ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर क्यों उबलता है?

Sanjay Yadav
ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर इसलिए उबलता है क्योंकि वहाँ वायुमण्डलीय दाब कम होता है। हम सभी जानते हैं कि समुद्र तल (Sea Level) पर शुद्ध पानी 100°C तापमान पर उबलता है। यह तथ्य विद्यालय स्तर से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक बार-बार पूछा जाता है। परंतु जैसे ही हम किसी ऊँचे स्थान जैसे पहाड़ी क्षेत्र, पठार, या पर्वतीय इलाकों पर जाते हैं तो यह नियम बदल जाता है। वहाँ पानी 100°C से कम तापमान पर ही उबलने लगता है।

ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर इसलिए उबलता है क्योंकि वहाँ वायुमण्डलीय दाब कम होता है।

यह प्रश्न केवल एक तथ्य नहीं बल्कि इसके पीछे भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत छिपा है जो वायुमण्डलीय दाब, वाष्प दाब, उबलनांक और अणुओं की गति से संबंधित है।

उबलना क्या है? (What is Boiling?)

किसी द्रव का उबलना वह अवस्था है जब:
  • द्रव के भीतर से वाष्प के बुलबुले बनने लगते हैं और वे सतह तक आकर फूटने लगते हैं।
सरल शब्दों में:
  • जब द्रव का वाष्प दाब (Vapour Pressure) बाहरी वायुमण्डलीय दाब (Atmospheric Pressure) के बराबर हो जाता है तो द्रव उबलने लगता है। इसलिए उबलना केवल तापमान पर नहीं बल्कि दाब पर भी निर्भर करता है।

वाष्प दाब (Vapour Pressure) क्या है?

किसी द्रव के अणु निरंतर गति में रहते हैं। जब वे सतह से बाहर निकलकर वाष्प बनने की कोशिश करते हैं तो जो दाब उत्पन्न होता है उसे वाष्प दाब कहते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु:
  • तापमान बढ़ाने पर अणुओं की गति बढ़ती है
  • गति बढ़ने से अधिक अणु वाष्प अवस्था में जाते हैं
  • इससे वाष्प दाब बढ़ता है

वायुमण्डलीय दाब (Atmospheric Pressure) क्या है?

हमारे चारों ओर हवा का एक विशाल आवरण है जिसे वायुमण्डल कहते हैं। इस वायुमण्डल में उपस्थित वायु का भार पृथ्वी की सतह पर दाब डालता है।

समुद्र तल पर:
  • वायु की परतें अधिक होती हैं
  • इसलिए वायुमण्डलीय दाब अधिक होता है
  • लगभग 1 वायुमण्डल (1 atm)

ऊँचाई बढ़ने पर वायुमण्डलीय दाब क्यों घटता है?

जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं:
  • वायु की परतें कम होती जाती हैं
  • ऊपर की ओर वायु विरल होती जाती है
  • इसलिए वायुमण्डलीय दाब घटता जाता है
उदाहरण:
  • समुद्र तल → अधिक दाब
  • पहाड़ी क्षेत्र → कम दाब
  • पर्वत शिखर → बहुत कम दाब

उबलनांक और दाब का संबंध

नियम:
  • किसी द्रव का उबलनांक उस पर लगने वाले बाहरी दाब पर निर्भर करता है।
  • दाब अधिक → उबलनांक अधिक
  • दाब कम → उबलनांक कम

समुद्र तल पर पानी 100°C पर क्यों उबलता है?

समुद्र तल पर:
  • वायुमण्डलीय दाब अधिक होता है
  • पानी के अणुओं को वाष्प बनने के लिए अधिक ऊर्जा (ताप) चाहिए
  • इसलिए पानी 100°C पर उबलता है

ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर क्यों उबलता है?

  • ऊँचे स्थानों पर वायुमण्डलीय दाब कम होता है।
परिणाम:
  • पानी के वाष्प दाब को बाहरी दाब के बराबर होने के लिए कम तापमान ही पर्याप्त होता है इसलिए पानी 100°C से कम ताप पर उबलने लगता है
उदाहरण से समझें

मान लीजिए:
समुद्र तल पर पानी को उबलने के लिए 100°C ताप चाहिए लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में वायुमण्डलीय दाब कम है तो:
  • पानी के अणुओं को बाहर निकलने से रोकने वाला बल कम होगा इसलिए वे कम ताप पर ही वाष्प बन जाएंगे

पर्वतीय क्षेत्रों में खाना देर से क्यों पकता है?

यह इस सिद्धांत का सबसे प्रसिद्ध दैनिक जीवन उदाहरण है।

कारण:
  • पानी 100°C से कम ताप पर उबल जाता है। इसलिए भोजन को पकाने के लिए पर्याप्त ताप नहीं मिल पाता। फलस्वरूप दाल, चावल, सब्ज़ियाँ देर से पकती हैं।
समाधान:
  • प्रेशर कुकर का उपयोग किया जाता है
  • कुकर के अंदर दाब बढ़ाया जाता है
  • दाब बढ़ने से उबलनांक बढ़ता है
  • खाना जल्दी पक जाता है

प्रेशर कुकर और उबलनांक

प्रेशर कुकर में:
  • अंदर का दाब बढ़ जाता है
  • पानी 100°C से अधिक ताप पर उबलता है
  • अधिक ताप मिलने से भोजन जल्दी और अच्छे से पकता है।

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