विटामिन C को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, घाव भरने, त्वचा की चमक बनाए रखने, हड्डियों और दाँतों के स्वास्थ्य तथा अनेक रोगों से रक्षा करने के लिए जाना जाता है।
विटामिन C : परिचय
विटामिन C का रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक एसिड है। यह एक कार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र C₆H₈O₆ होता है। इसे “एस्कॉर्बिक” इसलिए कहा गया क्योंकि यह स्कर्वी (Scurvy) नामक रोग को रोकने में सहायक होता है।
मानव शरीर स्वयं विटामिन C का निर्माण नहीं कर सकता। इसलिए इसकी पूर्ति हमें भोजन के माध्यम से करनी पड़ती है। फल और सब्जियाँ इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत हैं।
एस्कॉर्बिक एसिड का रासायनिक स्वरूप
एस्कॉर्बिक एसिड एक श्वेत या हल्के पीले रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होता है। यह जल में आसानी से घुलनशील होता है किंतु प्रकाश, ऊष्मा और वायु के संपर्क में आने पर यह शीघ्र ऑक्सीकरण होकर नष्ट हो सकता है।
मुख्य रासायनिक विशेषताएँ
- रासायनिक सूत्र: C₆H₈O₆
- आणविक भार: लगभग 176 g/mol
- प्रकृति: अम्लीय
- घुलनशीलता: जल में अधिक, वसा में नहीं
इसकी संरचना में हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह उपस्थित होते हैं जो इसे एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट बनाते हैं।
विटामिन C की खोज और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विटामिन C की खोज स्कर्वी रोग के अध्ययन के दौरान हुई। प्राचीन समय में समुद्री यात्राओं पर जाने वाले नाविकों में स्कर्वी रोग बहुत सामान्य था जिसके लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, दाँत गिरना और कमजोरी शामिल थे।
18वीं शताब्दी में यह देखा गया कि नींबू, संतरा जैसे खट्टे फलों के सेवन से स्कर्वी ठीक हो जाता है। बाद में वैज्ञानिक अनुसंधानों द्वारा यह सिद्ध हुआ कि इन फलों में पाया जाने वाला तत्व ही विटामिन C है।
विटामिन C के जैविक कार्य
विटामिन C मानव शरीर में अनेक महत्वपूर्ण जैविक कार्य करता है। इनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना
- विटामिन C श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) की सक्रियता बढ़ाता है जिससे शरीर संक्रमणों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भूमिका
- यह शरीर में मुक्त कणों (Free Radicals) को निष्क्रिय करता है जिससे कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से बचाव होता है।
कोलेजन निर्माण में सहायक
- कोलेजन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है जो त्वचा, हड्डियों, उपास्थि और रक्त वाहिकाओं को मजबूती प्रदान करता है। विटामिन C इसके निर्माण के लिए आवश्यक है।
घाव भरने में सहायता
- चोट या घाव लगने पर विटामिन C ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आयरन के अवशोषण में वृद्धि
- यह भोजन में उपस्थित लौह तत्व (Iron) के अवशोषण को बढ़ाता है जिससे एनीमिया की संभावना कम होती है।
विटामिन C के प्रमुख स्रोत
विटामिन C प्राकृतिक रूप से कई फलों और सब्जियों में पाया जाता है।
फल
- आंवला
- संतरा
- नींबू
- मौसंबी
- अमरूद
- स्ट्रॉबेरी
सब्जियाँ
- हरी मिर्च
- शिमला मिर्च
- टमाटर
- पत्तागोभी
- ब्रोकोली
ताजे और कच्चे रूप में इनका सेवन करने से विटामिन C अधिक मात्रा में प्राप्त होता है।
विटामिन C की कमी (Deficiency of Vitamin C)
जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन C नहीं मिलता तो इसकी कमी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
कमी से होने वाला प्रमुख रोग: स्कर्वी (Scurvy)
- स्कर्वी के लक्षण
- मसूड़ों से खून आना
- दाँतों का ढीला होना
- थकान और कमजोरी
- जोड़ों में दर्द
- घाव देर से भरना
यह रोग लंबे समय तक विटामिन C की कमी रहने से उत्पन्न होता है।
विटामिन C की अधिकता (Excess of Vitamin C)
यद्यपि विटामिन C जल में घुलनशील है और अतिरिक्त मात्रा मूत्र द्वारा बाहर निकल जाती है। फिर भी अत्यधिक सेवन से कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
संभावित दुष्प्रभाव
- पेट में दर्द
- दस्त
- मतली
- गुर्दे की पथरी का खतरा (अत्यधिक मात्रा में)
दैनिक आवश्यकता (Recommended Daily Allowance – RDA)
विभिन्न आयु वर्गों के लिए विटामिन C की दैनिक आवश्यकता अलग-अलग होती है:
- वयस्क पुरुष: लगभग 90 mg/दिन
- वयस्क महिला: लगभग 75 mg/दिन
- गर्भवती महिला: लगभग 85 mg/दिन
धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को सामान्य से अधिक विटामिन C की आवश्यकता होती है।
विटामिन C और त्वचा स्वास्थ्य
विटामिन C त्वचा के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा में कोलेजन के निर्माण को बढ़ाकर झुर्रियों को कम करता है और त्वचा को युवा बनाए रखने में सहायक होता है। आजकल कई सौंदर्य प्रसाधनों और सीरम में विटामिन C का उपयोग किया जाता है।
विटामिन C और हृदय स्वास्थ्य
अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि विटामिन C रक्तचाप को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल स्तर को संतुलित रखने और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
विटामिन C और संक्रमण से सुरक्षा
सामान्य सर्दी-जुकाम में विटामिन C की भूमिका पर कई शोध किए गए हैं। यद्यपि यह सर्दी को पूरी तरह रोक नहीं सकता लेकिन इसके लक्षणों की अवधि और तीव्रता को कम करने में सहायक होता है।
औषधीय उपयोग
विटामिन C का उपयोग दवाओं और सप्लीमेंट्स के रूप में भी किया जाता है। विशेषकर तब जब आहार से इसकी पूर्ति संभव न हो। चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इसका सेवन लाभकारी होता है।
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