अग्नाशयी रस में पाया जाने वाला एन्जाइम 'ट्रिप्सिन', प्रोटीन या पेप्टोन को किसमें बदलता है?

Sanjay Yadav
अग्नाशयी रस में पाया जाने वाला एन्जाइम 'ट्रिप्सिन', प्रोटीन या पेप्टोन को छोटे पेप्टाइड्स में बदलता है। मानव शरीर एक अत्यंत जटिल एवं सुव्यवस्थित जैविक तंत्र है जिसमें भोजन का पाचन, अवशोषण तथा उपयोग निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएँ हैं। हमारे द्वारा ग्रहण किया गया भोजन तब तक शरीर के लिए उपयोगी नहीं बन सकता जब तक वह सरल और घुलनशील रूप में परिवर्तित न हो जाए। इस कार्य में पाचन एन्जाइमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

अग्नाशयी रस में पाया जाने वाला एन्जाइम 'ट्रिप्सिन', प्रोटीन या पेप्टोन को छोटे पेप्टाइड्स में बदलता है।

भोजन के प्रमुख घटकों कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन में से प्रोटीन सबसे जटिल जैव-अणु होते हैं। इनके पाचन के लिए विशेष एन्जाइमों की आवश्यकता होती है। इन्हीं एन्जाइमों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण एन्जाइम है ट्रिप्सिन (Trypsin) जो अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice) में पाया जाता है।

ट्रिप्सिन का मुख्य कार्य प्रोटीन या पेप्टोन को छोटे पेप्टाइड्स में परिवर्तित करना है। यह प्रक्रिया आगे चलकर अमीनो अम्लों के निर्माण की आधारशिला बनती है जो शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत और जैविक क्रियाओं के लिए अनिवार्य हैं।

अग्न्याशय (Pancreas) का परिचय

अग्न्याशय मानव शरीर की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो पाचन तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र दोनों का हिस्सा है। यह पेट के पीछे, छोटी आंत के प्रथम भाग (ड्यूओडेनम) के समीप स्थित होती है।

अग्न्याशय दो प्रकार के स्राव करता है:
  • अंतःस्रावी स्राव – जैसे इंसुलिन, ग्लूकागॉन
  • बहिःस्रावी स्राव – जिसे अग्नाशयी रस कहते हैं
अग्नाशयी रस में अनेक पाचन एन्जाइम पाए जाते हैं जो भोजन के विभिन्न घटकों को तोड़ने का कार्य करते हैं।

अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice)

अग्नाशयी रस एक क्षारीय प्रकृति का द्रव होता है जो प्रतिदिन लगभग 1 से 1.5 लीटर की मात्रा में स्रावित होता है। इसमें उपस्थित सोडियम बाइकार्बोनेट आमाशय से आई अम्लीय भोजन-रस (Chyme) को क्षारीय बनाता है जिससे एन्जाइमों को कार्य करने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है।

अग्नाशयी रस में पाए जाने वाले प्रमुख एन्जाइम
  • ट्रिप्सिन (Trypsin)
  • काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin)
  • कार्बोक्सीपेप्टिडेज
  • एमाइलेज
  • लाइपेज
  • न्यूक्लिएज
इनमें से ट्रिप्सिन प्रोटीन पाचन का मुख्य एन्जाइम है।

ट्रिप्सिन (Trypsin) : परिचय

ट्रिप्सिन एक प्रोटियोलिटिक एन्जाइम (Proteolytic Enzyme) है अर्थात् यह प्रोटीन को तोड़ने का कार्य करता है। यह एन्जाइम सीधे सक्रिय रूप में स्रावित नहीं होता बल्कि ट्रिप्सिनोजन (Trypsinogen) नामक निष्क्रिय रूप में अग्न्याशय से निकलता है।

इसका कारण यह है कि यदि ट्रिप्सिन सक्रिय अवस्था में ही स्रावित हो जाए तो वह स्वयं अग्न्याशय की कोशिकाओं को पचाना प्रारंभ कर सकता है जिससे गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

