विशिष्टा द्वैत के प्रवर्तक कौन थे?

विशिष्टा द्वैत के प्रवर्तक कौन थे?
विशिष्टा द्वैत के प्रवर्तक रामानुजाचार्य थे। भारतीय दर्शन की परंपरा अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और बहुआयामी रही है। उपनिषदों, ब्रह्मसूत्रों और भगवद्गीता जैसे ग्रंथों पर आधारित वेदांत दर्शन के अंतर्गत अनेक दार्शनिक मत विकसित हुए। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दर्शन है विशिष्टाद्वैत वेदांत जिसके प्रवर्तक महान आचार्य रामानुजाचार्य थे। रामानुजाचार्य ने उस समय प्रचलित शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत की एकांगी व्याख्या से असहमति प्रकट करते हुए ईश्वर, जीव और जगत के बीच एक ऐसे संबंध की व्याख्या की जिसमें एकत्व (अद्वैत) बना रहे किंतु विशेषताओं (विशिष्टता) का भी पूर्ण स्वीकार हो। इसी कारण उनके दर्शन को विशिष्ट + अद्वैत = विशिष्टाद्वैत कहा गया। भारतीय वेदांत परंपरा का परिचय वेदांत दर्शन का शाब्दिक अर्थ है – वेदों का अंत। उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और भगवद्गीता वेदांत के मुख्य आधार ग्रंथ हैं। समय के साथ इन ग्रंथों की विभिन्न व्याख्याएँ सामने आईं जिनसे अलग-अलग वेदांत मत विकसित हुए जैसे: अद्वैत वेदांत – शंकराचार्य विशिष्टाद्वैत वेदांत – रामानुजाचार्य द्वैत वेदांत – माध्वाचार्य इन तीनों में विशिष्टाद्वै…

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