गोटीपुआ, ओडिशा का नृत्य किसके सम्मान में किया जाता है?

गोटीपुआ, ओडिशा का नृत्य किसके सम्मान में किया जाता है?
गोटीपुआ, ओडिशा का नृत्य भगवान जगन्नाथ के सम्मान में किया जाता है। भारत की सांस्कृतिक परंपरा नृत्य, संगीत और भक्ति से गहराई से जुड़ी हुई है। देश के प्रत्येक क्षेत्र में लोक और शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृति के संवाहक रहे हैं। इन्हीं परंपराओं में गोटीपुआ नृत्य का विशेष स्थान है। यह नृत्य ओडिशा की पवित्र भूमि से उत्पन्न हुआ और भगवान जगन्नाथ के सम्मान तथा भक्ति भाव की अभिव्यक्ति के रूप में विकसित हुआ। गोटीपुआ नृत्य की सबसे विशिष्ट विशेषता यह है कि इसे कम उम्र के बालक स्त्री-वेश धारण कर प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य केवल कलात्मक प्रदर्शन नहीं बल्कि भक्ति, साधना, अनुशासन और आध्यात्मिकता का संगम है। समय के साथ गोटीपुआ ने ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। गोटीपुआ शब्द की उत्पत्ति और अर्थ “गोटीपुआ” शब्द दो ओड़िया शब्दों से मिलकर बना है: गोटी : एक (Single) पुआ : बालक (Boy) अर्थात् एक बालक। यह नाम इस तथ्य को दर्शाता है कि इस नृत्य को एकल रूप में अथवा बालकों के समूह द्वारा स्त्री-वेश में प…

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