डीटीपी (DTP) का टीका बच्चों को किन रोगों से बचाव के लिए लगाया जाता है?
A. खसरा, पोलियो तथा चेचक
B. टिटनेस, डिप्थीरिया तथा हूपिंग कफ (काली खाँसी)
C. मलेरिया, डेंगू तथा चिकनगुनिया
D. टाइफाइड, हैजा तथा पीलिया
उत्तर: B. टिटनेस, डिप्थीरिया तथा हूपिंग कफ (काली खाँसी)
डीटीपी (DTP) का टीका बच्चों के लिए लगाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण टीकों में से एक है। यह टीका बच्चों को तीन गंभीर और जानलेवा संक्रामक रोगों टिटनेस (Tetanus), डिप्थीरिया (Diphtheria) तथा हूपिंग कफ (Whooping Cough या काली खाँसी) से सुरक्षा प्रदान करता है। यही कारण है कि भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme - UIP) में डीटीपी टीके को विशेष स्थान दिया गया है। जन्म के बाद शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए उसे विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाने के लिए समय-समय पर टीकाकरण कराया जाता है। National GK की दृष्टि से भी डीटीपी टीका प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाने वाला महत्वपूर्ण विषय है।
डीटीपी का पूरा नाम Diphtheria, Tetanus and Pertussis Vaccine है। इसमें तीन अलग-अलग रोगों से बचाव करने वाले घटक होते हैं। डिप्थीरिया एक गंभीर जीवाणुजनित रोग है जो मुख्य रूप से गले और नाक को प्रभावित करता है। यह रोग Corynebacterium diphtheriae नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो रोगी को सांस लेने में कठिनाई, हृदय संबंधी समस्याएँ और तंत्रिका तंत्र की क्षति तक हो सकती है। टीकाकरण के कारण आज यह रोग पहले की तुलना में बहुत कम देखने को मिलता है।
टिटनेस एक अत्यंत खतरनाक रोग है जो Clostridium tetani नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया सामान्यतः मिट्टी, धूल तथा जंग लगी वस्तुओं पर पाया जाता है। शरीर पर किसी कट या घाव के माध्यम से यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है और एक विषैला पदार्थ (Toxin) उत्पन्न करता है, जिससे मांसपेशियों में तीव्र अकड़न और ऐंठन होने लगती है। टिटनेस को सामान्य भाषा में "धनुष्टंकार" भी कहा जाता है। यह रोग अत्यंत गंभीर होता है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा सिद्ध हो सकता है। डीटीपी टीका इस रोग से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।
हूपिंग कफ, जिसे काली खाँसी या पर्टुसिस (Pertussis) भी कहा जाता है Bordetella pertussis नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला अत्यधिक संक्रामक रोग है। इसमें रोगी को लगातार तेज खाँसी आती है और खाँसी के बाद सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज़ निकलती है, इसलिए इसे Whooping Cough कहा जाता है। छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं में यह रोग विशेष रूप से खतरनाक होता है तथा निमोनिया, मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं और मृत्यु का कारण भी बन सकता है। डीटीपी टीका इस बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के अंतर्गत डीटीपी टीका निर्धारित समय पर लगाया जाता है। सामान्यतः इसकी पहली खुराक 6 सप्ताह की आयु में, दूसरी 10 सप्ताह में तथा तीसरी 14 सप्ताह में दी जाती है। इसके बाद 16 से 24 महीने की आयु में पहला बूस्टर डोज तथा 5 से 6 वर्ष की आयु में दूसरा बूस्टर लगाया जाता है। कुछ परिस्थितियों में बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए Td अथवा Tdap वैक्सीन भी दी जाती है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
डीटीपी टीके के कुछ सामान्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन, लालिमा, बुखार या बच्चे का चिड़चिड़ापन। ये लक्षण सामान्यतः एक-दो दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं। गंभीर दुष्प्रभाव अत्यंत दुर्लभ होते हैं। इसलिए माता-पिता को किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए और बच्चों का टीकाकरण निर्धारित समय पर अवश्य कराना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार दोनों ही डीटीपी टीके को बच्चों के लिए अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी मानते हैं। व्यापक टीकाकरण अभियान के कारण दुनिया भर में डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खाँसी जैसी बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे सफल उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, पुलिस, शिक्षक भर्ती, NDA, CDS, राज्य लोक सेवा आयोग तथा विभिन्न अन्य सरकारी परीक्षाओं में डीटीपी टीके से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। परीक्षाओं में यह पूछा जा सकता है कि डीटीपी का पूरा नाम क्या है, यह किन रोगों से बचाता है, इसमें कौन-कौन से रोग शामिल हैं, इसका टीकाकरण कब किया जाता है या यह किस राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत लगाया जाता है। इसलिए इस विषय का अध्ययन सामान्य विज्ञान के साथ-साथ National GK की तैयारी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि डीटीपी टीका बच्चों को टिटनेस, डिप्थीरिया तथा हूपिंग कफ (काली खाँसी) जैसे गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। समय पर टीकाकरण न केवल बच्चे को सुरक्षित रखता है बल्कि समाज में इन संक्रामक रोगों के प्रसार को भी रोकता है। इसलिए प्रत्येक अभिभावक का यह दायित्व है कि वह अपने बच्चे का टीकाकरण राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार समय पर अवश्य कराए। National GK की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी डीटीपी टीका एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि इससे संबंधित तथ्य सामान्य विज्ञान और सामान्य ज्ञान दोनों वर्गों में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
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