दूध को दही में परिवर्तित करने का कार्य जिन जीवाणुओं द्वारा किया जाता है उन्हें सामूहिक रूप से लैक्टिक अम्ल जीवाणु (Lactic Acid Bacteria) कहा जाता है। सामान्य परीक्षा-दृष्टि से और पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों में दूध से दही बनाने वाले जीवाणु को बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड (Bacterium Lactic Acid) कहा जाता है। यही जीवाणु दूध में उपस्थित लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित करता है जिसके परिणामस्वरूप दूध जमकर दही बन जाता है।
दही का परिचय
दही एक किण्वित (Fermented) दुग्ध उत्पाद है जिसे दूध में विशेष जीवाणुओं की सहायता से बनाया जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ है बल्कि पोषण और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है।
दही में:
- प्रोटीन
- कैल्शियम
- विटामिन B₁₂
- प्रोबायोटिक जीवाणु प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
भारत में दही का प्रयोग भोजन, आयुर्वेदिक चिकित्सा, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक परंपराओं में भी होता है।
दूध का रासायनिक संघटन
दूध एक जटिल एवं पूर्ण जैविक द्रव है जिसे प्रकृति ने शिशुओं के संपूर्ण पोषण के लिए तैयार किया है। इसमें जल, कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा खनिज लवण जैसे अनेक आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि दूध को एक पूर्ण आहार (Complete Food) भी कहा जाता है। इसके रासायनिक संघटन को समझने से यह स्पष्ट होता है कि दूध से बने उत्पाद जैसे दही, छाछ, पनीर आदि स्वास्थ्य के लिए इतने लाभकारी क्यों हैं।
दूध का सबसे बड़ा घटक जल है जो लगभग 87 प्रतिशत पाया जाता है। जल दूध को तरल अवस्था में बनाए रखता है तथा इसमें घुले हुए अन्य पोषक तत्वों के परिवहन में सहायता करता है। जल की अधिक मात्रा होने के कारण ही दूध आसानी से पचने योग्य बनता है।
दूध में उपस्थित मुख्य कार्बोहाइड्रेट लैक्टोज होता है जिसे दूध की शर्करा भी कहा जाता है। इसकी मात्रा लगभग 4.5 प्रतिशत होती है। लैक्टोज ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है और यही वह पदार्थ है जिस पर जीवाणु क्रिया करके दूध को दही में परिवर्तित करते हैं। लैक्टोज के किण्वन से लैक्टिक अम्ल बनता है जिससे दूध खट्टा होकर जम जाता है।
दूध में लगभग 3 से 4 प्रतिशत वसा पाई जाती है। यह वसा दूध को स्वादिष्ट बनाती है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। दूध की वसा में वसा-घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन A, D, E और K भी पाए जाते हैं जो शरीर के समुचित विकास के लिए आवश्यक हैं।
प्रोटीन दूध का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटक है जिसकी मात्रा लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत होती है। दूध का प्रमुख प्रोटीन केसिन कहलाता है। यही प्रोटीन दही बनने की प्रक्रिया में जमकर ठोस रूप ग्रहण करता है। केसिन शरीर की वृद्धि, ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में सहायक होता है।
इसके अतिरिक्त दूध में लगभग 0.7 प्रतिशत खनिज लवण पाए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सोडियम शामिल होते हैं। कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों तथा दाँतों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दूध में उपस्थित लैक्टोज ही वह मुख्य पदार्थ है जिस पर बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड क्रिया करता है।
बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड का परिचय
बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड एक प्रकार का लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करने वाला जीवाणु है। यह जीवाणु दूध में उपस्थित लैक्टोज को किण्वित करके लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) में परिवर्तित करता है।
प्रमुख विशेषताएँ
- यह एक सूक्ष्म जीवाणु है
- यह ऑक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति दोनों में कार्य कर सकता है
- यह दूध को खट्टा बनाता है
- यह दही जमाने में सहायक होता है
बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड का वर्गीकरण
