भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है और नई दिल्ली इसकी राष्ट्रीय राजधानी है।

Sanjay Yadav
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक (democratic) और धर्मनिरपेक्ष (secular) देश है। यह विविधताओं से भरा ऐसा राष्ट्र है जहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, संस्कृतियाँ, परंपराएँ और जीवन-शैलियाँ एक साथ मिलकर भारत की अनूठी पहचान का निर्माण करती हैं। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है तथा सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान रखने की भावना को प्रोत्साहित करता है। यही कारण है कि भारत को लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र कहा जाता है। भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली है जो देश की राजनीतिक, प्रशासनिक तथा कूटनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नई दिल्ली में भारत सरकार के अधिकांश महत्वपूर्ण मंत्रालय, संसद भवन, सर्वोच्च न्यायालय के निकट प्रमुख सरकारी संस्थान तथा राष्ट्रपति भवन स्थित हैं। यह शहर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है।

भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है और नई दिल्ली इसकी राष्ट्रीय राजधानी है।

भारत का लोकतंत्र विश्व के लिए एक आदर्श उदाहरण है। यहाँ जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से करती है। भारत में प्रत्येक वयस्क नागरिक, जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे मतदान का अधिकार प्राप्त है। चुनाव आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उत्तरदायी संवैधानिक संस्था है। भारत में लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभाओं, नगर निगमों, नगरपालिकाओं तथा पंचायतों के चुनाव नियमित रूप से कराए जाते हैं। लोकतंत्र का अर्थ केवल मतदान करना ही नहीं है, बल्कि नागरिकों की भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून का शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा संविधान के प्रति सम्मान भी लोकतंत्र की आधारशिला हैं।

भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ और इसी दिन भारत पूर्ण रूप से एक गणराज्य बना। संविधान की प्रस्तावना में भारत को "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य" घोषित किया गया है। "पंथनिरपेक्ष" शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया, किंतु संविधान की मूल भावना प्रारंभ से ही सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार और धार्मिक स्वतंत्रता की रही है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, उसका प्रचार करने तथा धार्मिक संस्थाओं की स्थापना करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, बशर्ते कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य प्रभावित न हों।

भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी तथा अनेक अन्य धार्मिक समुदाय सदियों से साथ-साथ रहते आए हैं। देश में विभिन्न धार्मिक पर्व जैसे दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरु नानक जयंती, महावीर जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, बैसाखी, पोंगल, ओणम, लोहड़ी, गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा पूरे उत्साह और सौहार्द के साथ मनाए जाते हैं। यही धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है। "अनेकता में एकता" भारत की पहचान है और यही इसकी लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता भी है।

भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली केवल प्रशासनिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व का नगर भी है। नई दिल्ली का विकास मुख्य रूप से ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था। वर्ष 1911 में ब्रिटिश सरकार ने भारत की राजधानी को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की। इसके बाद प्रसिद्ध वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर ने नई दिल्ली के आधुनिक स्वरूप की योजना तैयार की। वर्ष 1931 में नई दिल्ली को औपचारिक रूप से नई राजधानी के रूप में उद्घाटित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नई दिल्ली भारत गणराज्य की राष्ट्रीय राजधानी बनी रही।

नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, इंडिया गेट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, केंद्रीय सचिवालय, सर्वोच्च न्यायालय, विभिन्न मंत्रालय, दूतावास तथा अनेक राष्ट्रीय संस्थान स्थित हैं। राष्ट्रपति भवन विश्व के सबसे बड़े राष्ट्रपति आवासों में से एक है। संसद भवन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र है, जहाँ लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें आयोजित होती हैं तथा राष्ट्रीय महत्व के कानून बनाए जाते हैं। नई संसद भवन का उद्घाटन वर्ष 2023 में किया गया, जो आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक प्रगति का प्रतीक माना जाता है।

भारत में लोकतंत्र तीन प्रमुख स्तंभों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका पर आधारित है। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उनका पालन सुनिश्चित करती है तथा न्यायपालिका संविधान और कानूनों की रक्षा करते हुए न्याय प्रदान करती है। इन तीनों के बीच संतुलन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। इसके अतिरिक्त स्वतंत्र प्रेस, सक्रिय नागरिक समाज तथा जागरूक मतदाता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाते हैं।

भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है, जहाँ केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपने-अपने संवैधानिक अधिकारों के अनुसार कार्य करती हैं। वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। प्रत्येक राज्य की अपनी राजधानी, सरकार और विधानसभा होती है। यह संघीय ढाँचा देश की विशाल भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता करता है।

भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में संविधान सर्वोच्च है। कोई भी व्यक्ति, संस्था या सरकार संविधान से ऊपर नहीं है। संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जिनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल हैं। साथ ही संविधान नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख करता है, जिनका पालन प्रत्येक भारतीय का नैतिक दायित्व है।

भारत की न्यायपालिका विश्व की सबसे स्वतंत्र न्याय प्रणालियों में से एक मानी जाती है। सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक संस्थान है, जबकि प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय कार्यरत हैं। इनके अतिरिक्त जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय भी न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। न्यायपालिका संविधान की रक्षा करती है और नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारत में लोकतंत्र केवल राजनीतिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का भी आधार है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाएँ, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, आर्थिक सुधार तथा वैज्ञानिक प्रगति जैसे क्षेत्रों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंचायत राज व्यवस्था के माध्यम से गाँव स्तर तक लोकतंत्र को मजबूत किया गया है, जिससे स्थानीय नागरिक विकास कार्यों में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकें।

भारत विश्व के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संयुक्त राष्ट्र, जी-20, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, राष्ट्रमंडल तथा अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत सक्रिय भागीदारी निभाता है। भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन, स्वतंत्र चुनाव प्रणाली तथा संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती की विश्वभर में सराहना की जाती है।

नई दिल्ली में प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर भव्य परेड आयोजित की जाती है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, वैज्ञानिक उपलब्धियाँ और राज्यों की झाँकियाँ प्रदर्शित की जाती हैं। 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं और राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। ये दोनों राष्ट्रीय पर्व भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं।

भारत की सांस्कृतिक विविधता लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को और अधिक मजबूत बनाती है। देश में 22 अनुसूचित भाषाएँ तथा सैकड़ों बोलियाँ प्रचलित हैं। विभिन्न राज्यों की अपनी अलग संस्कृति, पहनावा, भोजन, लोककला और लोकसंगीत है, फिर भी सभी भारतीय एक राष्ट्रीय पहचान से जुड़े हुए हैं। यही विविधता भारत को विश्व के सबसे अनूठे देशों में स्थान दिलाती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली है, भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था, मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, संविधान की प्रस्तावना में भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य कहा गया है तथा धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और समान व्यवहार है। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Territory - NCT) का हिस्सा है और यहाँ भारत सरकार के प्रमुख संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थान स्थित हैं।

आज भारत लोकतंत्र, विकास, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। संविधान के आदर्शों, लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष भावना के कारण भारत विश्व समुदाय में एक सम्मानित स्थान रखता है। प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान का सम्मान करे, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखे, सभी धर्मों के प्रति सम्मान का भाव रखे तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए देश की प्रगति में अपना सक्रिय योगदान दे। यही भारत की वास्तविक शक्ति है और यही उसे विश्व के सबसे महान लोकतांत्रिक राष्ट्रों में शामिल करती है। प्रतियोगी परीक्षाओं तथा सामान्य ज्ञान की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है और National GK के अध्ययन में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, धर्मनिरपेक्षता, संविधान तथा नई दिल्ली से संबंधित तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं।

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