भरतनाट्यम नृत्य का विकास किससे हुआ है?
भरतनाट्यम नृत्य का विकास एकहार्य लास्यंग से हुआ है। भरतनाट्यम भारत की सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है। यह नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, भक्ति, संगीत, साहित्य और अभिनय कला का अद्भुत संगम है। भरतनाट्यम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसकी जड़ें भारतीय सभ्यता के उन सांस्कृतिक स्रोतों तक पहुँचती हैं जहाँ नृत्य को ईश्वर की आराधना तथा आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम माना जाता था। भारतीय नाट्य परंपरा के अनुसार भरतनाट्यम नृत्य का विकास “एकहार्य लास्यंग” से हुआ माना जाता है। एकहार्य लास्यंग एक ऐसा नृत्य रूप था जिसमें एक ही कलाकार विभिन्न भावों, मुद्राओं और अभिनय के माध्यम से सम्पूर्ण प्रस्तुति देता था। यह शैली मुख्यतः लास्य प्रधान थी, अर्थात इसमें कोमलता, सौंदर्य, भावुकता और सौम्यता का विशेष महत्व था। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में लास्य को नृत्य की एक महत्वपूर्ण शाखा माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव के तांडव नृत्य के संतुलन के रूप में माता पार्वती ने लास्य नृत्य की रचना की थी। तांडव जहाँ शक्ति, वीरता और ऊर्जा का प्रतीक था, वहीं…