भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी संदर्भ में बिजली मंत्रालय ने संसद को जानकारी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटर वर्ष 2031-32 तक देश के बिजली ग्रिड पर 26.3 गीगावाट (GW) का अतिरिक्त लोड डालेंगे। यह अनुमान दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को नई दिशा देने वाले हैं।
संसद में क्या जानकारी दी गई?
बिजली मंत्रालय के अनुसार, AI आधारित डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण वर्ष 2031-32 तक 26.3 GW अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता होगी। यह अतिरिक्त लोड देश के बिजली ग्रिड से जोड़ा जाएगा और इसकी पूर्ति मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) अर्थात नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से करने की योजना है।
सरकार का मानना है कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा तथा अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोत भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पिछले अनुमान से लगभग दोगुना बढ़ा नया आकलन
यह नया अनुमान सरकार द्वारा मार्च 2026 में जारी किए गए पिछले अनुमान की तुलना में लगभग दोगुना है।
- मार्च 2026 का अनुमान: 2031-32 तक डेटा सेंटरों की बिजली मांग 13.56 GW होगी।
- नया अनुमान: 2031-32 तक यह मांग बढ़कर 26.3 GW हो जाएगी।
यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि AI आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार सरकार की पूर्व अपेक्षाओं से कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है।
डेटा सेंटर क्या होता है?
डेटा सेंटर (Data Center) एक विशेष प्रकार का फिजिकल कमरा, भवन या बड़ी सुविधा (Facility) होती है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से जुड़ा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाता है।
इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरण शामिल होते हैं:
- सर्वर (Servers)
- स्टोरेज सिस्टम (Storage Systems)
- नेटवर्किंग उपकरण
- सुरक्षा प्रणाली
- कूलिंग सिस्टम
- पावर बैकअप
डेटा सेंटर का मुख्य कार्य विभिन्न एप्लिकेशन और डिजिटल सेवाओं का निर्माण, संचालन तथा उपलब्ध कराना होता है। इसके साथ ही यह उन एप्लिकेशन और सेवाओं से संबंधित विशाल मात्रा में डेटा को सुरक्षित रूप से स्टोर, प्रोसेस और मैनेज भी करता है।
आज बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाएँ तथा AI मॉडल सभी डेटा सेंटरों पर निर्भर हैं।
भारत में डेटा सेंटर क्षमता का तेजी से विस्तार
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में शामिल है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या, डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाओं और AI के विस्तार के कारण देश में डेटा सेंटरों की क्षमता लगातार बढ़ रही है।
2020 की स्थिति
- वर्ष 2020 में भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता केवल 375 मेगावाट (MW) थी।
2025 तक की प्रगति
- सिर्फ पाँच वर्षों में भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5 गीगावाट (GW) तक पहुँच गई है। यह दर्शाता है कि देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अत्यंत तेज़ी से हो रहा है।
2030 तक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि
- अनुमान है कि भारत की चालू डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक लगभग 40 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (Compound Annual Growth Rate - CAGR) से बढ़कर लगभग 12 GW तक पहुँच जाएगी।
यह वृद्धि भारत को एशिया के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
AI आधारित डेटा सेंटरों का तेज़ विस्तार
AI तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण विशेष रूप से AI के लिए समर्पित डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अनुमान के अनुसार:
- वर्तमान AI-समर्पित क्षमता लगभग 275 MW है।
- वर्ष 2030 तक यह बढ़कर लगभग 6,546 MW हो जाएगी।
अर्थात AI आधारित डेटा सेंटर क्षमता में लगभग 24 गुना वृद्धि होने की संभावना है।
यह वृद्धि बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models), मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI, स्वचालित निर्णय प्रणाली तथा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती आवश्यकताओं को दर्शाती है।
डेटा सेंटरों की मांग क्यों बढ़ रही है?
भारत में डेटा सेंटरों की मांग कई कारणों से लगातार बढ़ रही है।
1. हाइपरस्केल क्लाउड प्रोवाइडर
- Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure, Google Cloud तथा अन्य बड़े क्लाउड सेवा प्रदाता भारत में अपने डेटा सेंटरों का विस्तार कर रहे हैं।
2. एंटरप्राइज डिजिटलीकरण
- सरकारी और निजी संस्थाएँ तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना रही हैं, जिससे डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की आवश्यकता बढ़ रही है।
3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- AI मॉडल को प्रशिक्षित (Training) करने और चलाने (Inference) के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता तथा बड़े डेटा सेंटरों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बिजली की मांग को तेजी से बढ़ा रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती भूमिका
बिजली मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डेटा सेंटरों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली मांग को मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जलविद्युत
- हरित ऊर्जा आधारित बिजली परियोजनाएँ
इस रणनीति का उद्देश्य बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम रखना और भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
भारत के लिए इसका महत्व
डेटा सेंटरों का विस्तार केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसके प्रमुख लाभ हैं:
- डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को बढ़ावा मिलेगा।
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- भारत वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकेगा।
- डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को गति मिलेगी।
