स्कर्वी एक समय में नाविकों और लंबे समुद्री यात्रियों में अत्यंत सामान्य था परंतु आज भी कुपोषण, गरीबी, गलत खान-पान, शराब-आसक्ति या कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में यह रोग देखा जाता है।
विटामिन C: परिचय और महत्व
विटामिन C एक जल-घुलनशील विटामिन है जिसे मानव शरीर स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकता। इसलिए इसे प्रतिदिन आहार से प्राप्त करना अनिवार्य है।
मुख्य कार्य:
- कोलेजन का निर्माण – त्वचा, हड्डी, दाँत, रक्त-नलिकाएँ और संयोजी ऊतक को मजबूती देता है।
- घाव भरने में सहायक – नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद।
- प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करना – संक्रमण से रक्षा।
- आयरन के अवशोषण में वृद्धि – विशेषकर वनस्पति स्रोतों से मिलने वाले आयरन का।
इन कार्यों के कारण विटामिन C की कमी शरीर में व्यापक प्रभाव डालती है जिसका सबसे गंभीर रूप स्कर्वी है।
स्कर्वी रोग क्या है?
स्कर्वी एक पोषण-अभाव रोग है जो विटामिन C की दीर्घकालिक कमी के कारण होता है। यह रोग विशेष रूप से उन ऊतकों को प्रभावित करता है जहाँ कोलेजन की आवश्यकता अधिक होती है जैसे त्वचा, मसूड़े, रक्त-नलिकाएँ और हड्डियाँ।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
स्कर्वी का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है किंतु यह रोग 15वीं से 18वीं शताब्दी के बीच समुद्री यात्राओं के दौरान व्यापक हुआ। महीनों तक ताजे फल-सब्ज़ियों की अनुपस्थिति में नाविक स्कर्वी से पीड़ित हो जाते थे। 18वीं शताब्दी में यह सिद्ध हुआ कि नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल स्कर्वी से बचाते हैं जिसके बाद जहाजों में नींबू/नींबू-रस रखना अनिवार्य किया गया।
विटामिन C की कमी कैसे होती है?
- ताजे फल-सब्ज़ियों का अभाव
- अत्यधिक पकाना या भंडारण (जिससे विटामिन C नष्ट हो जाता है)
- कुपोषण और गरीबी
- अल्कोहल-आसक्ति
- धूम्रपान (विटामिन C की आवश्यकता बढ़ जाती है)
- कुछ रोग जैसे आंतों के अवशोषण विकार
- शिशुओं में गलत दूध-आहार
स्कर्वी का जैव-रासायनिक आधार
विटामिन C कोलेजन संश्लेषण में आवश्यक एंज़ाइमों का सह-कारक है। इसकी कमी से:
- कोलेजन ठीक से नहीं बनता
- रक्त-नलिकाएँ कमजोर हो जाती हैं
- त्वचा व मसूड़ों से रक्तस्राव होने लगता है
- हड्डियों की मजबूती घट जाती है
यही कारण है कि स्कर्वी में रक्तस्राव, घावों का देर से भरना और हड्डी-दर्द प्रमुख लक्षण होते हैं।
स्कर्वी के लक्षण
प्रारंभिक लक्षण
- थकान और कमजोरी
- चिड़चिड़ापन
- भूख न लगना
- हल्का जोड़ों का दर्द।
उन्नत लक्षण
- मसूड़ों की सूजन व रक्तस्राव
- दाँतों का ढीला होना या गिरना
- त्वचा पर नीले-काले धब्बे (रक्तस्राव)
- छोटे घावों से भी अधिक खून आना
- बालों का रूखा व मुड़ना
- एनीमिया
गंभीर अवस्था
- गंभीर रक्तस्राव
- संक्रमण की संभावना
- बच्चों में हड्डियों का विकृत विकास
- अनुपचारित स्थिति में मृत्यु भी संभव
बच्चों में स्कर्वी
बच्चों में स्कर्वी को बार्लो रोग भी कहा जाता है।
लक्षण:
- चिड़चिड़ापन
- हड्डियों में दर्द
- चलने में कठिनाई
- मसूड़ों से खून
स्कर्वी का निदान
- आहार इतिहास – फल-सब्ज़ियों की कमी
- क्लिनिकल लक्षण – मसूड़ों से रक्त, त्वचा पर धब्बे
- रक्त परीक्षण – विटामिन C का स्तर
- रेडियोलॉजिकल जाँच (बच्चों में हड्डी परिवर्तन)
स्कर्वी का उपचार
स्कर्वी का उपचार अपेक्षाकृत सरल और प्रभावी है।
विटामिन C की पूर्ति:
- मौखिक विटामिन C सप्लीमेंट
- गंभीर मामलों में इंजेक्शन
आहार सुधार:
- खट्टे फल: नींबू, संतरा, मौसमी
- आंवला
- अमरूद
- टमाटर
- हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ
उचित उपचार से कुछ ही दिनों में सुधार दिखाई देने लगता है।
दैनिक विटामिन C की आवश्यकता
- वयस्क पुरुष: लगभग 90 mg/दिन
- वयस्क महिला: लगभग 75 mg/दिन
- धूम्रपान करने वालों को अधिक आवश्यकता होती है
रोकथाम
- प्रतिदिन ताजे फल-सब्ज़ियों का सेवन
- भोजन को अधिक न पकाएँ
- संतुलित आहार अपनाएँ
- बच्चों और वृद्धों के पोषण पर विशेष ध्यान
- धूम्रपान से बचें
