नायब-ए-मामलिकात् नामक पद का सृजन सल्तनतकाल में किसने किया था?
नायब-ए-मामलिकात् नामक पद का सृजन सल्तनतकाल में किसने किया था?
नायब-ए-मामलिकात् नामक पद का सृजन सल्तनतकाल में इल्तुतमिश के पुत्र मुइज़ुद्दीन बहरामशाह (1240-1242) के शासनकाल में उसके सरदारों द्वारा किया गया था। दिल्ली सल्तनत का इतिहास केवल सुल्तानों की विजयों और पराजयों तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक जटिल प्रशासनिक ढाँचे, सत्ता-संघर्षों और संस्थागत प्रयोगों की कहानी भी है। सल्तनतकाल में समय-समय पर ऐसे अनेक पदों और संस्थाओं का सृजन हुआ जिनका उद्देश्य शासन को स्थिर बनाना था। परन्तु कई बार वे सत्ता के विघटन का कारण भी बने। “नायब-ए-मामलिकात्” नामक पद इसी प्रकार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जिसका सृजन इल्तुतमिश के पुत्र मुइज़ुद्दीन बहरामशाह (शासनकाल: 1240–1242 ई.) के समय उसके शक्तिशाली सरदारों द्वारा किया गया। यह पद न केवल उस काल की राजनीतिक परिस्थितियों को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे कमजोर सुल्तान के शासन में वास्तविक शक्ति अमीरों के हाथों में चली जाती है। दिल्ली सल्तनत की पृष्ठभूमि दिल्ली सल्तनत की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी परंतु इसे संगठित और सुदृढ़ स्वरूप देने का श्रेय इल्तुतमिश को जाता है। इल्तुतमिश ने प्रशासनिक ढाँचे को मज़बूत कि…