ट्रिप्सिनोजन से ट्रिप्सिन बनने की प्रक्रिया

जब ट्रिप्सिनोजन छोटी आंत (ड्यूओडेनम) में पहुँचता है तब वहाँ उपस्थित एंटरोकाइनेज (Enterokinase / Enteropeptidase) नामक एन्जाइम इसे सक्रिय ट्रिप्सिन में बदल देता है।
  • ट्रिप्सिनोजन → (एंटरोकाइनेज की उपस्थिति में) → ट्रिप्सिन
एक बार थोड़ी मात्रा में ट्रिप्सिन बन जाने पर वह अन्य ट्रिप्सिनोजन अणुओं को भी सक्रिय कर देता है। इस प्रकार यह एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) के रूप में कार्य करता है।

ट्रिप्सिन का रासायनिक स्वरूप

ट्रिप्सिन एक प्रोटीन प्रकृति का एन्जाइम है। यह विशिष्ट अमीनो अम्ल बंधों (Peptide Bonds) को तोड़ने की क्षमता रखता है। विशेष रूप से यह लाइसिन (Lysine) और आर्जिनिन (Arginine) अमीनो अम्लों के पास स्थित पेप्टाइड बंधों को तोड़ता है।

प्रोटीन एवं पेप्टोन का परिचय

प्रोटीन (Protein)
  • प्रोटीन उच्च आणविक भार वाले जटिल जैव-अणु होते हैं जो अमीनो अम्लों की लंबी श्रृंखलाओं से बने होते हैं। भोजन में पाए जाने वाले प्रोटीन सीधे शरीर द्वारा अवशोषित नहीं किए जा सकते।
पेप्टोन (Peptone)
  • जब प्रोटीन का आंशिक पाचन हो जाता है तब वह पेप्टोन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। पेप्टोन अभी भी पूर्णतः अवशोषण योग्य नहीं होते।

ट्रिप्सिन की क्रिया : प्रोटीन से पेप्टाइड तक

ट्रिप्सिन का मुख्य कार्य निम्नलिखित चरणों में होता है:
  • भोजन से प्राप्त प्रोटीन पहले आमाशय में पेप्सिन द्वारा आंशिक रूप से पचते हैं।
  • इससे प्रोटीन → पेप्टोन में बदल जाते हैं।
  • ये पेप्टोन छोटी आंत में पहुँचते हैं।
  • यहाँ ट्रिप्सिन सक्रिय होकर पेप्टोन को छोटे पेप्टाइड्स में परिवर्तित करता है।
  • प्रोटीन / पेप्टोन → (ट्रिप्सिन की क्रिया) → छोटे पेप्टाइड्स

छोटे पेप्टाइड्स का आगे का पाचन

ट्रिप्सिन द्वारा बने छोटे पेप्टाइड्स का पाचन यहीं समाप्त नहीं होता। आगे काइमोट्रिप्सिन, कार्बोक्सीपेप्टिडेज, आंत्र रस में उपस्थित पेप्टिडेज इन पेप्टाइड्स को और अधिक तोड़कर अमीनो अम्लों में परिवर्तित करते हैं।

ट्रिप्सिन के लिए उपयुक्त pH

ट्रिप्सिन क्षारीय माध्यम में सर्वाधिक सक्रिय रहता है।
  • इसका आदर्श pH लगभग 8 से 9 होता है।
इसी कारण अग्नाशयी रस में बाइकार्बोनेट आयन उपस्थित रहते हैं ताकि आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाया जा सके।

ट्रिप्सिन की जैविक महत्ता

ट्रिप्सिन का महत्व केवल पाचन तक सीमित नहीं है। इसकी जैविक भूमिका अत्यंत व्यापक है:
  • प्रोटीन पाचन का प्रमुख एन्जाइम
  • अमीनो अम्लों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है
  • शरीर की वृद्धि और विकास में सहायक
  • ऊतकों की मरम्मत में सहायक
  • एन्जाइमों, हार्मोनों और एंटीबॉडी के निर्माण में योगदान

ट्रिप्सिन की कमी के प्रभाव

यदि किसी कारणवश ट्रिप्सिन का स्राव कम हो जाए तो:
  • प्रोटीन का अपूर्ण पाचन
  • कुपोषण
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • बच्चों में वृद्धि रुक जाना
  • वजन कम होना जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ट्रिप्सिन से संबंधित रोग

अग्नाशयशोथ (Pancreatitis)
  • यदि ट्रिप्सिन अग्न्याशय के भीतर ही सक्रिय हो जाए तो यह अग्न्याशय की कोशिकाओं को पचाने लगता है जिससे अग्नाशयशोथ नामक गंभीर रोग उत्पन्न होता है।

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