खालसा पंथ की स्थापना तथा एक धर्माचार 'पाहुल' को किस सिख गुरु ने चलाया था?

खालसा पंथ की स्थापना तथा एक धर्माचार 'पाहुल' को किस सिख गुरु ने चलाया था?
खालसा पंथ की स्थापना तथा एक धर्माचार 'पाहुल' को गुरु गोविन्द सिंह ने चलाया था। भारतीय इतिहास और धार्मिक परंपराओं में सिख धर्म का विशेष स्थान है। यह धर्म समानता, साहस, सेवा और सत्य के सिद्धांतों पर आधारित है। सिख परंपरा के विकास में दसों गुरुओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है किंतु खालसा पंथ की स्थापना ने सिख धर्म को एक संगठित, अनुशासित और क्रांतिकारी रूप प्रदान किया। यह महान ऐतिहासिक कार्य गुरु गोविन्द सिंह द्वारा सन् 1699 ईस्वी में किया गया। खालसा पंथ की स्थापना के साथ-साथ गुरु गोविन्द सिंह ने एक विशेष धार्मिक संस्कार की शुरुआत की जिसे ‘पाहुल’ (जिसे आगे चलकर अमृत संस्कार या अमृत संचार कहा गया) कहा गया। सिख धर्म की पृष्ठभूमि सिख धर्म की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक देव जी ने की थी। गुरु नानक देव जी ने एक ईश्वर की उपासना, मानव समानता, कर्म और सेवा पर बल दिया। उनके उपदेशों को आगे बढ़ाते हुए नौ अन्य गुरुओं ने सिख धर्म को संगठित और सुदृढ़ बनाया। मुगल काल में धार्मिक अत्याचार, सामाजिक भेदभाव और अन्याय की स्थितियाँ प्रचलित थीं। विशेष रूप से औरंगज़ेब के शासनकाल में धार्मिक असह…

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