कथक के प्रमुख विषय किससे जुड़े हुए हैं?

कथक के प्रमुख विषय किससे जुड़े हुए हैं?
कथक के प्रमुख विषय वैष्णववाद से जुड़े हुए हैं। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा केवल मनोरंजन का साधन नहीं रही है बल्कि यह भारतीय दर्शन, धर्म, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति भी रही है। इन्हीं शास्त्रीय नृत्यों में कथक का विशेष स्थान है। कथक नृत्य की आत्मा उसके विषयों, कथानकों और भावाभिव्यक्ति में निहित है। यदि कथक के ऐतिहासिक और वैचारिक विकास का सूक्ष्म अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि कथक के प्रमुख विषय वैष्णववाद से गहराई से जुड़े हुए हैं। विशेषकर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की लीलाएँ, राधा-कृष्ण प्रेम, भक्ति, माधुर्य और लीला-भाव कथक की मूल संवेदना रहे हैं। कथक शब्द की व्युत्पत्ति और मूल अवधारणा ‘कथक’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘कथा’ से मानी जाती है जिसका अर्थ है कहानी या आख्यान। प्राचीन काल में मंदिरों और तीर्थस्थलों में कथा कहने वाले कलाकारों को कथक या कथावाचक कहा जाता था। ये कलाकार धार्मिक ग्रंथों, पुराणों और भगवान की लीलाओं को नृत्य, गायन और अभिनय के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाते थे। यहीं से कथक की वह परंपरा विकसित हुई जिसमें कथा + नृत्य + भक्त…

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