इथोलॉजी (Ethology) में किसका अध्ययन किया जाता है?

Sanjay Yadav
इथोलॉजी (Ethology) में जानवरों के व्यवहार का अध्ययन उनके सामान्य वातावरण में किया जाता है। जीव-जगत में प्रत्येक प्राणी का व्यवहार उसके अस्तित्व, सुरक्षा, प्रजनन और सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़ा होता है। पशु किस प्रकार भोजन खोजते हैं, अपने शत्रुओं से बचाव करते हैं, अपने बच्चों की देखभाल करते हैं, समूह बनाकर रहते हैं या अकेले जीवन व्यतीत करते हैं। ये सभी क्रियाएँ उनके व्यवहार का हिस्सा हैं। इन्हीं व्यवहारों के वैज्ञानिक अध्ययन को इथोलॉजी (Ethology) कहा जाता है। इथोलॉजी की विशेषता यह है कि इसमें जानवरों के व्यवहार का अध्ययन उनके सामान्य अथवा प्राकृतिक वातावरण (Natural Environment) में किया जाता है न कि केवल प्रयोगशालाओं या कृत्रिम परिस्थितियों में।

इथोलॉजी (Ethology) में जानवरों के व्यवहार का अध्ययन उनके सामान्य वातावरण में किया जाता है।

इथोलॉजी का अर्थ एवं परिभाषा

इथोलॉजी जीवविज्ञान की वह शाखा है जिसमें जानवरों के स्वाभाविक व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन इस बात पर केंद्रित होता है कि:
  • जानवर किसी विशेष परिस्थिति में वैसा व्यवहार क्यों करते हैं
  • वह व्यवहार उनके जीवन-निर्वाह में किस प्रकार सहायक है
  • वह व्यवहार जन्मजात (Innate) है या अनुभव से सीखा गया (Learned)
इथोलॉजी का मूल सिद्धांत यह है कि प्राकृतिक वातावरण में देखा गया व्यवहार ही वास्तविक और प्रामाणिक होता है।

प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन का महत्व

प्राकृतिक वातावरण वह स्थिति है जहाँ जानवर बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से जीवन यापन करते हैं। इथोलॉजी में इस वातावरण का अत्यधिक महत्व है क्योंकि:
  • स्वाभाविक व्यवहार का अवलोकन
  • प्रयोगशालाओं में जानवर तनाव, डर या असामान्य परिस्थितियों के कारण अस्वाभाविक व्यवहार कर सकते हैं। प्राकृतिक वातावरण में उनका व्यवहार वास्तविक होता है।

पर्यावरण और व्यवहार का संबंध

भोजन, जलवायु, शत्रु, वनस्पति और अन्य जीव ये सभी जानवरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। यह संबंध केवल प्राकृतिक वातावरण में ही स्पष्ट होता है।

विकासवादी दृष्टिकोण
  • प्राकृतिक वातावरण में व्यवहार का अध्ययन करने से यह समझ में आता है कि कौन-सा व्यवहार प्राकृतिक चयन (Natural Selection) के कारण विकसित हुआ।

इथोलॉजी का ऐतिहासिक विकास

इथोलॉजी का विकास 20वीं शताब्दी में हुआ। प्रारंभ में पशु व्यवहार का अध्ययन मुख्यतः प्रयोगशालाओं तक सीमित था लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि:
  • जानवरों का वास्तविक व्यवहार प्रकृति में ही प्रकट होता है
  • कृत्रिम परिस्थितियाँ व्यवहार को बदल सकती हैं
इसी विचार ने इथोलॉजी को एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण शाखा के रूप में स्थापित किया।

इथोलॉजी और मनोविज्ञान में अंतर

यद्यपि पशु व्यवहार का अध्ययन मनोविज्ञान में भी किया जाता है फिर भी इथोलॉजी और पशु मनोविज्ञान में कुछ प्रमुख अंतर हैं। इथोलॉजी में जानवरों के व्यवहार का अध्ययन उनके प्राकृतिक अथवा सामान्य वातावरण में किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना होता है कि कोई विशेष व्यवहार किस प्रकार विकसित हुआ और वह प्राणी के अस्तित्व, सुरक्षा तथा प्रजनन में कैसे सहायक है। इथोलॉजिस्ट व्यवहार को विकासवादी दृष्टिकोण से देखते हैं और यह मानते हैं कि अनेक व्यवहार जन्मजात होते हैं जो प्राकृतिक चयन के परिणामस्वरूप पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षियों का घोंसला बनाना या मकड़ी का जाला बुनना ऐसे ही जन्मजात व्यवहार हैं जिनका अध्ययन इथोलॉजी के अंतर्गत किया जाता है।

इसके विपरीत, पशु मनोविज्ञान में व्यवहार का अध्ययन प्रायः प्रयोगशाला आधारित परिस्थितियों में किया जाता है। यहाँ नियंत्रित वातावरण में यह देखा जाता है कि जानवर किसी उत्तेजना (Stimulus) पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और वह व्यवहार कैसे सीखता है। पशु मनोविज्ञान का मुख्य जोर सीखने, अभ्यास और अनुभव से उत्पन्न व्यवहार पर होता है। जैसे चूहे द्वारा भूल-भुलैया (Maze) में रास्ता सीखना या कुत्ते का प्रशिक्षण द्वारा आदेश मानना।

