हाइड्रोफाइट किसे कहते हैं?

Sanjay Yadav
जलीय पौधों को हाइड्रोफाइट कहा जाता हैं। पौधे पृथ्वी पर जीवन के आधार स्तम्भ हैं। वे न केवल भोजन, ऑक्सीजन और औषधि प्रदान करते हैं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामान्यतः पौधों को उनके आवास के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जैसे स्थलीय पौधे, मरुस्थलीय पौधे, पर्वतीय पौधे तथा जलीय पौधे। जो पौधे पूर्णतः या आंशिक रूप से जल में उगते-बढ़ते हैं उन्हें जलीय पौधे कहा जाता है। विज्ञान की भाषा में ऐसे पौधों को हाइड्रोफाइट (Hydrophytes) कहते हैं। “हाइड्रो” का अर्थ जल तथा “फाइट” का अर्थ पौधा है। इस प्रकार, हाइड्रोफाइट वे पौधे हैं जिनका जीवन-चक्र मुख्यतः जल पर निर्भर करता है।

जलीय पौधों को हाइड्रोफाइट कहा जाता हैं।

हाइड्रोफाइट की परिभाषा

हाइड्रोफाइट वे पौधे हैं जो जल में, जल की सतह पर या जल-संतृप्त मिट्टी में उगते हैं और जिनकी संरचना तथा क्रियाएँ जलमय वातावरण के अनुरूप अनुकूलित होती हैं। इन पौधों की जड़, तना, पत्ती, ऊतक-संरचना तथा शारीरिक क्रियाएँ जल में रहने के कारण स्थलीय पौधों से भिन्न होती हैं।

हाइड्रोफाइट का आवास (Habitat)

हाइड्रोफाइट विभिन्न प्रकार के जलीय आवासों में पाए जाते हैं जैसे:
  • तालाब, झील, झरने
  • नदियाँ और नहरें
  • दलदली क्षेत्र (Marshes)
  • समुद्री तटों के उथले क्षेत्र (कुछ विशेष हाइड्रोफाइट)
इन आवासों में जल की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में होती है जिससे पौधों को जल संरक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती।

हाइड्रोफाइट का वर्गीकरण

हाइड्रोफाइट को उनके जल में रहने के ढंग के आधार पर चार मुख्य वर्गों में बाँटा जा सकता है:

मुक्त तैरने वाले पौधे (Free Floating Plants)
  • ये पौधे जल की सतह पर स्वतंत्र रूप से तैरते रहते हैं और इनकी जड़ें मिट्टी से जुड़ी नहीं होतीं। 
  • उदाहरण: जलकुंभी, पिस्टिया, वोल्फिया।
जड़युक्त तैरने वाले पौधे (Rooted Floating Plants)
  • इन पौधों की जड़ें जलाशय की तलहटी में होती हैं जबकि पत्तियाँ और फूल जल की सतह पर तैरते रहते हैं।
  • उदाहरण: कमल, जलकुम्भी (कुछ प्रजातियाँ)।
पूर्णतः डूबे हुए पौधे (Submerged Plants)
  • ये पौधे पूरी तरह जल के भीतर रहते हैं।
  • उदाहरण: हाइड्रिला, वैलिसनेरिया।
उभरे हुए पौधे (Emergent Plants)
  • इन पौधों की जड़ें जल में होती हैं लेकिन तना और पत्तियाँ जल की सतह से ऊपर निकलती हैं।
  • उदाहरण: नरकट, टाइफा।

हाइड्रोफाइट की सामान्य विशेषताएँ

हाइड्रोफाइट की संरचना जल में जीवन के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती है:

जड़ प्रणाली
  • जड़ें प्रायः कमजोर और अल्पविकसित होती हैं।
  • जड़ रोम (Root hairs) प्रायः अनुपस्थित होते हैं।
  • जल एवं खनिजों का अवशोषण सम्पूर्ण सतह द्वारा हो सकता है।
तना
  • तना कोमल, लचीला और पतला होता है।
  • तने में वायु-कोष (Aerenchyma) विकसित होते हैं जो पौधे को तैरने में सहायता करते हैं।
पत्तियाँ
  • पत्तियाँ प्रायः पतली और चौड़ी होती हैं।
  • मुक्त तैरने वाले पौधों की पत्तियों के ऊपरी सतह पर रंध्र (Stomata) पाए जाते हैं।
  • डूबे हुए पौधों में रंध्र सामान्यतः अनुपस्थित होते हैं।
यांत्रिक ऊतक
  • जल द्वारा सहारा मिलने के कारण यांत्रिक ऊतक (Mechanical tissues) अत्यंत कम विकसित होते हैं।

