प्रसिद्ध पारसी त्यौहार नौरोज किस शासक ने प्रारम्भ किया था?

Sanjay Yadav
प्रसिद्ध पारसी त्यौहार नौरोज बलबन ने प्रारम्भ किया था।

प्रसिद्ध पारसी त्यौहार नौरोज बलबन ने प्रारम्भ किया था। भारत का इतिहास विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और त्योहारों से समृद्ध रहा है। मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत के शासकों ने न केवल प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि कई सांस्कृतिक परंपराओं को भी अपनाया और प्रोत्साहित किया। इन्हीं परंपराओं में एक महत्वपूर्ण नाम प्रसिद्ध पारसी त्योहार “नौरोज” का है। सामान्य ज्ञान और इतिहास की प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाने वाला तथ्य है कि प्रसिद्ध पारसी त्योहार नौरोज को दिल्ली सल्तनत के सुल्तान बलबन ने प्रारम्भ किया था। यह तथ्य भारतीय मध्यकालीन इतिहास, संस्कृति और धार्मिक सहिष्णुता को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

नौरोज, जिसे नवरोज़ या नवरोज भी कहा जाता है, मूल रूप से फारसी नववर्ष का उत्सव है। यह त्योहार प्राचीन ईरान से जुड़ा हुआ है और पारसी समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। “नौरोज” शब्द फारसी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है—“नौ” अर्थात नया और “रोज” अर्थात दिन। इस प्रकार नौरोज का अर्थ है “नया दिन”। यह त्योहार नए वर्ष के आगमन, नई शुरुआत, समृद्धि, शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

नौरोज का इतिहास लगभग तीन हजार वर्ष पुराना माना जाता है। इसका संबंध प्राचीन फारसी सभ्यता और पारसी धर्म से है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है, जब दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है। इस समय प्रकृति में नए जीवन का संचार होता है, पेड़ों पर नई पत्तियाँ आती हैं और वातावरण में ताजगी का अनुभव होता है। इसी कारण नौरोज को नवजीवन और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है।

भारत में नौरोज का प्रवेश मुस्लिम शासकों और फारसी सांस्कृतिक प्रभाव के माध्यम से हुआ। दिल्ली सल्तनत के काल में फारसी भाषा, साहित्य और संस्कृति का प्रभाव काफी बढ़ गया था। सुल्तान बलबन, जो दिल्ली सल्तनत के प्रमुख शासकों में से एक था, ने अपने शासनकाल में शाही दरबार की गरिमा और अनुशासन को बढ़ाने के लिए अनेक परंपराओं को अपनाया। माना जाता है कि उसने फारसी संस्कृति से प्रभावित होकर नौरोज उत्सव को विशेष महत्व दिया और इसे दरबारी समारोहों में शामिल किया।

सुल्तान बलबन का शासनकाल दिल्ली सल्तनत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। उसका पूरा नाम गयासुद्दीन बलबन था। उसने 1266 ईस्वी से 1287 ईस्वी तक शासन किया। बलबन ने राजसत्ता की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए “ज़िल्ले-इलाही” अर्थात ईश्वर की छाया जैसी अवधारणाओं को प्रोत्साहित किया। वह शाही गरिमा और अनुशासन में विश्वास करता था तथा दरबार में कठोर नियमों का पालन करवाता था। इसी क्रम में उसने फारसी परंपराओं और उत्सवों को भी बढ़ावा दिया, जिनमें नौरोज का विशेष स्थान था।

नौरोज के अवसर पर शाही दरबार को विशेष रूप से सजाया जाता था। दरबारियों और अधिकारियों को नए वस्त्र पहनने का अवसर मिलता था। विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे तथा उपहारों का आदान-प्रदान किया जाता था। यह उत्सव केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। इससे शासक और दरबारियों के बीच संबंध मजबूत होते थे तथा साम्राज्य की सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा मिलता था।

पारसी समुदाय में नौरोज का विशेष महत्व है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, विशेष व्यंजन बनाते हैं और अग्नि मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं और नए वर्ष के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। पारसी धर्म में अग्नि को पवित्र माना जाता है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों में अग्नि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

नौरोज के अवसर पर “हफ्त-सीन” नामक विशेष सजावट भी की जाती है। इसमें सात ऐसी वस्तुएँ रखी जाती हैं जिनके नाम फारसी भाषा में “स” अक्षर से शुरू होते हैं। ये वस्तुएँ जीवन, स्वास्थ्य, समृद्धि, प्रेम, धैर्य और सफलता का प्रतीक मानी जाती हैं। यह परंपरा आज भी ईरान और विश्वभर में बसे पारसी समुदायों के बीच लोकप्रिय है।

भारत में पारसी समुदाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उद्योग, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, सेना और समाज सेवा के क्षेत्र में पारसी समुदाय ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। नौरोज उनके सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है और यह त्योहार उनकी पहचान तथा परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से नौरोज से संबंधित कई प्रश्न पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए—नौरोज किस समुदाय का प्रमुख त्योहार है? उत्तर: पारसी समुदाय। नौरोज का अर्थ क्या है? उत्तर: नया दिन। प्रसिद्ध पारसी त्योहार नौरोज को दिल्ली सल्तनत में किस शासक ने प्रारम्भ किया? उत्तर: बलबन। नौरोज का संबंध किस देश की प्राचीन संस्कृति से है? उत्तर: ईरान। नौरोज किस ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है? उत्तर: वसंत ऋतु।

यह तथ्य SSC, UPSC, RRB, NDA, CDS, CTET, UGC NET, राज्य लोक सेवा आयोग, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। कई बार प्रश्न सीधे पूछा जाता है कि “प्रसिद्ध पारसी त्योहार नौरोज किस शासक ने प्रारम्भ किया था?” जबकि कभी-कभी इसे दिल्ली सल्तनत या मध्यकालीन इतिहास के संदर्भ में पूछा जाता है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को इस तथ्य को अवश्य याद रखना चाहिए।

नौरोज केवल एक त्योहार नहीं है बल्कि यह सांस्कृतिक समन्वय, नवजीवन और मानव सभ्यता की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में इसकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि विभिन्न संस्कृतियाँ और परंपराएँ समय के साथ एक-दूसरे को प्रभावित करती रही हैं। बलबन द्वारा नौरोज को संरक्षण दिए जाने का तथ्य भारतीय इतिहास में फारसी सांस्कृतिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। यही कारण है कि नौरोज आज भी इतिहास, संस्कृति और सामान्य ज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

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