इस प्रकार, जहाँ इथोलॉजी व्यवहार के विकासवादी विश्लेषण पर केंद्रित है और जन्मजात प्रवृत्तियों को समझने का प्रयास करती है वहीं पशु मनोविज्ञान सीखे गए व्यवहार और प्रतिक्रिया-आधारित अध्ययन को अधिक महत्व देता है। दोनों ही अध्ययन-क्षेत्र अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं और मिलकर पशु व्यवहार की समग्र समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

जन्मजात (Innate) व्यवहार

जन्मजात व्यवहार वे होते हैं जो जानवर जन्म से ही जानते हैं। इन्हें सीखने की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण:
  • मकड़ी द्वारा जाला बुनना
  • पक्षियों द्वारा घोंसला बनाना
  • शिशु हिरण का जन्म के तुरंत बाद चलना
इथोलॉजी में इन व्यवहारों का अध्ययन प्राकृतिक वातावरण में किया जाता है जिससे यह समझा जा सके कि ये व्यवहार किस प्रकार प्रजाति के अस्तित्व में सहायक हैं।

सीखा हुआ (Learned) व्यवहार

कुछ व्यवहार अनुभव और अभ्यास से सीखे जाते हैं। उदाहरण:
  • बंदर द्वारा औजारों का उपयोग
  • कुत्ते का प्रशिक्षण द्वारा आदेश मानना
  • शेर के शावक का शिकार करना सीखना
प्राकृतिक वातावरण में यह देखा जाता है कि जानवर कैसे अपने माता-पिता या समूह से सीखते हैं।

स्थिर क्रिया प्रतिरूप (Fixed Action Pattern)

इथोलॉजी में एक महत्वपूर्ण अवधारणा स्थिर क्रिया प्रतिरूप है। यह ऐसा व्यवहार होता है जो:
  • किसी विशेष उत्तेजना (Stimulus) से शुरू होता है
  • एक बार शुरू होने पर पूरा होकर ही रुकता है
उदाहरण के लिए, कुछ पक्षियों का अंडे को घोंसले में वापस लुढ़काना।

जानवरों का सामाजिक व्यवहार

प्राकृतिक वातावरण में कई जानवर सामाजिक समूह बनाकर रहते हैं। इथोलॉजी में इस सामाजिक व्यवहार का गहन अध्ययन किया जाता है:

समूह में रहना
  • सुरक्षा बढ़ती है
  • शिकार या भोजन खोज आसान होती है
प्रभुत्व क्रम (Dominance Hierarchy)
  • समूह में एक क्रम होता है
  • संघर्ष कम होता है
सहयोग
  • मधुमक्खियों और चींटियों में कार्य विभाजन
  • भेड़ियों का सामूहिक शिकार

प्रजनन व्यवहार

प्रजनन व्यवहार इथोलॉजी का एक महत्वपूर्ण विषय है। इसमें:
  • साथी चयन
  • प्रेम प्रदर्शन
  • प्रजनन ऋतु का अध्ययन
प्राकृतिक वातावरण में यह देखा जाता है कि किस प्रकार विशेष रंग, ध्वनि या नृत्य के माध्यम से जानवर साथी को आकर्षित करते हैं।

संचार (Communication)

जानवर विभिन्न माध्यमों से संवाद करते हैं:
  • ध्वनि (पक्षियों का कलरव)
  • गंध (कीटों में फेरोमोन)
  • शारीरिक हाव-भाव
इथोलॉजी में इन संचार प्रणालियों का अध्ययन प्राकृतिक परिस्थितियों में किया जाता है।

भोजन खोजने का व्यवहार

जानवरों का भोजन खोजने का तरीका उनके वातावरण से सीधे जुड़ा होता है:
  • शिकारी जानवरों की रणनीतियाँ
  • शाकाहारी जानवरों की सतर्कता
प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि कौन-सी रणनीति अधिक सफल है।

पालतू और जंगली जानवरों के व्यवहार में अंतर

इथोलॉजी यह भी बताती है कि:
  • पालतू जानवरों का व्यवहार मानव प्रभाव से बदल जाता है
  • जंगली जानवरों का व्यवहार अधिक स्वाभाविक और स्थिर होता है
इसलिए इथोलॉजी मुख्यतः जंगली जानवरों पर केंद्रित रहती है।

इथोलॉजी का संरक्षण में योगदान

आज के समय में वन्यजीव संरक्षण में इथोलॉजी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है:
  • संकटग्रस्त प्रजातियों के व्यवहार को समझना
  • उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना

इथोलॉजी और मानव समाज

यद्यपि इथोलॉजी मुख्यतः जानवरों पर केंद्रित है फिर भी इससे मानव व्यवहार को समझने में भी सहायता मिलती है:
  • सामाजिक व्यवहार
  • संचार
  • सहयोग और प्रतिस्पर्धा

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