मनुष्य की श्रव्यता की सीमा क्या है?

Sanjay Yadav
मनुष्य की श्रव्यता की सीमा 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक है। ध्वनि (Sound) हमारे जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। हम बोलते हैं, सुनते हैं, संगीत का आनंद लेते हैं, प्रकृति की ध्वनियों को अनुभव करते हैं ये सब ध्वनि के कारण ही संभव है। किंतु क्या आपने कभी सोचा है कि मनुष्य हर प्रकार की ध्वनि क्यों नहीं सुन सकता? इसका उत्तर हमारी श्रव्यता की सीमा (Range of Hearing) में छिपा हुआ है।

वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्य मनुष्य की श्रव्यता की सीमा 20 हर्ट्ज (Hz) से 20000 हर्ट्ज (Hz) तक होती है। इसका अर्थ यह है कि 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति वाली ध्वनियाँ (Infrasonic waves) और 20000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियाँ (Ultrasonic waves) सामान्यतः मनुष्य को सुनाई नहीं देतीं।

मनुष्य की श्रव्यता की सीमा 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक है।

ध्वनि क्या है?

ध्वनि एक प्रकार की यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) है जो किसी माध्यम (जैसे वायु, जल या ठोस पदार्थ) में कंपन (Vibration) के माध्यम से चलती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है तो वह आसपास की वायु कणों को भी कंपनित करती है जिससे दाब तरंगें उत्पन्न होती हैं। यही दाब तरंगें हमारे कानों तक पहुँचती हैं और हमें ध्वनि का अनुभव होता है।

ध्वनि के तीन प्रमुख गुण होते हैं:
  • आवृत्ति (Frequency) – ध्वनि की तीव्रता या पिच निर्धारित करती है।
  • आयाम (Amplitude) – ध्वनि की तीव्रता या ऊँचाई (Loudness) बताता है।
  • तरंगदैर्घ्य (Wavelength) – दो क्रमिक शिखरों के बीच की दूरी।
इनमें से आवृत्ति वह मुख्य तत्व है जो हमारी श्रव्यता की सीमा निर्धारित करता है।

हर्ट्ज (Hertz) क्या है?

आवृत्ति की इकाई हर्ट्ज (Hz) है। 1 हर्ट्ज का अर्थ है एक सेकंड में एक कंपन। यदि कोई ध्वनि स्रोत एक सेकंड में 100 कंपन करता है तो उसकी आवृत्ति 100 हर्ट्ज होगी। इसी प्रकार:
  • 20 कंपन प्रति सेकंड = 20 Hz
  • 20000 कंपन प्रति सेकंड = 20000 Hz
इस प्रकार, मनुष्य की श्रव्यता की सीमा 20 से 20000 कंपन प्रति सेकंड के बीच होती है।

मानव कान की संरचना और कार्य

मनुष्य की श्रव्यता की सीमा को समझने के लिए हमें कान की संरचना को समझना आवश्यक है। मानव कान तीन भागों में विभाजित होता है:

बाह्य कान (Outer Ear)
  • यह ध्वनि तरंगों को एकत्रित करके कान के पर्दे (Eardrum) तक पहुँचाता है।
मध्य कान (Middle Ear)
  • इसमें तीन सूक्ष्म अस्थियाँ (Ossicles) होती हैं मैलियस, इन्कस और स्टेप्स। ये ध्वनि तरंगों को बढ़ाकर आंतरिक कान तक पहुँचाती हैं।
आंतरिक कान (Inner Ear)
  • इसमें स्थित कॉक्लिया (Cochlea) द्रव से भरी होती है। यहाँ सूक्ष्म बाल कोशिकाएँ (Hair Cells) होती हैं जो कंपन को विद्युत संकेतों में बदलती हैं और मस्तिष्क तक भेजती हैं। इन्हीं बाल कोशिकाओं की संरचना और संवेदनशीलता हमारी श्रव्यता की सीमा को निर्धारित करती है।

श्रव्यता की सीमा: 20 Hz से 20000 Hz

20 Hz से कम (Infrasonic Waves)

20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति वाली ध्वनियाँ अधःश्रव्य (Infrasonic) कहलाती हैं। मनुष्य इन्हें नहीं सुन सकता लेकिन कुछ जानवर जैसे हाथी इन ध्वनियों का उपयोग संचार के लिए करते हैं।

इनका उपयोग:
  • भूकंप की भविष्यवाणी
  • ज्वालामुखी गतिविधि
  • समुद्री अनुसंधान

20 Hz से 20000 Hz (Audible Range)

यह मनुष्य की सामान्य श्रव्यता की सीमा है।
  • 20–200 Hz → गहरी, भारी ध्वनियाँ
  • 500–2000 Hz → सामान्य बातचीत
  • 2000–20000 Hz → तीखी और उच्च पिच ध्वनियाँ

