉन विखंडन की संभावना बढ़ाते हैं
  • सामान्य मंदक:
    • साधारण जल
    • भारी जल
    • ग्रेफाइट
नियंत्रण छड़ें (Control Rods)
  • न्यूट्रॉनों को अवशोषित करती हैं
  • अभिक्रिया की गति नियंत्रित करती हैं
  • सामान्यतः कैडमियम या बोरॉन से बनी होती हैं
शीतलक (Coolant)
  • रिएक्टर में उत्पन्न ऊष्मा को बाहर ले जाता है
  • जल, भारी जल, कार्बन डाइऑक्साइड या तरल धातु का प्रयोग
रिएक्टर पात्र और सुरक्षा आवरण
  • उच्च दाब और ताप सहने योग्य
  • विकिरण को बाहर निकलने से रोकता है

नियंत्रित नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया

जब रिएक्टर में ईंधन पर न्यूट्रॉन गिरते हैं तो विखंडन होता है। इससे नए न्यूट्रॉन निकलते हैं जो आगे और नाभिकों को तोड़ते हैं। यदि सभी न्यूट्रॉन स्वतंत्र रूप से कार्य करें तो अभिक्रिया अनियंत्रित हो जाएगी। इसलिए नियंत्रण छड़ों द्वारा कुछ न्यूट्रॉनों को अवशोषित कर लिया जाता है। इस प्रकार न्यूट्रॉनों की संख्या संतुलित रखी जाती है और श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) नियंत्रित रूप से चलती रहती है।

ऊष्मा से विद्युत तक की यात्रा

ऊष्मा उत्पादन
  • रिएक्टर में नियंत्रित विखंडन से ऊष्मा उत्पन्न होती है
भाप निर्माण
  • शीतलक ऊष्मा को बॉयलर या स्टीम जनरेटर तक ले जाता है
  • जल भाप में परिवर्तित हो जाता है
टरबाइन का घूर्णन
  • उच्च दाब की भाप टरबाइन को घुमाती है
जनरेटर द्वारा विद्युत उत्पादन
  • टरबाइन जनरेटर से जुड़ी होती है
  • यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है
संघनन और पुनः उपयोग
  • भाप को ठंडा कर जल बनाया जाता है
  • जल को फिर से प्रणाली में भेज दिया जाता है

परमाणु बिजली घरों में सुरक्षा उपाय

परमाणु ऊर्जा के साथ सुरक्षा का विशेष महत्व है। इसलिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्थाएँ होती हैं:
  • बहु-स्तरीय नियंत्रण प्रणाली
  • आपातकालीन शीतलक प्रणाली
  • विकिरण रोकने के लिए मोटे कंक्रीट और स्टील के आवरण
  • स्वचालित रिएक्टर शट-डाउन प्रणाली
  • नियमित निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन

परमाणु बिजली घरों के लाभ

अत्यधिक ऊर्जा उत्पादन
  • थोड़े से ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा
कम कार्बन उत्सर्जन
  • ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन न्यूनतम
लगातार विद्युत आपूर्ति
  • मौसम पर निर्भर नहीं
ईंधन की दीर्घकालिक उपलब्धता
  • लंबे समय तक उपयोग योग्य

परमाणु बिजली घरों की सीमाएँ

  • प्रारंभिक लागत बहुत अधिक
  • रेडियोधर्मी अपशिष्ट का निपटान कठिन
  • दुर्घटना की स्थिति में गंभीर परिणाम
  • तकनीकी और सुरक्षा विशेषज्ञता की आवश्यकता

रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन

नाभिकीय ईंधन के उपयोग के बाद जो अपशिष्ट बचता है वह लंबे समय तक विकिरण उत्सर्जित करता है। इसके लिए:
  • सुरक्षित कंटेनरों में संग्रह
  • गहरे भू-भंडारण स्थल
  • पुनः प्रसंस्करण तकनीक जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।

भारत में परमाणु बिजली घर

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा को अपनाया है। देश में कई परमाणु बिजली घर कार्यरत हैं जो राष्ट्रीय ग्रिड को विद्युत आपूर्ति करते हैं। भारत की परमाणु नीति शांतिपूर्ण उपयोग, स्वदेशी तकनीक और उच्च सुरक्षा मानकों पर आधारित है।

भारत में परमाणु बिजली घरों की सूची:
  • तारापुर परमाणु बिजली घर
    • राज्य: महाराष्ट्र
    • स्थापना: 1969
    • विशेषता: भारत का पहला परमाणु बिजली घर
  • रावतभाटा परमाणु बिजली घर
    • राज्य: राजस्थान
    • स्थापना: 1973
    • अन्य नाम: राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना
  • कलपक्कम परमाणु बिजली घर
    • राज्य: तमिलनाडु
    • स्थापना: 1984
    • विशेषता: भारत का प्रथम स्वदेशी परमाणु रिएक्टर क्षेत्र
  • नरोरा परमाणु बिजली घर
    • राज्य: उत्तर प्रदेश
    • स्थापना: 1991
  • काकरापार परमाणु बिजली घर
    • राज्य: गुजरात
    • स्थापना: 1993
  • कुड़नकुलम परमाणु बिजली घर
    • राज्य: तमिलनाडु
    • स्थापना: 2013
    • विशेषता: भारत की सबसे बड़ी परमाणु बिजली परियोजना
  • कैगा परमाणु बिजली घर
    • राज्य: कर्नाटक
    • स्थापना: 2000
  • गोरखपुर हरियाणा परमाणु बिजली परियोजना
    • राज्य: हरियाणा
    • स्थिति: निर्माणाधीन
  • चुटका परमाणु बिजली परियोजना
    • राज्य: मध्य प्रदेश
    • स्थिति: प्रस्तावित
  • माही बांसवाड़ा परमाणु परियोजना
    • राज्य: राजस्थान
    • स्थिति: प्रस्तावित

भविष्य की संभावनाएँ

आधुनिक अनुसंधान में:
  • उन्नत रिएक्टर डिजाइन
  • तेज न्यूट्रॉन रिएक्टर
  • थोरियम आधारित रिएक्टर पर कार्य किया जा रहा है।
इनसे सुरक्षा, दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार की उम्मीद है।

Post a Comment