पुरुलिया, मयूरभंज, सरायकेला किस नृत्य के उपप्रकार हैं?
पुरुलिया, मयूरभंज, सरायकेला किस नृत्य के उपप्रकार हैं?
पुरुलिया, मयूरभंज, सरायकेला छऊ नृत्य के उपप्रकार हैं। भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यहाँ की लोककलाएँ, नृत्य, संगीत और परंपराएँ सदियों से समाज की पहचान और आत्मा का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। इन्हीं समृद्ध लोकनृत्यों में एक अत्यंत प्रभावशाली और वीर रस से परिपूर्ण नृत्य शैली है Chhau dance (छऊ नृत्य)। यह नृत्य मुख्यतः पूर्वी भारत के तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में प्रचलित है। छऊ नृत्य के तीन प्रमुख उपप्रकार हैं पुरुलिया छऊ, मयूरभंज छऊ और सरायकेला छऊ। इन तीनों शैलियों में समान मूल तत्व होने के बावजूद शैली, वेशभूषा, मुखौटे, प्रस्तुति और नृत्य तकनीक में उल्लेखनीय अंतर पाया जाता है। यही विविधता इसे और अधिक आकर्षक बनाती है। छऊ नृत्य का उद्भव और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि छऊ नृत्य की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों के बीच विभिन्न मत हैं किंतु सामान्यतः यह माना जाता है कि इसका विकास प्राचीन युद्धकला, लोक परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों से हुआ है। “छऊ” शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत के “छाया” या “छद्म” शब्द से मानी जाती है जिसका अर्थ है आवरण या मुखौटा। यह नृत्य विशेष रूप से चैत्र पर…