एपिलेप्सी रोग का सम्बन्ध किससे है?

Sanjay Yadav
एपिलेप्सी रोग का सम्बन्ध नाड़ी संस्थान से है। एपिलेप्सी (मिर्गी) एक प्रमुख न्यूरोलॉजिकल रोग है जिसका सीधा सम्बन्ध नाड़ी संस्थान (तंत्रिका तंत्र) से है। यह रोग बार-बार होने वाले दौरे (Seizures) के रूप में प्रकट होता है। दौरे तब उत्पन्न होते हैं जब मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में अचानक और असामान्य विद्युत गतिविधि होने लगती है। चूँकि मस्तिष्क नाड़ी संस्थान का मुख्य भाग है इसलिए स्पष्ट है कि एपिलेप्सी का मूल कारण तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी है।

एपिलेप्सी रोग का सम्बन्ध नाड़ी संस्थान से है।

नाड़ी संस्थान (तंत्रिका तंत्र) की संरचना

मानव नाड़ी संस्थान दो प्रमुख भागों में विभाजित होता है:

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System - CNS)
  • मस्तिष्क
  • मेरुरज्जु (Spinal Cord)
परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS)
  • वे सभी नसें जो शरीर के विभिन्न अंगों को मस्तिष्क और मेरुरज्जु से जोड़ती हैं।
मस्तिष्क पूरे शरीर का नियंत्रण केंद्र है। यह सोचने, समझने, बोलने, चलने, महसूस करने और भावनाओं को नियंत्रित करने जैसे कार्य करता है। जब इसी नियंत्रण केंद्र में असामान्य विद्युत गतिविधि उत्पन्न होती है तब एपिलेप्सी के दौरे पड़ते हैं।

एपिलेप्सी क्या है?

एपिलेप्सी एक दीर्घकालिक (Chronic) न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें व्यक्ति को बार-बार बिना किसी स्पष्ट कारण के दौरे पड़ते हैं। एक बार दौरा पड़ना एपिलेप्सी नहीं कहलाता लेकिन यदि बिना उकसावे के दो या अधिक दौरे पड़ें तो इसे एपिलेप्सी माना जाता है।

दौरे के दौरान:
  • व्यक्ति बेहोश हो सकता है
  • शरीर में झटके लग सकते हैं
  • आँखें ऊपर की ओर घूम सकती हैं
  • मांसपेशियाँ कठोर हो सकती हैं
  • कुछ सेकंड के लिए व्यक्ति शून्य में देख सकता है
ये सभी लक्षण मस्तिष्क में असामान्य विद्युत तरंगों के कारण उत्पन्न होते हैं।

मस्तिष्क में विद्युत गतिविधि और दौरे

मस्तिष्क में अरबों न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाएँ) होती हैं। ये कोशिकाएँ विद्युत और रासायनिक संकेतों के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क करती हैं। सामान्य स्थिति में उत्तेजक (Excitatory) और अवरोधक (Inhibitory) संकेतों का संतुलन बना रहता है।

एपिलेप्सी में:
  • उत्तेजक संकेत अधिक हो जाते हैं
  • अवरोधक संकेत कम प्रभावी हो जाते हैं
  • संतुलन बिगड़ जाता है
  • अचानक विद्युत विस्फोट (Electrical storm) होता है
यही असंतुलन दौरे का कारण बनता है।

एपिलेप्सी के प्रकार

सामान्यीकृत दौरे (Generalized Seizures)
  • इनमें मस्तिष्क के दोनों भाग प्रभावित होते हैं।
  • टॉनिक-क्लॉनिक दौरा (शरीर में तेज झटके)
  • एब्सेंस दौरा (कुछ सेकंड के लिए शून्यता)
आंशिक या फोकल दौरे (Focal Seizures)
  • मस्तिष्क के किसी एक भाग से प्रारंभ होते हैं
  • शरीर के किसी एक हिस्से में झटके
  • चेतना बनी रह सकती है या प्रभावित हो सकती है
दौरे का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि मस्तिष्क के किस क्षेत्र में असामान्यता हो रही है।

एपिलेप्सी के कारण

एपिलेप्सी के कारण नाड़ी संस्थान से जुड़े होते हैं। प्रमुख कारण हैं:
  • जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी
  • सिर की चोट
  • मस्तिष्क संक्रमण (मेनिन्जाइटिस, एन्सेफलाइटिस)
  • मस्तिष्क ट्यूमर
  • स्ट्रोक
  • आनुवंशिक कारण
  • मस्तिष्क की संरचनात्मक असामान्यता
कई मामलों में कारण अज्ञात रहता है जिसे अज्ञातहेतुक एपिलेप्सी कहा जाता है।

लक्षण

  • अचानक बेहोशी
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • झटके लगना
  • अस्थायी भ्रम
  • याददाश्त में कमी
  • कुछ क्षणों के लिए प्रतिक्रिया बंद
लक्षण व्यक्ति और दौरे के प्रकार के अनुसार बदल सकते हैं।

निदान (Diagnosis)

एपिलेप्सी का निदान मुख्यतः नाड़ी संस्थान की जाँच पर आधारित होता है।

EEG (Electroencephalogram)
  • मस्तिष्क की विद्युत तरंगों को रिकॉर्ड करता है
  • असामान्य पैटर्न की पहचान करता है
MRI और CT Scan
  • मस्तिष्क की संरचना की जाँच
  • ट्यूमर, चोट या अन्य असामान्यता का पता लगाना
रक्त परीक्षण
  • संक्रमण या अन्य कारणों की जाँच

उपचार

एपिलेप्सी का उपचार तंत्रिका तंत्र की असामान्य गतिविधि को नियंत्रित करने पर आधारित है।

औषधीय उपचार
  • एंटी-एपिलेप्टिक दवाएँ:
    • विद्युत गतिविधि को संतुलित करती हैं
    • उत्तेजक संकेतों को कम करती हैं
    • दौरे की आवृत्ति घटाती हैं
शल्य चिकित्सा (Surgery)
  • जब दवाएँ प्रभावी न हों
  • मस्तिष्क के प्रभावित भाग को हटाया जाता है
वेगस नर्व स्टिमुलेशन
  • विशेष उपकरण द्वारा हल्के विद्युत संकेत
  • दौरे कम करने में सहायक
जीवनशैली प्रबंधन
  • पर्याप्त नींद
  • तनाव से बचाव
  • नियमित दवा सेवन

प्राथमिक उपचार (First Aid)

दौरे के समय:
  • रोगी को सुरक्षित स्थान पर लिटाएँ
  • सिर के नीचे नरम वस्तु रखें
  • मुँह में कुछ न डालें
  • दौरा समाप्त होने तक प्रतीक्षा करें
  • यदि दौरा 5 मिनट से अधिक चले तो डॉक्टर से संपर्क करें

सामाजिक और मानसिक प्रभाव

एपिलेप्सी केवल शारीरिक समस्या नहीं है। इसके कारण:
  • आत्मविश्वास में कमी
  • चिंता और अवसाद
  • सामाजिक भेदभाव
जागरूकता और सही जानकारी से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।

बच्चों और वृद्धों में एपिलेप्सी

बच्चों में
  • जन्मजात कारण
  • विकास संबंधी विकार
  • संक्रमण
वृद्धों में
  • स्ट्रोक
  • मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति में कमी
  • ट्यूमर

मिथक और सत्य

मिथक: दौरे के समय जूता सूंघाना चाहिए।
सत्य: यह गलत और हानिकारक है।

मिथक: यह दैवी या अलौकिक कारण से होता है।
सत्य: यह एक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध न्यूरोलॉजिकल रोग है।

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