20000 Hz से अधिक (Ultrasonic Waves)

20000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियाँ अल्ट्रासोनिक (Ultrasonic) कहलाती हैं।

इनका उपयोग:
  • अल्ट्रासाउंड मशीन
  • सोनार तकनीक
  • औद्योगिक जाँच

आयु का प्रभाव

जैसे-जैसे आयु बढ़ती है हमारी श्रवण क्षमता कम होती जाती है।
  • बच्चों में श्रव्यता 20000 Hz तक हो सकती है।
  • वयस्कों में यह घटकर 15000–17000 Hz रह जाती है।
  • वृद्धावस्था में यह 12000 Hz तक सीमित हो सकती है।
इसे Presbycusis कहा जाता है।

पशु-पक्षियों की श्रवण क्षमता की तुलना

मनुष्य की सामान्य श्रव्यता सीमा 20–20000 हर्ट्ज मानी जाती है। यह सीमा दैनिक जीवन की ध्वनियों बातचीत, संगीत, वाहन ध्वनि आदि को सुनने के लिए पर्याप्त है। परंतु मनुष्य अधःश्रव्य (Infrasonic) और पराश्रव्य (Ultrasonic) ध्वनियों को नहीं सुन सकता।

कुत्तों की श्रवण क्षमता मनुष्य से कहीं अधिक विकसित होती है। वे लगभग 40 हर्ट्ज से 60000 हर्ट्ज तक की ध्वनियाँ सुन सकते हैं। यही कारण है कि कुत्ते बहुत तीखी सीटी या अल्ट्रासोनिक डॉग व्हिसल की ध्वनि सुन लेते हैं जबकि मनुष्य उसे नहीं सुन पाता। उच्च आवृत्ति सुनने की यह क्षमता उन्हें खतरे का आभास करने और शिकार खोजने में सहायता करती है।

चमगादड़ की श्रवण क्षमता अत्यंत अद्भुत होती है। वे लगभग 20 हर्ट्ज से 120000 हर्ट्ज तक की ध्वनियाँ सुन सकते हैं। चमगादड़ पराश्रव्य (Ultrasonic) ध्वनियों का उपयोग प्रतिध्वनि-स्थान निर्धारण (Echolocation) के लिए करते हैं। वे उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगें उत्पन्न करते हैं जो वस्तुओं से टकराकर वापस लौटती हैं। इन लौटने वाली तरंगों के आधार पर वे अंधेरे में भी दिशा, दूरी और शिकार का पता लगा लेते हैं।

हाथियों की श्रवण सीमा लगभग 10 हर्ट्ज से 12000 हर्ट्ज तक होती है। वे बहुत निम्न आवृत्ति (Infrasonic) की ध्वनियाँ सुन सकते हैं। हाथी इन अधःश्रव्य तरंगों के माध्यम से कई किलोमीटर दूर तक संचार कर सकते हैं। यह क्षमता उन्हें समूह में रहने, खतरे की सूचना देने और लंबी दूरी पर संपर्क बनाए रखने में सहायता करती है।

तुलनात्मक विश्लेषण

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि प्रत्येक प्राणी की श्रवण क्षमता उसकी जीवन-शैली और पर्यावरण के अनुसार विकसित हुई है।
  • मनुष्य मध्यम आवृत्ति की ध्वनियों के लिए उपयुक्त है।
  • कुत्ता उच्च आवृत्ति को बेहतर सुन सकता है।
  • चमगादड़ अल्ट्रासोनिक ध्वनियों का उपयोग दिशा निर्धारण के लिए करता है।
  • हाथी निम्न आवृत्ति द्वारा दूरस्थ संचार करता है।

श्रव्यता सीमा के व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • संगीत उद्योग – वाद्य यंत्रों की ध्वनि इसी सीमा में निर्मित की जाती है।
  • संचार तकनीक – मोबाइल और रेडियो प्रणाली।
  • चिकित्सा क्षेत्र – अल्ट्रासाउंड परीक्षण।
  • रक्षा क्षेत्र – सोनार और रडार तकनीक।

ध्वनि प्रदूषण और श्रवण क्षमता

अत्यधिक तीव्र ध्वनि (उच्च डेसीबल) हमारी श्रवण क्षमता को क्षति पहुँचा सकती है।
  • 85 dB से अधिक ध्वनि लंबे समय तक सुनना हानिकारक है।
  • 120 dB से अधिक ध्वनि दर्द उत्पन्न कर सकती है।
ध्वनि प्रदूषण से बचाव आवश्यक है।

वैज्ञानिक कारण

मनुष्य की श्रव्यता की सीमा हमारे कान की संरचना और मस्तिष्क की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
  • कम आवृत्ति पर बाल कोशिकाएँ पर्याप्त उत्तेजित नहीं होतीं।
  • अधिक आवृत्ति पर वे प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं।
इसी कारण 20–20000 Hz की सीमा निर्धारित होती है।

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