यूरेनियम के नाभिकीय विघटन में अन्ततः क्या प्राप्त होता है?

Sanjay Yadav
यूरेनियम के नाभिकीय विघटन में अन्ततः सीसा प्राप्त होता है। आधुनिक भौतिक विज्ञान का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अध्याय नाभिकीय भौतिकी है जिसमें परमाणु के नाभिक की संरचना, स्थिरता तथा उसके परिवर्तनशील व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। इसी क्षेत्र में रेडियोधर्मिता (Radioactivity) का सिद्धांत आता है जिसके अनुसार कुछ भारी तत्व स्वाभाविक रूप से अस्थिर होते हैं और समय के साथ-साथ अपने नाभिक का विघटन करते रहते हैं।

यूरेनियम (Uranium) ऐसा ही एक भारी, रेडियोधर्मी तत्व है। यह पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और अपने दीर्घकालिक नाभिकीय विघटन की प्रक्रिया में अनेक मध्यवर्ती तत्वों से होकर गुजरता है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया का अंतिम और स्थिर उत्पाद सीसा (Lead) होता है।

यूरेनियम के नाभिकीय विघटन में अन्ततः सीसा प्राप्त होता है।

यूरेनियम : परिचय

यूरेनियम एक भारी धातु है जिसका परमाणु क्रमांक 92 है। यह आवर्त सारणी में एक्टिनाइड श्रेणी का सदस्य है।

प्रमुख विशेषताएँ
  • परमाणु क्रमांक : 92
  • परमाणु द्रव्यमान : लगभग 238
  • प्रकृति : रेडियोधर्मी
  • रंग : सिल्वर-ग्रे
  • प्रमुख समस्थानिक :
    • यूरेनियम-238
    • यूरेनियम-235
    • यूरेनियम-234
इनमें से यूरेनियम-238 सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है और यही वह समस्थानिक है जिसका विघटन अंततः सीसा-206 में होता है।

नाभिकीय विघटन की अवधारणा

नाभिकीय विघटन (Nuclear Decay) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई अस्थिर परमाणु नाभिक स्वतः टूटकर किसी अन्य नाभिक में परिवर्तित हो जाता है और इसके साथ ऊर्जा तथा कणों का उत्सर्जन होता है।

रेडियोधर्मी विघटन मुख्यतः तीन प्रकार का होता है:
  • अल्फा (α) विघटन
  • बीटा (β) विघटन
  • गामा (γ) विकिरण
यूरेनियम के विघटन में इन तीनों प्रकार की प्रक्रियाएँ क्रमिक रूप से घटित होती हैं।

यूरेनियम की अस्थिरता का कारण

  • परमाणु नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच संतुलन अत्यन्त आवश्यक होता है।
  • हल्के तत्वों में यह संतुलन सरल होता है
  • भारी तत्वों (जैसे यूरेनियम) में प्रोटॉनों की संख्या अधिक होने के कारण विद्युत प्रतिकर्षण बल बहुत अधिक हो जाता है
इस कारण यूरेनियम का नाभिक स्थिर नहीं रह पाता और धीरे-धीरे टूटता रहता है।

यूरेनियम-238 की रेडियोधर्मी श्रेणी

यूरेनियम-238 का नाभिकीय विघटन एक बार में पूरा नहीं होता बल्कि यह एक दीर्घ रेडियोधर्मी श्रेणी (Decay Series) के रूप में होता है। इसे यूरेनियम श्रेणी (Uranium Series) भी कहते हैं।

प्रमुख तथ्य
  • कुल चरण : लगभग 14
  • समयावधि : अरबों वर्ष
  • अंतिम उत्पाद : सीसा-206 (Pb-206)

यूरेनियम से सीसा तक का विघटन क्रम

यूरेनियम-238 क्रमशः निम्न तत्वों में परिवर्तित होता है:
  • यूरेनियम-238
  • थोरियम-234
  • प्रोटैक्टिनियम-234
  • यूरेनियम-234
  • थोरियम-230
  • रेडियम-226
  • रेडॉन-222
  • पोलोनियम-218
  • लेड-214
  • बिस्मथ-214
  • पोलोनियम-214
  • लेड-210
  • बिस्मथ-210
  • पोलोनियम-210
  • सीसा-206 (स्थिर)
इस प्रकार अनेक अल्फा और बीटा विघटन की प्रक्रियाओं के पश्चात अंततः स्थिर सीसा-206 प्राप्त होता है।

अल्फा और बीटा विघटन की भूमिका

अल्फा विघटन
  • नाभिक से 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन निकलते हैं
  • परमाणु क्रमांक 2 कम हो जाता है
  • परमाणु द्रव्यमान 4 कम हो जाता है
बीटा विघटन
  • एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में बदल जाता है
  • परमाणु क्रमांक 1 बढ़ जाता है
  • द्रव्यमान लगभग समान रहता है
यूरेनियम से सीसा तक पहुँचने में 8 अल्फा और 6 बीटा विघटन होते हैं।

सीसा : अंतिम स्थिर तत्व क्यों?

सीसा एक स्थिर तत्व है। इसका नाभिकीय विन्यास ऐसा होता है कि:
  • प्रोटॉन-न्यूट्रॉन अनुपात संतुलित होता है
  • विद्युत प्रतिकर्षण और नाभिकीय आकर्षण बल में संतुलन होता है
  • आगे कोई रेडियोधर्मी विघटन नहीं होता
इसी कारण यूरेनियम की पूरी श्रेणी का अंतिम उत्पाद सीसा ही होता है।

अर्धायु (Half-Life) का महत्व

यूरेनियम-238 की अर्धायु लगभग 4.5 अरब वर्ष है। इसका अर्थ है कि:
  • किसी भी समय में यूरेनियम की आधी मात्रा को सीसा बनने में अरबों वर्ष लगते हैं।
इसी सिद्धांत का उपयोग चट्टानों की आयु ज्ञात करने (Radiometric Dating) में किया जाता है।

भूविज्ञान और पुरातत्व में उपयोग

यूरेनियम-सीसा डेटिंग विधि का प्रयोग:
  • पृथ्वी की आयु ज्ञात करने
  • चट्टानों की प्राचीनता जानने
  • जीवाश्मों के काल निर्धारण
  • पर्वतों और महाद्वीपों के विकास के अध्ययन में किया जाता है

नाभिकीय ऊर्जा और यूरेनियम

यद्यपि यूरेनियम-238 का उपयोग प्रत्यक्ष नाभिकीय रिएक्टर में कम होता है फिर भी:
  • यह प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित किया जा सकता है
  • परमाणु ऊर्जा उत्पादन में सहायक है

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