UNESCO का बड़ा फैसला: सेबास्तिया और माउंट अमेल के 5 ऐतिहासिक दुर्ग बने विश्व धरोहर स्थल

Sanjay Yadav
यूनेस्को द्वारा पश्चिमी तट स्थित सेबास्तिया तथा लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के दुर्गों को विश्व धरोहर सूची और संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य-पूर्व क्षेत्र लंबे समय से संघर्ष, अस्थिरता और हिंसा का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों के कारण अनेक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को गंभीर क्षति पहुँचने का खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा इन धरोहरों को विशेष संरक्षण प्रदान करना उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा वैश्विक महत्ता को रेखांकित करता है।

UNESCO) ने पश्चिमी तट स्थित सेबास्तिया तथा लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के पाँच दुर्गों को विश्व धरोहर सूची तथा संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची दोनों में सम्मिलित किया

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) विश्वभर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की पहचान, संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव सभ्यता की उन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखना है, जो संपूर्ण विश्व के लिए असाधारण महत्व रखती हैं। इसी उद्देश्य से यूनेस्को विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) का निर्माण करता है, जिसमें उन सांस्कृतिक, प्राकृतिक तथा मिश्रित धरोहर स्थलों को शामिल किया जाता है जिनका असाधारण सार्वभौमिक महत्त्व (Outstanding Universal Value) होता है। इस सूची में शामिल होने के बाद संबंधित स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होती है तथा उसके संरक्षण के लिए तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।

विश्व धरोहर सूची में तीन प्रकार की धरोहरों को शामिल किया जाता है। पहली श्रेणी सांस्कृतिक धरोहर की होती है, जिसमें ऐतिहासिक नगर, मंदिर, स्मारक, किले, महल, पुरातात्त्विक स्थल और मानव सभ्यता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण अवशेष सम्मिलित होते हैं। दूसरी श्रेणी प्राकृतिक धरोहर की होती है, जिसमें राष्ट्रीय उद्यान, पर्वत, वन, झीलें, समुद्री क्षेत्र तथा जैव विविधता वाले स्थल शामिल किए जाते हैं। तीसरी श्रेणी मिश्रित धरोहर की होती है, जिनमें सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों प्रकार के महत्व विद्यमान होते हैं।

इसके अतिरिक्त यूनेस्को संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची (List of World Heritage in Danger) भी तैयार करता है। इस सूची में उन धरोहर स्थलों को सम्मिलित किया जाता है जो विभिन्न प्रकार के खतरों का सामना कर रहे हों। इन खतरों में सशस्त्र संघर्ष, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएँ, अनियंत्रित नगरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध उत्खनन, पर्यटन का अत्यधिक दबाव तथा संरक्षण की उपेक्षा प्रमुख हैं। किसी स्थल को संकटग्रस्त सूची में शामिल करने का उद्देश्य केवल उसके खतरे को दर्शाना नहीं होता, बल्कि उसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषज्ञों और विभिन्न देशों का सहयोग प्राप्त करना भी होता है। इससे संबंधित देश को तकनीकी सलाह, संरक्षण योजनाएँ और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

यूनेस्को द्वारा पश्चिमी तट स्थित सेबास्तिया तथा लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के पाँच ऐतिहासिक दुर्गों को एक साथ विश्व धरोहर सूची और संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में शामिल करना इस बात का संकेत है कि ये स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इनके अस्तित्व पर गंभीर खतरा भी मंडरा रहा है। विशेष रूप से मध्य-पूर्व में जारी संघर्षों ने इन धरोहरों के संरक्षण को अत्यंत कठिन बना दिया है। युद्ध और सैन्य गतिविधियों के कारण अनेक ऐतिहासिक संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हो रही हैं, पुरातात्त्विक अवशेष नष्ट हो रहे हैं तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं।

सेबास्तिया पश्चिमी तट (West Bank) में नाबलुस नगर के निकट स्थित एक अत्यंत प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। इसकी पहचान प्राचीन समारिया (Samaria) नगर के रूप में की जाती है, जो बाइबिल काल में इज़राइल साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। यह नगर प्राचीन निकट पूर्व (Ancient Near East) की सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व रहा है। बाइबिल में समारिया का अनेक स्थानों पर उल्लेख मिलता है और यह यहूदी, ईसाई तथा अन्य ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