आंतरिक संरचना (Internal Structure)

हाइड्रोफाइट की आंतरिक संरचना भी जल में जीवन के अनुरूप होती है:
  • जाइलम (Xylem) अल्पविकसित होता है।
  • फ्लोएम (Phloem) अपेक्षाकृत बेहतर विकसित होता है।
  • वायु-कोष गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।

शारीरिक क्रियाएँ (Physiological Activities)

वाष्पोत्सर्जन
  • जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने के कारण वाष्पोत्सर्जन की दर अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
प्रकाश संश्लेषण
  • जल में घुले कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर ये पौधे प्रकाश संश्लेषण करते हैं।

हाइड्रोफाइट का पारिस्थितिक महत्व

हाइड्रोफाइट पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
  • ऑक्सीजन का स्रोत: जल में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखते हैं।
  • जल शोधन: ये पौधे जल को प्रदूषण से मुक्त करने में सहायक होते हैं।
  • जलीय जीवों का आश्रय: मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए आश्रय प्रदान करते हैं।
  • भोजन श्रृंखला: जलीय भोजन श्रृंखला का आधार होते हैं।

हाइड्रोफाइट का आर्थिक महत्व

  • कुछ हाइड्रोफाइट औषधीय उपयोग में लाए जाते हैं।
  • कमल और कुछ अन्य जलीय पौधे धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व रखते हैं।
  • जलकुंभी जैसे पौधे खाद एवं जैव-ईंधन के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं।

हाइड्रोफाइट और स्थलीय पौधों में अंतर

हाइड्रोफाइट वे पौधे होते हैं जिनका जीवन पूर्णतः या आंशिक रूप से जल पर निर्भर होता है। ये पौधे तालाबों, झीलों, नदियों तथा अन्य जलीय स्रोतों में पाए जाते हैं। जल की निरंतर उपलब्धता के कारण इन्हें सहारे, जल संरक्षण और कठोर संरचना की अधिक आवश्यकता नहीं होती। इसके विपरीत, स्थलीय पौधे भूमि पर उगते हैं और उन्हें जल, सहारे तथा पोषक तत्वों के लिए मिट्टी पर निर्भर रहना पड़ता है।

हाइड्रोफाइट की जड़ प्रणाली सामान्यतः कमजोर होती है। कई जलीय पौधों में जड़ें केवल पौधे को स्थिर रखने का कार्य करती हैं जबकि जल एवं खनिजों का अवशोषण पौधे की पूरी सतह द्वारा हो सकता है। दूसरी ओर, स्थलीय पौधों की जड़ प्रणाली अत्यंत सुदृढ़ और विकसित होती है क्योंकि इन्हें मिट्टी से जल एवं खनिज लवण प्राप्त करने के साथ-साथ पौधे को मजबूती प्रदान करनी होती है।

इसी प्रकार, हाइड्रोफाइट में यांत्रिक ऊतक बहुत कम विकसित होते हैं। जल स्वयं पौधों को सहारा देता है इसलिए मजबूत तनों या कठोर ऊतकों की आवश्यकता नहीं होती। जबकि स्थलीय पौधों को गुरुत्वाकर्षण और बाहरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है इसलिए इनमें यांत्रिक ऊतक अधिक विकसित होते हैं जो पौधे को सीधा खड़ा रखने में सहायक होते हैं।

हाइड्रोफाइट की एक विशेष पहचान इनके वायु-कोष (Aerenchyma) होते हैं। ये वायु से भरे ऊतक पौधों को जल में तैरने में सहायता करते हैं तथा गैसों के आदान-प्रदान को सरल बनाते हैं। इसके विपरीत, स्थलीय पौधों में ऐसे वायु-कोष सामान्यतः अनुपस्थित होते हैं क्योंकि उन्हें तैरने की आवश्यकता नहीं होती।

Post a Comment