मोहिनीअट्टम का संबंध सीधे भगवान विष्णु के उस स्त्री अवतार मोहिनी से है जो सौंदर्य, करुणा, मृदुता और दिव्यता का प्रतीक मानी जाती हैं। इस नृत्य का उद्देश्य केवल शारीरिक गतियों का प्रदर्शन नहीं बल्कि भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और सम्मान प्रकट करना है। यही कारण है कि मोहिनीअट्टम को एक भक्ति-प्रधान और लास्य प्रधान नृत्य शैली माना जाता है।
मोहिनीअट्टम का अर्थ और नामकरण
“मोहिनीअट्टम” दो शब्दों से मिलकर बना है:
- मोहिनी : भगवान विष्णु का स्त्री रूप जो अद्भुत सौंदर्य और आकर्षण का प्रतीक है
- अट्टम : मलयालम भाषा में नृत्य या अभिनय
इस प्रकार, मोहिनीअट्टम का शाब्दिक अर्थ हुआ मोहिनी का नृत्य। यह नृत्य उसी दिव्य स्त्री रूप को समर्पित है जिसके माध्यम से भगवान विष्णु ने देवताओं की रक्षा और धर्म की स्थापना की थी।
पौराणिक पृष्ठभूमि और भगवान विष्णु से संबंध
भारतीय पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब अमृत को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। इस मोहिनी रूप ने अपने सौंदर्य, विनय और बुद्धिमत्ता से असुरों को मोहित कर अमृत देवताओं को प्रदान किया। मोहिनी का यह रूप:
- धर्म की रक्षा करने वाला
- अहंकार को शांत करने वाला
- सौंदर्य और करुणा का प्रतीक
इसी पौराणिक घटना की स्मृति में मोहिनीअट्टम नृत्य विकसित हुआ। अतः यह नृत्य प्रत्यक्ष रूप से भगवान विष्णु के सम्मान और उनकी लीला की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
केरल की सांस्कृतिक भूमि और मोहिनीअट्टम
केरल को “ईश्वर का अपना देश” (God’s Own Country) कहा जाता है। यहाँ की संस्कृति में भक्ति, प्रकृति और कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। मोहिनीअट्टम:
- केरल के मंदिरों से जुड़ा हुआ नृत्य है
- इसे मंदिर उत्सवों और धार्मिक अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता रहा है
- महिलाओं द्वारा भगवान विष्णु और उनसे संबंधित कथाओं के माध्यम से यह नृत्य किया जाता है
यह नृत्य केरल की नारी-संस्कृति, सौम्यता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है।
मोहिनीअट्टम: एक नारी प्रधान नृत्य शैली
मोहिनीअट्टम मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। इसके पीछे कई कारण हैं:
लास्य प्रधानता
- यह नृत्य कोमल, मृदु और भावपूर्ण होता है
- इसमें स्त्रैण सौंदर्य और कोमलता का विशेष महत्व है
मोहिनी का स्त्री रूप
- चूँकि मोहिनी स्वयं एक स्त्री अवतार हैं इसलिए यह नृत्य महिलाओं द्वारा अधिक उपयुक्त माना गया
भक्ति और करुणा का भाव
- महिलाओं की सहज भावाभिव्यक्ति इस नृत्य को अधिक प्रभावशाली बनाती है
इस प्रकार मोहिनीअट्टम नारी शक्ति और भक्ति का सुंदर संगम है।
नृत्य की विशेष शारीरिक मुद्राएँ और गतियाँ
मोहिनीअट्टम की गतियाँ अत्यंत सौम्य और तरल (Fluid) होती हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है मानो समुद्र की लहरें धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हों।
मुख्य विशेषताएँ:
- गोलाकार गतियाँ
- कम तीव्र पदचालन
- शरीर का कोमल झुकाव
- चेहरे पर स्थायी शांति और सौंदर्य
इन सभी का उद्देश्य दर्शकों को शांति, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कराना है।
भाव (अभिनय) और विष्णु भक्ति
मोहिनीअट्टम में अभिनय का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें:
- हाथों की मुद्राओं (मुद्राएँ)
- आँखों की चेष्टाओं
- चेहरे के भाव के माध्यम से भगवान विष्णु की महिमा, करुणा, लीलाएँ और भक्तों के प्रति उनके स्नेह को दर्शाया जाता है।
नृत्य में प्रस्तुत प्रमुख भाव:
- शृंगार
- भक्ति
- करुणा
- शांत रस
ये सभी भाव भगवान विष्णु के सौम्य और पालनकर्ता स्वरूप को दर्शाते हैं।
वेशभूषा और श्रृंगार
मोहिनीअट्टम की वेशभूषा इसकी पहचान है।
वेशभूषा की विशेषताएँ:
- सफेद या क्रीम रंग की केरल साड़ी
- सुनहरी किनारी (कसावु)
- सादगीपूर्ण किंतु आकर्षक परिधान
श्रृंगार:
- बालों को बाईं ओर गोल जूड़े में बाँधा जाता है
- चमेली या मोगरे के फूल लगाए जाते हैं
- हल्का मेकअप जिससे स्वाभाविक सौंदर्य उभरे
यह वेशभूषा भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक है।
संगीत और ताल व्यवस्था
मोहिनीअट्टम में प्रयुक्त संगीत कर्नाटक शैली पर आधारित होता है।
मुख्य वाद्य:
- मृदंगम
- वीणा
- बांसुरी
- इडक्का
गीतों के बोल प्रायः
- विष्णु भक्ति
- कृष्ण लीलाएँ
- वैष्णव दर्शन पर आधारित होते हैं।
मंदिर परंपरा और धार्मिक महत्व
परंपरागत रूप से मोहिनीअट्टम:
- मंदिरों में
- धार्मिक उत्सवों में
- भगवान विष्णु और उनके अवतारों के सम्मान में प्रस्तुत किया जाता रहा है।
यह नृत्य केवल मंचीय कला नहीं बल्कि एक उपासना विधि के रूप में भी देखा जाता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
मोहिनीअट्टम ने:
- केरल की महिलाओं को सांस्कृतिक पहचान दी
- भारतीय नृत्य परंपरा को समृद्ध किया
- वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रचार किया
आज यह नृत्य भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भगवान विष्णु की भक्ति और भारतीय दर्शन का संदेश देता है।
आधुनिक काल में मोहिनीअट्टम
आधुनिक युग में भी मोहिनीअट्टम की मूल आत्मा सुरक्षित है:
- आज भी यह नृत्य मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाता है
- विष्णु भक्ति इसका केंद्रीय विषय बना हुआ है
- मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से यह नई पीढ़ी तक पहुँच रहा है
