मगध का प्रथम राजवंश कौन था?

मगध का प्रथम राजवंश कौन था?
मगध का प्रथम राजवंश हर्यक वंश था। प्राचीन भारत के इतिहास में मगध का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गंगा घाटी की उर्वर भूमि, अनुकूल भौगोलिक स्थिति, राजनीतिक दूरदर्शिता और संगठित प्रशासन के कारण मगध धीरे-धीरे उत्तर भारत की सबसे शक्तिशाली महाशक्ति के रूप में उभरा। मगध ने न केवल राजनीतिक एकीकरण की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि बौद्ध और जैन धर्म जैसे महान धार्मिक आंदोलनों को भी संरक्षण प्रदान किया। मगध के उत्कर्ष की नींव जिस राजवंश ने रखी वह था हर्यक वंश। इतिहासकारों के अनुसार मगध का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश हर्यक वंश ही माना जाता है। इस वंश के शासकों विशेष रूप से बिम्बिसार और अजातशत्रु ने मगध को एक क्षेत्रीय राज्य से साम्राज्यवादी शक्ति में परिवर्तित कर दिया। मगध : भौगोलिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मगध प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों में से एक था। इसका क्षेत्र आधुनिक बिहार और झारखंड के कुछ भागों में फैला हुआ था। इसकी सीमाएँ: उत्तर में गंगा नदी दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला पूर्व में चम्पा नदी पश्चिम में सोन नदी इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति अत्यंत अनुकूल थी। यहाँ की उपजाऊ भूमि, लौह अयस्क की उपल…

Post a Comment