ऑक्सेनोमीटर (Auxanometer) से क्या नापा जाता है?

Sanjay Yadav
ऑक्सेनोमीटर (Auxanometer) से पौधों की रेखीय वृद्धि दर (Linear growth rate of plants) को नापा जाता है। वनस्पति विज्ञान (Botany) में पौधों की वृद्धि (Plant Growth) का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। पौधों की वृद्धि केवल लंबाई या ऊँचाई बढ़ने तक सीमित नहीं होती बल्कि इसमें कोशिकाओं की संख्या, आकार, आयतन तथा द्रव्यमान में वृद्धि सम्मिलित होती है। किंतु जब हम लंबाई में होने वाली वृद्धि को मापते हैं तो इसे रेखीय वृद्धि (Linear Growth) कहा जाता है।

पौधों की इस रेखीय वृद्धि को मापने के लिए जिस वैज्ञानिक उपकरण का उपयोग किया जाता है उसे ऑक्सेनोमीटर (Auxanometer) कहते हैं। यह उपकरण पौधों के तने या अंकुर (Seedling) की लंबाई में समय के साथ होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने में सक्षम होता है।

ऑक्सेनोमीटर का प्रयोग विशेष रूप से पादप शरीरक्रिया विज्ञान (Plant Physiology) में किया जाता है जहाँ वृद्धि दर, हार्मोन का प्रभाव, प्रकाश, तापमान, जल और खनिज लवणों के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

ऑक्सेनोमीटर (Auxanometer) से पौधों की रेखीय वृद्धि दर (Linear growth rate of plants) को नापा जाता है।

पौधों की वृद्धि (Plant Growth) की अवधारणा

पौधों की वृद्धि एक अपरिवर्तनीय (Irreversible) प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाओं का विभाजन (Cell division), विस्तार (Cell elongation) और विभेदन (Differentiation) सम्मिलित होता है।

वृद्धि के प्रमुख चरण
  • कोशिका विभाजन (Cell Division) – मेरिस्टेमेटिक ऊतकों में होता है।
  • कोशिका विस्तार (Cell Elongation) – कोशिकाओं की लंबाई व आकार में वृद्धि।
  • कोशिका विभेदन (Differentiation) – कोशिकाएँ विशिष्ट कार्य ग्रहण करती हैं।
रेखीय वृद्धि मुख्यतः कोशिका विस्तार से संबंधित होती है जिसे ऑक्सेनोमीटर द्वारा मापा जाता है।

रेखीय वृद्धि (Linear Growth) क्या है?

जब पौधे के किसी भाग जैसे तना, जड़ या अंकुर की लंबाई में वृद्धि होती है तो उसे रेखीय वृद्धि कहते हैं। यह वृद्धि सामान्यतः एक ही दिशा में होती है और इसे मिलीमीटर या सेंटीमीटर में मापा जाता है।

रेखीय वृद्धि की विशेषताएँ
  • यह एक-आयामी (One-dimensional) होती है।
  • इसमें लंबाई में परिवर्तन को मापा जाता है।
  • यह पौधों के युवा भागों में अधिक तीव्र होती है।

ऑक्सेनोमीटर (Auxanometer) की परिभाषा

ऑक्सेनोमीटर वह वैज्ञानिक यंत्र है जिसकी सहायता से पौधों की रेखीय वृद्धि दर (Linear Growth Rate) को मापा जाता है।

ऑक्सेनोमीटर शब्द की उत्पत्ति

  • Auxano (ग्रीक) = वृद्धि
  • Mete = मापने वाला यंत्र
अर्थात्, वृद्धि मापने वाला यंत्र।

ऑक्सेनोमीटर का इतिहास

पौधों की वृद्धि के वैज्ञानिक अध्ययन का श्रेय 19वीं शताब्दी के वैज्ञानिक Julius von Sachs को दिया जाता है। उन्होंने पौधों की वृद्धि को मापने के लिए प्रारंभिक यांत्रिक विधियाँ विकसित कीं। बाद में इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर ऑक्सेनोमीटर का विकास हुआ।

ऑक्सेनोमीटर के प्रकार

ऑक्सेनोमीटर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:

सरल ऑक्सेनोमीटर (Simple Auxanometer)
  • यह एक सरल यांत्रिक यंत्र होता है जिसमें धागा, पुली (Pulley) और सूचक (Pointer) का उपयोग किया जाता है।
आर्क ऑक्सेनोमीटर (Arc Auxanometer)
  • इसमें अर्धवृत्ताकार स्केल लगा होता है जो अधिक सटीक मापन में सहायक होता है।

सरल ऑक्सेनोमीटर की संरचना

सरल ऑक्सेनोमीटर के मुख्य भाग निम्नलिखित होते हैं:
  • पौधे का अंकुर (Seedling)
  • रेशमी धागा (Silk thread)
  • पुली (Pulley)
  • सूचक (Pointer)
  • भार (Weight)
  • मापक पैमाना (Scale)

ऑक्सेनोमीटर का कार्य सिद्धांत (Working Principle)

ऑक्सेनोमीटर का कार्य सिद्धांत अत्यंत सरल है:
  • पौधे के तने के सिरे को रेशमी धागे से बाँधा जाता है।
  • धागा पुली के ऊपर से होकर नीचे लटकते भार से जुड़ा रहता है।
  • जैसे-जैसे पौधे की लंबाई बढ़ती है, धागा खिंचता है।
  • पुली घूमती है और सूचक स्केल पर आगे बढ़ता है।
  • सूचक की गति से पौधे की वृद्धि दर ज्ञात की जाती है।

रेखीय वृद्धि दर (Linear Growth Rate)

रेखीय वृद्धि दर से तात्पर्य है:
  • एक निश्चित समय में पौधे की लंबाई में हुई वृद्धि।
गणितीय सूत्र
  • रेखीय वृद्धि दर = लंबाई में वृद्धि/समय
इकाई:
  • मि.मी./घंटा
  • से.मी./दिन

प्रयोग विधि (Experimental Procedure)

  • स्वस्थ एवं युवा पौधे का चयन करें।
  • पौधे को स्थिर आधार पर लगाएँ।
  • तने के ऊपरी सिरे से धागा बाँधें।
  • धागे को पुली पर से गुजारें।
  • सूचक की प्रारंभिक स्थिति नोट करें।
  • निश्चित समय अंतराल पर सूचक की स्थिति दर्ज करें।

ऑक्सेनोमीटर द्वारा मापी जाने वाली बातें

  • तने की वृद्धि दर
  • हार्मोन (Auxin, Gibberellin) का प्रभाव
  • प्रकाश व अंधकार का प्रभाव
  • तापमान का प्रभाव
  • जल की उपलब्धता

पौधों की वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक

आंतरिक कारक
  • ऑक्सिन (Auxin)
  • जिबरेलिन (Gibberellin)
  • साइटोकिनिन (Cytokinin)
बाह्य कारक
  • प्रकाश
  • तापमान
  • जल
  • खनिज लवण
इन सभी कारकों के प्रभाव को ऑक्सेनोमीटर द्वारा तुलनात्मक रूप से अध्ययन किया जा सकता है।

ऑक्सेनोमीटर का महत्व

  • पौधों की वृद्धि का सटीक अध्ययन
  • पादप हार्मोन के प्रभाव का परीक्षण
  • कृषि अनुसंधान में उपयोग
  • प्रयोगशाला शिक्षण में सहायक

सीमाएँ (Limitations)

  • बहुत सूक्ष्म वृद्धि को मापने में कठिनाई
  • यांत्रिक त्रुटियों की संभावना
  • केवल रेखीय वृद्धि का मापन

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