किन तरंगों की सहायता से चमगादड़ (Bats) रात में सुरक्षित उड़ते हैं?

किन तरंगों की सहायता से चमगादड़ (Bats) रात में सुरक्षित उड़ते हैं?
पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगों की सहायता से चमगादड़ (Bats) रात में सुरक्षित उड़ते हैं। प्रकृति में अनेक ऐसे जीव हैं जिनकी क्षमताएँ मानव को आश्चर्यचकित कर देती हैं। इन्हीं में से एक है चमगादड़ (Bat)। एक ऐसा स्तनधारी जो पूर्ण अंधकार में भी बिना टकराए तेज़ी से उड़ सकता है, शिकार पकड़ सकता है और अपने आवास तक सुरक्षित लौट आता है। रात के समय जब दृश्य प्रकाश अत्यंत कम होता है तब आँखों पर निर्भर होकर उड़ना लगभग असंभव प्रतीत होता है। फिर भी चमगादड़ यह सब सहजता से कर लेते हैं। इसका रहस्य पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगों पर आधारित उनकी अद्भुत जैविक प्रणाली इकोलोकेशन (Echolocation) में निहित है। ध्वनि तरंगें और मानव श्रवण सीमा ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें होती हैं जो किसी माध्यम (जैसे वायु, जल, ठोस) में कंपन के रूप में संचरित होती हैं। इनका एक प्रमुख गुण आवृत्ति (Frequency) है जिसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है। श्रव्य (Audible) तरंगें: 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक—इन्हें मानव कान सुन सकता है। अवश्रव्य (Infrasonic) तरंगें: 20 Hz से कम—मानव कान नहीं सुन पाता। पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगें: 20,000 Hz से अध…

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