विटामिन E शरीर की कोशिकाओं को मुक्त कणों (Free Radicals) से होने वाले नुकसान से बचाता है, त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है तथा प्रजनन स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विटामिन E का परिचय
विटामिन E वास्तव में एक एकल यौगिक नहीं बल्कि यौगिकों का एक समूह है। इसमें मुख्यतः दो प्रकार के यौगिक शामिल होते हैं:
- टोकोफेरोल (Tocopherols)
- टोकोट्राइनॉल (Tocotrienols)
इन दोनों के भी चार-चार प्रकार होते हैं:
- अल्फा (α)
- बीटा (β)
- गामा (γ)
- डेल्टा (δ)
इनमें से अल्फा-टोकोफेरोल (Alpha-tocopherol) जैविक रूप से सबसे अधिक सक्रिय रूप है और मानव शरीर में सबसे अधिक उपयोगी माना जाता है।
रासायनिक संरचना (Chemical Structure)
टोकोफेरोल की संरचना में निम्न मुख्य भाग होते हैं:
- एक क्रोमेन रिंग (Chromane ring)
- एक लंबी फाइटिल साइड चेन (Phytyl side chain)
इसकी संरचना इसे वसा में घुलनशील बनाती है। यही कारण है कि यह कोशिका झिल्ली (Cell membrane) के लिपिड भाग में जाकर कार्य करता है।
टोकोफेरोल का सामान्य आणविक सूत्र (α-Tocopherol के लिए) है:
- C₂₉H₅₀O₂
खोज और नामकरण
विटामिन E की खोज 1922 में हर्बर्ट एम. इवांस (Herbert M. Evans) और कैथरीन बिशप द्वारा की गई थी। उन्होंने पाया कि चूहों में प्रजनन क्षमता के लिए एक विशेष वसा-घुलनशील कारक आवश्यक है।
“टोकोफेरोल” शब्द ग्रीक भाषा के शब्दों से बना है:
- Tokos = जन्म
- Pheros = धारण करना
- Ol = अल्कोहल समूह
अर्थात् “जन्म को धारण करने वाला”। यह नाम इसकी प्रजनन में भूमिका को दर्शाता है।
विटामिन E के स्रोत
विटामिन E मुख्यतः पौधों से प्राप्त होता है। इसके प्रमुख आहार स्रोत हैं:
वनस्पति तेल
- सूरजमुखी तेल
- सोयाबीन तेल
- गेहूँ के अंकुर का तेल
- मक्का तेल
मेवे और बीज
- बादाम
- मूंगफली
- अखरोट
- कद्दू के बीज
हरी पत्तेदार सब्जियाँ
- पालक
- ब्रोकोली
अनाज
- साबुत गेहूँ
- ओट्स
गेहूँ के अंकुर का तेल विटामिन E का अत्यंत समृद्ध स्रोत माना जाता है।
शरीर में अवशोषण और भंडारण
चूँकि विटामिन E वसा में घुलनशील है इसलिए:
- इसका अवशोषण छोटी आंत (Small intestine) में वसा के साथ होता है।
- पित्त (Bile) की उपस्थिति आवश्यक होती है।
- यह यकृत (Liver) में संग्रहीत होता है।
इसके अतिरिक्त यह वसा ऊतकों (Adipose tissues) में भी संग्रहित रहता है।
विटामिन E के कार्य (Functions)
एंटीऑक्सीडेंट कार्य
विटामिन E का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाना। मुक्त कण (Free radicals) शरीर में निम्न कारणों से बनते हैं:
- प्रदूषण
- धूम्रपान
- विकिरण
- चयापचय प्रक्रियाएँ
विटामिन E इन मुक्त कणों को निष्क्रिय करता है।
कोशिका झिल्ली की सुरक्षा
यह कोशिका झिल्ली के लिपिड भाग को ऑक्सीकरण से बचाता है। यदि झिल्ली क्षतिग्रस्त हो जाए तो कोशिका का सामान्य कार्य बाधित हो सकता है।
प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करना
विटामिन E श्वेत रक्त कणिकाओं (WBCs) की कार्यक्षमता बढ़ाता है जिससे शरीर रोगों से बेहतर लड़ पाता है।
त्वचा और बालों के लिए लाभकारी
- त्वचा को कोमल बनाए रखता है
- झुर्रियों को कम करने में सहायक
- बालों को मजबूत करता है
इसी कारण अनेक कॉस्मेटिक उत्पादों में विटामिन E का उपयोग किया जाता है।
प्रजनन स्वास्थ्य
- विटामिन E को कभी-कभी “Anti-sterility vitamin” भी कहा जाता है।
- यह पुरुष और महिला दोनों में प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सहायक है।
हृदय स्वास्थ्य
विटामिन E LDL कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को कम करता है जिससे हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है।
विटामिन E की दैनिक आवश्यकता
वयस्कों के लिए सामान्यतः 15 मिलीग्राम प्रतिदिन (लगभग) की आवश्यकता मानी जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में आवश्यकता थोड़ी अधिक हो सकती है।
विटामिन E की कमी (Deficiency)
विटामिन E की कमी दुर्लभ है परंतु निम्न परिस्थितियों में हो सकती है:
- वसा अवशोषण विकार
- क्रोहन रोग
- सिस्टिक फाइब्रोसिस
कमी के लक्षण
- मांसपेशियों में कमजोरी
- तंत्रिका क्षति
- दृष्टि समस्याएँ
- प्रतिरक्षा में कमी
शिशुओं में कमी होने पर हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है।
अधिकता (Hypervitaminosis)
अत्यधिक मात्रा में विटामिन E लेने से:
- रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है
- रक्त पतला हो सकता है
- सिरदर्द
- मतली
अतः पूरक (Supplement) लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।
विटामिन E और अन्य विटामिनों का संबंध
विटामिन E, विटामिन C के साथ मिलकर कार्य करता है।
- विटामिन C, ऑक्सीकृत विटामिन E को पुनः सक्रिय कर सकता है।
- विटामिन A की सुरक्षा में भी सहायक।
औद्योगिक और औषधीय उपयोग
- कॉस्मेटिक उद्योग
- सप्लीमेंट निर्माण
- त्वचा रोग उपचार
- एंटीऑक्सीडेंट संरक्षक के रूप में खाद्य उद्योग में उपयोग
विटामिन E का वैज्ञानिक महत्व
आधुनिक शोध में विटामिन E को निम्न क्षेत्रों में अध्ययन किया जा रहा है:
- कैंसर की रोकथाम
- अल्जाइमर रोग
- हृदय रोग
- त्वचा वृद्धावस्था
हालाँकि सभी दावों की पुष्टि अभी भी शोधाधीन है।
जैव-रासायनिक क्रिया तंत्र
विटामिन E लिपिड पेरॉक्सीडेशन श्रृंखला को रोकता है। जब कोई मुक्त कण कोशिका झिल्ली के लिपिड से प्रतिक्रिया करता है तब:
- लिपिड पेरॉक्साइड बनते हैं
- झिल्ली क्षतिग्रस्त होती है
विटामिन E इस श्रृंखला को तोड़ देता है।
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