प्रकाश का स्वभाव और वर्णक्रम
सूर्य का प्रकाश श्वेत (White Light) होता है जिसमें सात प्रमुख रंग शामिल होते हैं बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इन सभी रंगों की तरंगदैर्घ्य (Wavelength) अलग-अलग होती है।
- नीले और बैंगनी रंग की तरंगदैर्घ्य कम होती है।
- लाल रंग की तरंगदैर्घ्य अधिक होती है।
जब यह श्वेत प्रकाश किसी माध्यम से होकर गुजरता है तो माध्यम के कणों के साथ उसकी अंतःक्रिया होती है। यही अंतःक्रिया प्रकीर्णन, अवशोषण और परावर्तन जैसी घटनाओं को जन्म देती है।
प्रकीर्णन (Scattering) क्या है?
प्रकीर्णन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की किरणें किसी माध्यम के सूक्ष्म कणों से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं। प्रकीर्णन की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि:
- प्रकाश की तरंगदैर्घ्य क्या है
- माध्यम के कणों का आकार कितना है
कम तरंगदैर्घ्य वाले रंग विशेषकर नीला अधिक प्रकीर्णित होते हैं। यही कारण है कि आकाश नीला दिखाई देता है और यही सिद्धांत समुद्र के जल पर भी लागू होता है।
समुद्र का जल नीला क्यों दिखाई देता है?
समुद्र के जल में असंख्य जल-कण (Water Molecules) उपस्थित होते हैं। जब सूर्य का प्रकाश समुद्र की सतह पर पड़ता है तो निम्नलिखित प्रक्रियाएँ घटित होती हैं:
प्रकाश का प्रवेश
- सूर्य का श्वेत प्रकाश समुद्र की सतह से होकर जल में प्रवेश करता है।
लाल रंग का अवशोषण
- जल के कण लाल, नारंगी और पीले जैसे लंबे तरंगदैर्घ्य वाले रंगों को अपेक्षाकृत अधिक अवशोषित कर लेते हैं।
नीले रंग का प्रकीर्णन
- नीले रंग की तरंगदैर्घ्य कम होने के कारण वह जल के कणों से अधिक प्रकीर्णित होता है।
दृष्टि तक नीले प्रकाश का पहुँचना
- प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँखों तक अधिक मात्रा में पहुँचता है जिससे समुद्र का जल नीला दिखाई देता है।
इस प्रकार, समुद्र का नीला रंग किसी रासायनिक रंग के कारण नहीं बल्कि प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है।
क्या समुद्र का नीला रंग आकाश का प्रतिबिंब है?
यह एक सामान्य भ्रांति है कि समुद्र आकाश का प्रतिबिंब होने के कारण नीला दिखाई देता है। यद्यपि शांत जल में आकाश का प्रतिबिंब कुछ हद तक दिखाई दे सकता है लेकिन यह मुख्य कारण नहीं है। यदि ऐसा होता तो
- बादलों से भरे आकाश में समुद्र धूसर या सफेद दिखता
- सूर्यास्त के समय समुद्र लाल दिखाई देता
वास्तविकता यह है कि समुद्र का नीला रंग आकाश के बिना भी देखा जा सकता है जैसे गहरे जल में जहाँ आकाश का प्रतिबिंब नगण्य होता है।
गहराई के साथ रंग में परिवर्तन
समुद्र के जल का रंग उसकी गहराई के साथ बदलता रहता है।
- उथले जल में समुद्र हल्का नीला या हरा दिखाई देता है
- गहरे जल में रंग गहरा नीला हो जाता है
इसका कारण यह है कि गहरे जल में प्रकाश को अधिक दूरी तय करनी पड़ती है जिससे लाल रंग का अवशोषण और नीले रंग का प्रकीर्णन और अधिक हो जाता है।
समुद्र का हरा रंग क्यों दिखाई देता है?
कई स्थानों पर समुद्र या समुद्री जल हरा भी दिखाई देता है। इसके पीछे कारण हैं:
- जल में उपस्थित फाइटोप्लैंकटन
- सूक्ष्म शैवाल
- अन्य जैविक कण
ये कण हरे रंग के प्रकाश को अधिक परावर्तित करते हैं जिससे जल हरा दिखाई देता है। इसलिए समुद्र का रंग केवल भौतिक नहीं बल्कि जैविक कारणों से भी प्रभावित होता है।
प्रकीर्णन के प्रकार और समुद्र
प्रकीर्णन मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
रेले प्रकीर्णन (Rayleigh Scattering)
- बहुत छोटे कणों द्वारा
- नीले रंग का अधिक प्रकीर्णन
- समुद्र और आकाश के नीले रंग का प्रमुख कारण
मी प्रकीर्णन (Mie Scattering)
- बड़े कणों द्वारा
- धूल, धुआँ, जल की बूंदें
- समुद्र के रंग में स्थानीय परिवर्तन
समुद्र के जल में मुख्यतः रेले प्रकीर्णन प्रभावी होता है।
समुद्र का रंग और मौसम
मौसम की परिस्थितियाँ भी समुद्र के रंग को प्रभावित करती हैं।
- साफ मौसम में समुद्र अधिक नीला दिखाई देता है
- तूफानी या धुंधले मौसम में रंग फीका या धूसर हो सकता है
यह परिवर्तन प्रकाश के प्रवेश और प्रकीर्णन की मात्रा में बदलाव के कारण होता है।
वैज्ञानिक और भौतिक महत्व
समुद्र के रंग का अध्ययन केवल सौंदर्य के लिए नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
- समुद्री जैविक गतिविधियों का अनुमान
- जल प्रदूषण की पहचान
- जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में सहायता
उपग्रहों द्वारा समुद्र के रंग का विश्लेषण करके समुद्री पारिस्थितिकी पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जाती है।
दैनिक जीवन में प्रकीर्णन के उदाहरण
- आकाश का नीला दिखाई देना
- सूर्यास्त के समय लालिमा
- धुएँ में प्रकाश की किरणों का दिखना
- समुद्र का नीला या हरा रंग
ये सभी घटनाएँ प्रकाश के प्रकीर्णन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
