प्लावन की मूल अवधारणा
जब कोई वस्तु किसी द्रव (जैसे पानी) में डाली जाती है तो वह द्रव उस वस्तु पर ऊपर की दिशा में एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावक बल कहा जाता है। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए (विस्थापित) द्रव के भार के बराबर होता है। यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार के बराबर या उससे अधिक हो जाए तो वस्तु तैरती है। यदि यह बल वस्तु के भार से कम हो तो वस्तु डूब जाती है।
आर्किमिडीज़ का सिद्धांत
प्लावन को समझने का आधार प्रसिद्ध वैज्ञानिक सिद्धांत है जिसे Archimedes ने प्रतिपादित किया था। आर्किमिडीज़ का सिद्धांत कहता है:
- “कोई वस्तु जब किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबी होती है तो उस पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावक बल उस द्रव के भार के बराबर होता है जितना द्रव वस्तु द्वारा विस्थापित किया गया हो।”
यही सिद्धांत सुई और जहाज दोनों के व्यवहार को स्पष्ट करता है।
सुई पानी में क्यों डूब जाती है?
अब प्रश्न आता है कि सुई जैसी छोटी और हल्की वस्तु पानी में क्यों डूब जाती है।
विस्थापन बहुत कम
- सुई का आकार बहुत छोटा होता है। जब उसे पानी में डाला जाता है तो वह बहुत कम मात्रा में पानी हटाती (विस्थापित करती) है।
- हटाए गए पानी का भार → बहुत कम
- सुई का अपना भार → उस हटाए गए पानी के भार से अधिक
उत्प्लावक बल अपर्याप्त
- क्योंकि विस्थापित पानी का भार कम है इसलिए उत्प्लावक बल भी कम होगा। यह बल सुई के भार को संतुलित नहीं कर पाता। फलस्वरूप सुई डूब जाती है।
घनत्व का प्रभाव
- सुई प्रायः लोहे या स्टील की बनी होती है जिनका घनत्व पानी से अधिक होता है। अधिक घनत्व वाली वस्तुएँ सामान्यतः पानी में डूब जाती हैं यदि अन्य कारक (जैसे सतही तनाव) हावी न हों।
भारी समुद्री जहाज तैरते कैसे हैं?
अब उस स्थिति को समझें जहाँ एक विशाल, भारी जहाज पानी पर तैरता है।
विशाल विस्थापन
- जहाज का आकार बहुत बड़ा होता है और उसका निचला भाग (हुल) पानी में काफी गहराई तक जाता है। इससे जहाज बहुत बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित करता है।
- हटाए गए पानी का भार → बहुत अधिक
- यह भार → पूरे जहाज के भार के बराबर
संतुलन की अवस्था
- जब जहाज द्वारा हटाए गए पानी का भार जहाज के कुल भार के बराबर हो जाता है तब उत्प्लावक बल और गुरुत्व बल में संतुलन बन जाता है। इसी संतुलन के कारण जहाज तैरता रहता है।
औसत घनत्व की भूमिका
- हालाँकि जहाज स्टील का बना होता है फिर भी उसका औसत घनत्व पानी से कम होता है क्योंकि उसके भीतर बहुत-सी खाली जगह (हवा) होती है।
- स्टील + हवा = कम औसत घनत्व
इसी कारण जहाज डूबता नहीं।
सुई और जहाज की तुलना
सुई का आकार बहुत छोटा होता है। जब इसे पानी में डाला जाता है तो यह बहुत कम मात्रा में पानी को विस्थापित करती है। परिणामस्वरूप, सुई द्वारा हटाए गए पानी का भार बहुत कम होता है। चूँकि उत्प्लावक बल विस्थापित पानी के भार के बराबर होता है इसलिए सुई पर लगने वाला उत्प्लावक बल उसके अपने भार से कम पड़ जाता है। इसी कारण सुई पानी में डूब जाती है। इसके अतिरिक्त, सुई का औसत घनत्व पानी से अधिक होता है जो उसके डूबने की प्रवृत्ति को और बढ़ा देता है।
इसके विपरीत, समुद्री जहाज का आकार अत्यंत बड़ा होता है। जहाज का निचला भाग पानी में काफी गहराई तक जाता है और वह बहुत अधिक मात्रा में पानी को विस्थापित करता है। इस कारण जहाज द्वारा हटाए गए पानी का कुल भार जहाज के अपने भार के बराबर हो जाता है। ऐसी स्थिति में उत्प्लावक बल और गुरुत्व बल में संतुलन बन जाता है जिससे जहाज पानी की सतह पर तैरता रहता है। यद्यपि जहाज लोहे या स्टील का बना होता है फिर भी उसके भीतर विशाल खोखले भाग और हवा भरी होती है जिससे उसका औसत घनत्व पानी से कम हो जाता है।
अतः यह स्पष्ट है कि किसी वस्तु का तैरना या डूबना केवल उसके भार पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि वह वस्तु पानी में कितनी मात्रा में पानी विस्थापित करती है और उस विस्थापित पानी का भार कितना है। यही कारण है कि हल्की सुई डूब जाती है जबकि भारी समुद्री जहाज तैरता रहता है।
क्या केवल भार ही कारण है?
यह समझना आवश्यक है कि केवल भार तैरने-डूबने का निर्णय नहीं करता।
- यदि केवल भार ही कारण होता तो भारी जहाज कभी नहीं तैर पाते।
- वास्तविक निर्णायक कारक है विस्थापन और उत्प्लावक बल।
इसलिए हल्की वस्तु (सुई) डूब सकती है और भारी वस्तु (जहाज) तैर सकती है।
रोज़मर्रा के उदाहरण
इस सिद्धांत को और स्पष्ट करने के लिए कुछ सामान्य उदाहरण देखें:
- लोहे की ठोस गेंद पानी में डाली जाए → डूब जाती है
- लोहे की कटोरी पानी में रखी जाए → तैर सकती है
- खाली प्लास्टिक बोतल → तैरती है
- पानी से भरी वही बोतल → डूब सकती है
इन सभी उदाहरणों में निर्णायक भूमिका हटाए गए पानी के भार की होती है।
जहाज की डिजाइन और प्लावन
समुद्री जहाजों की बनावट विशेष रूप से इस सिद्धांत को ध्यान में रखकर की जाती है।
- चौड़ा और खोखला निचला भाग
- अंदर बड़े-बड़े कक्ष (compartments)
- संतुलन बनाए रखने के लिए ballast प्रणाली
इन सभी का उद्देश्य यही है कि जहाज पर्याप्त मात्रा में पानी विस्थापित कर सके और उत्प्लावक बल जहाज के भार के बराबर बना रहे।
सुई को तैराया जा सकता है?
रोचक तथ्य यह है कि सुई को कुछ परिस्थितियों में तैराया भी जा सकता है।
- यदि सुई को बहुत सावधानी से पानी की सतह पर रखा जाए
- या साबुन की झिल्ली/सतही तनाव का सहारा लिया जाए
यह स्थिति सतही तनाव (Surface Tension के कारण होती है न कि सामान्य प्लावन के कारण। जैसे ही सतही तनाव टूटता है सुई तुरंत डूब जाती है।