जीव विज्ञान की दृष्टि से इसका वर्गीकरण इस प्रकार समझा जा सकता है:
- जगत : मोनेरा
- संघ : बैक्टीरिया
- प्रकार : लैक्टिक अम्ल जीवाणु
- सामान्य नाम : बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड
परीक्षाओं में प्रायः इसी सामान्य नाम का प्रयोग किया जाता है।
दूध से दही बनने की प्रक्रिया
दूध से दही बनने की प्रक्रिया को लैक्टिक अम्ल किण्वन (Lactic Acid Fermentation) कहते हैं।
प्रक्रिया के चरण
जमावन (Starter Culture) का मिलाना
- जब उबले और ठंडे दूध में थोड़ा सा पुराना दही मिलाया जाता है तो उसमें उपस्थित बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड सक्रिय हो जाता है।
लैक्टोज का अपघटन
- यह जीवाणु दूध की शर्करा लैक्टोज को तोड़ता है।
लैक्टिक अम्ल का निर्माण
- लैक्टोज → ग्लूकोज + गैलेक्टोज → लैक्टिक अम्ल
pH में कमी
- लैक्टिक अम्ल बनने से दूध का pH घटकर लगभग 4.5 हो जाता है।
केसिन का जमना
- अम्लीय वातावरण में दूध का प्रोटीन केसिन जम जाता है जिससे दूध ठोस रूप में बदलकर दही बन जाता है।
तापमान की भूमिका
दही जमाने की प्रक्रिया में तापमान की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। दूध में उपस्थित दही जमाने वाले जीवाणु विशेष रूप से लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करने वाले जीवाणु, तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। उपयुक्त तापमान मिलने पर ये जीवाणु सक्रिय होकर दूध की शर्करा लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित करते हैं जिससे दूध जमकर दही बन जाता है।
जब तापमान 20°C से कम होता है तब जीवाणुओं की क्रियाशीलता बहुत धीमी हो जाती है। इस स्थिति में दही जमने में अधिक समय लगता है या कई बार दही बिल्कुल भी नहीं जम पाती। यही कारण है कि सर्दियों के मौसम में दही जमाना अपेक्षाकृत कठिन होता है।
30°C से 40°C के बीच का तापमान दही जमाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस तापमान सीमा में जीवाणु अत्यंत सक्रिय रहते हैं और तीव्र गति से लैक्टोज का किण्वन करते हैं। परिणामस्वरूप दूध अपेक्षाकृत कम समय में अच्छे, गाढ़े और स्वादिष्ट दही में परिवर्तित हो जाता है।
यदि तापमान 50°C से अधिक हो जाए तो दही जमाने वाले जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। अधिक तापमान जीवाणुओं के लिए हानिकारक होता है और उनकी जैविक क्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं। इस कारण अत्यधिक गर्म दूध में दही का जमावन डालने पर दही नहीं जमती।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि दही जमाने के लिए संतुलित और उपयुक्त तापमान अत्यंत आवश्यक है। सही तापमान न केवल दही को अच्छी तरह जमाता है बल्कि उसके स्वाद, बनावट और पोषण गुणवत्ता को भी बनाए रखता है।
दही बनने में समय का प्रभाव
सामान्यतः
- 6–8 घंटे में दही जम जाती है
- अधिक समय रखने पर दही अधिक खट्टी हो जाती है
यह खट्टापन लैक्टिक अम्ल की मात्रा बढ़ने के कारण होता है।
बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड के स्वास्थ्य लाभ
पाचन में सहायक
- यह जीवाणु आंतों में अच्छे जीवाणुओं की संख्या बढ़ाता है।
प्रोबायोटिक प्रभाव
- दही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है।
प्रतिरक्षा शक्ति में वृद्धि
- नियमित दही सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
लैक्टोज असहिष्णुता में लाभ
- जो लोग दूध नहीं पचा पाते, वे दही आसानी से पचा लेते हैं।
आयुर्वेद में दही का महत्व
आयुर्वेद में दही को:
- गुरु
- बलवर्धक
- पाचक माना गया है।
किंतु रात्रि में दही सेवन निषिद्ध बताया गया है।
औद्योगिक स्तर पर दही निर्माण
डेयरी उद्योग में दही का निर्माण नियंत्रित परिस्थितियों में किया जाता है:
- शुद्ध जीवाणु संस्कृति
- नियंत्रित तापमान
- स्वच्छता
- मानकीकृत दूध
इससे दही की गुणवत्ता समान बनी रहती है।
अन्य किण्वित दुग्ध उत्पाद
बैक्टीरियम लैक्टिस एसिड या समान जीवाणु निम्न उत्पादों में भी उपयोगी हैं:
- छाछ
- मठा
- पनीर (अप्रत्यक्ष रूप से)
- चीज़
- योगर्ट
दूध खराब होना बनाम दही बनना
दूध का खट्टा होना सदैव खराब होना नहीं होता।
- दही बनना - लाभकारी जीवाणु |
- दूध सड़ना - हानिकारक जीवाणु |
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