मुगलकाल में लोक-निर्माण विभाग (Public Works Department) को क्या कहा जाता था?
मुगलकाल में लोक-निर्माण विभाग (Public Works Department) को क्या कहा जाता था?
मुगलकाल में लोक-निर्माण विभाग (Public Works Department) को शोहरत-ए-आम कहा जाता था। मध्यकालीन भारत में प्रशासन केवल कर-संग्रह और सेना तक सीमित नहीं था बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं, संचार, सिंचाई और नगरीय विकास को भी राज्य की जिम्मेदारी माना जाता था। मुगलकाल में यह सोच और अधिक संगठित रूप में सामने आती है। सड़कों, पुलों, सरायों, नहरों, उद्यानों और नगर-निर्माण जैसे कार्यों को एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढाँचे के अंतर्गत किया गया। इतिहासकारों के अनुसार, मुगल शासन में लोक-कल्याण से जुड़े इन निर्माण कार्यों के लिए जो विभागीय व्यवस्था थी उसे प्रायः ‘शोहरत-ए-आम’ कहा जाता था। यह नाम स्वयं इस बात का संकेत है कि इन कार्यों का उद्देश्य जनहित में राज्य की प्रतिष्ठा (शोहरत) को बढ़ाना था। ‘शोहरत-ए-आम’ शब्द का अर्थ और आशय ‘शोहरत’ फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ कीर्ति, प्रसिद्धि या प्रतिष्ठा होता है जबकि ‘आम’ का आशय जनसामान्य से है। इस प्रकार ‘शोहरत-ए-आम’ का अर्थ हुआ: जनसामान्य के हित में किए गए ऐसे कार्य जिनसे राज्य की कीर्ति और प्रशासनिक विश्वसनीयता बढ़े। मुगल शासक यह मानते थे कि जनता को सुगम आवागमन, सुरक्षित ठहराव,…