वयस्क मनुष्य में हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय कितना होता है?

Sanjay Yadav
वयस्क मनुष्य में हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय कितना होता है?
A. 0.4 सेकंड
B. 0.6 सेकंड
C. 0.8 सेकंड
D. 1.2 सेकंड
उत्तर: C. 0.8 सेकंड

वयस्क मनुष्य में हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय 0.8 सेकंड होता है।

वयस्क मनुष्य में सामान्य अवस्था में एक पूर्ण हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय लगभग 0.8 सेकंड होता है। यही कारण है कि दिए गए प्रश्न का सही उत्तर 0.8 सेकंड है। हृदय चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें हृदय एक बार संकुचित (Systole) होकर रक्त को शरीर तथा फेफड़ों की ओर पंप करता है और फिर शिथिल (Diastole) होकर पुनः रक्त से भर जाता है। अर्थात् हृदय की एक धड़कन से लेकर अगली धड़कन तक की पूरी क्रिया को हृदय चक्र कहा जाता है।

एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति की सामान्य हृदय गति लगभग 72 धड़कन प्रति मिनट (72 Beats Per Minute) मानी जाती है। यदि 60 सेकंड को 72 धड़कनों से विभाजित किया जाए, तो प्रत्येक धड़कन या एक हृदय चक्र का समय लगभग 0.8 सेकंड प्राप्त होता है। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हृदय चक्र का समय 0.8 सेकंड पूछा जाता है।

हृदय चक्र को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है। पहला चरण आलिंद संकुचन (Atrial Systole) कहलाता है जिसका समय लगभग 0.1 सेकंड होता है। इस दौरान दोनों आलिंद (Atria) संकुचित होकर रक्त को निलयों (Ventricles) में भेजते हैं। दूसरा चरण निलय संकुचन (Ventricular Systole) है जिसका समय लगभग 0.3 सेकंड होता है। इस अवस्था में दोनों निलय संकुचित होकर दाएँ निलय से रक्त फेफड़ों की ओर तथा बाएँ निलय से रक्त महाधमनी (Aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में भेजते हैं। तीसरा चरण पूर्ण हृदय विश्राम (Complete Cardiac Diastole) कहलाता है जिसका समय लगभग 0.4 सेकंड होता है। इस समय हृदय की सभी पेशियाँ शिथिल रहती हैं और हृदय पुनः रक्त से भर जाता है।

इन तीनों चरणों का कुल समय 0.1 + 0.3 + 0.4 = 0.8 सेकंड होता है। यही एक पूर्ण हृदय चक्र का समय है। यह तथ्य जीवविज्ञान, मानव शरीर रचना (Human Anatomy) तथा शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।

हृदय शरीर का सबसे महत्वपूर्ण पेशीय (Muscular) अंग है जिसका मुख्य कार्य पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त का संचार करना तथा अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक पहुँचाना है। सामान्यतः मनुष्य का हृदय एक दिन में लगभग एक लाख (100,000) बार धड़कता है और लगभग 7,000 से 8,000 लीटर रक्त शरीर में पंप करता है। जीवनभर यह बिना रुके लगातार कार्य करता रहता है।

यदि किसी व्यक्ति की हृदय गति बढ़ जाती है, जैसे व्यायाम, तनाव, बुखार या दौड़ने के समय, तो हृदय चक्र की अवधि कम हो जाती है क्योंकि हृदय अधिक तेजी से धड़कता है। इसके विपरीत, विश्राम या नींद की अवस्था में हृदय गति कम होने पर हृदय चक्र की अवधि कुछ बढ़ सकती है। इसलिए 0.8 सेकंड सामान्य स्वस्थ वयस्क व्यक्ति की औसत अवस्था के लिए स्वीकार किया गया मान है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में हृदय चक्र से जुड़े कई प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे सामान्य हृदय गति, सिस्टोल और डायस्टोल की अवधि, हृदय के चार कक्ष (दो आलिंद और दो निलय), हृदय के वाल्व, पेसमेकर (SA Node), रक्तचाप, ECG तथा रक्त परिसंचरण। इसलिए इस विषय को केवल एक तथ्य के रूप में याद करने के बजाय उसकी कार्यप्रणाली को भी समझना आवश्यक है।

याद रखने की आसान ट्रिक है—हृदय चक्र = 0.8 सेकंड = 0.1 सेकंड (आलिंद संकुचन) + 0.3 सेकंड (निलय संकुचन) + 0.4 सेकंड (पूर्ण विश्राम)। यह सूत्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सही उत्तर याद रखने में अत्यंत सहायक होता है।

National GK के पाठकों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। UPSC, SSC, Railway, Banking, State PCS, Police, NDA, CDS, Nursing, Paramedical, NEET, CUET तथा विभिन्न शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में मानव शरीर विज्ञान से संबंधित ऐसे प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए हृदय चक्र का समय 0.8 सेकंड, सामान्य हृदय गति 72 धड़कन प्रति मिनट, तथा सिस्टोल एवं डायस्टोल की अवधि जैसे तथ्यों का अच्छी तरह अध्ययन करना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत लाभदायक है।

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