सेबास्तिया में किए गए पुरातात्त्विक उत्खननों से विभिन्न कालों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इनमें लौह युग (Iron Age) के अवशेष, रोमन साम्राज्य के भवन और सड़कें, बीजान्टिन काल के धार्मिक स्मारक तथा इस्लामी काल की स्थापत्य संरचनाएँ शामिल हैं। इन सभी अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र हजारों वर्षों तक निरंतर मानव सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ की बहुस्तरीय सांस्कृतिक विरासत इस स्थल को विश्व इतिहास में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।

सेबास्तिया केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि विभिन्न सभ्यताओं, धर्मों और संस्कृतियों के सह-अस्तित्व का भी प्रतीक है। अलग-अलग कालखंडों में अनेक शासकों और सभ्यताओं ने इस क्षेत्र पर शासन किया तथा अपनी स्थापत्य, कला और संस्कृति की छाप छोड़ी। यही कारण है कि यह स्थल इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध दूसरा महत्वपूर्ण समूह लेबनान के माउंट अमेल (जबल अमेल) क्षेत्र के पाँच ऐतिहासिक दुर्ग हैं। इन दुर्गों में सबसे प्रसिद्ध ब्यूफोर्ट दुर्ग (Beaufort Castle) है। यह दुर्ग मध्यकालीन सैन्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित यह दुर्ग अपनी सामरिक स्थिति के कारण सदियों तक विभिन्न शासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

माउंट अमेल क्षेत्र के इन पाँचों दुर्गों में क्रूसेडर, अय्यूबी, ममलूक तथा स्थानीय स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इन दुर्गों की वास्तुकला यह दर्शाती है कि किस प्रकार विभिन्न संस्कृतियों और शासकों ने समय-समय पर इनका विस्तार और पुनर्निर्माण किया। पत्थर से निर्मित विशाल दीवारें, सुरक्षा के लिए बनाए गए बुर्ज, प्रवेश द्वार, जल संचयन प्रणाली तथा ऊँचाई पर स्थित रक्षा संरचनाएँ उस समय की उन्नत सैन्य इंजीनियरिंग का प्रमाण हैं।

ये दुर्ग लगभग नौ शताब्दियों के सैन्य, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का प्रतिनिधित्व करते हैं। क्रूसेड युद्धों के दौरान इनका उपयोग रणनीतिक किलों के रूप में किया गया। बाद में अय्यूबी और ममलूक शासकों ने इन पर नियंत्रण स्थापित किया तथा स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के अनुरूप इनमें परिवर्तन किए। इस प्रकार ये दुर्ग केवल सैन्य महत्व के नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ऐतिहासिक विकास के भी साक्षी हैं।

मध्य-पूर्व में जारी संघर्षों का प्रभाव इन ऐतिहासिक धरोहरों पर गंभीर रूप से पड़ा है। युद्ध, बमबारी, सैन्य गतिविधियाँ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण इन स्थलों के संरक्षण का कार्य प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर संरचनात्मक क्षति, पुरातात्त्विक अवशेषों का नुकसान और संरक्षण कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न हुई हैं। इसी कारण यूनेस्को ने इन्हें आपातकालीन आधार पर संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है, ताकि इनके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग प्राप्त किया जा सके।

विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संबंधित देशों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी मानी जाती है। ये स्थल मानव इतिहास, संस्कृति, कला, वास्तुकला और सभ्यता के विकास की अमूल्य धरोहर हैं। यदि ये नष्ट हो जाते हैं, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अध्यायों से वंचित हो जाएँगी। इसलिए यूनेस्को का यह निर्णय केवल इन स्थलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। ध्यान रखने योग्य प्रमुख तथ्य हैं कि UNESCO का पूरा नाम United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization है। यह विश्व धरोहर सूची का संचालन करता है। विश्व धरोहर सूची में सांस्कृतिक, प्राकृतिक तथा मिश्रित धरोहरों को शामिल किया जाता है। संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची उन स्थलों के लिए होती है जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अनियंत्रित नगरीकरण अथवा उपेक्षा के कारण खतरे में हों। सेबास्तिया पश्चिमी तट के नाबलुस के निकट स्थित है और इसकी पहचान प्राचीन समारिया नगर से की जाती है। वहीं माउंट अमेल लेबनान का ऐतिहासिक क्षेत्र है जहाँ के पाँच दुर्गों विशेषकर ब्यूफोर्ट दुर्ग को यूनेस्को ने विश्व धरोहर एवं संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। ये दुर्ग क्रूसेडर, अय्यूबी, ममलूक तथा स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के अद्भुत समन्वय का प्रतिनिधित्व करते हैं और लगभग नौ सौ वर्षों के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए हैं।

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