सल्तनतकाल में अश्वशाला के प्रधान को क्या कहा जाता था?
सल्तनतकाल में अश्वशाला के प्रधान को क्या कहा जाता था?
सल्तनतकाल में अश्वशाला के प्रधान को अमीर-ए-आखूर कहा जाता था। मध्यकालीन भारत के इतिहास में सल्तनतकाल (1206–1526 ई.) एक ऐसा युग था जिसमें शासन, प्रशासन, सेना और राजदरबार की संरचना अत्यंत संगठित और अनुशासित रूप में विकसित हुई। इस काल में सुल्तान की शक्ति का सबसे बड़ा आधार उसकी सैन्य क्षमता थी और उस सैन्य शक्ति का मूल स्तंभ घुड़सवार सेना मानी जाती थी। युद्ध, गश्त, संदेश-प्रेषण, राजकीय यात्राएँ इन सभी में घोड़ों की भूमिका निर्णायक थी। इसलिए घोड़ों के पालन-पोषण, प्रशिक्षण और रखरखाव के लिए एक विशेष विभाग होता था जिसे अश्वशाला कहा जाता था। इस अश्वशाला का सर्वोच्च अधिकारी अमीर-ए-आखूर कहलाता था। अमीर-ए-आखूर केवल घोड़ों का देखरेख करने वाला साधारण अधिकारी नहीं था बल्कि वह सल्तनत के सैन्य और दरबारी तंत्र का एक महत्त्वपूर्ण अंग था। उसके हाथों में हजारों की संख्या में घोड़े, ऊँट, खच्चर और अन्य सवारी पशुओं की जिम्मेदारी होती थी। सल्तनतकालीन प्रशासनिक पृष्ठभूमि दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की। इसके बाद गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने शासन किया। सल्तनतकालीन प्रशासन …