गामा किरणों का परिचय
गामा किरणें विद्युतचुंबकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) का ही एक रूप हैं। इन्हें सबसे पहले 1900 ई. में फ्रांसीसी वैज्ञानिक पॉल विलार्ड ने खोजा था। बाद में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने इन्हें गामा किरणों का नाम दिया।
विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम (Electromagnetic Spectrum) में गामा किरणों का स्थान सबसे उच्च ऊर्जा और सबसे कम तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाले भाग में होता है। इनकी तरंगदैर्ध्य सामान्यतः 10^-12 मीटर से भी कम होती है।
गामा किरणों की उत्पत्ति
गामा किरणें मुख्यतः नाभिकीय प्रक्रियाओं से उत्पन्न होती हैं जैसे:
रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay)
- जब कोई अस्थिर नाभिक अल्फा या बीटा क्षय के बाद भी उत्तेजित अवस्था (Excited State) में रहता है तो वह अतिरिक्त ऊर्जा को गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित करता है।
नाभिकीय अभिक्रियाएँ (Nuclear Reactions)
- परमाणु रिएक्टरों, परमाणु बम विस्फोटों तथा नाभिकीय संलयन (Fusion) और विखंडन (Fission) की प्रक्रियाओं में गामा किरणें उत्पन्न होती हैं।
खगोलीय स्रोत (Astronomical Sources)
- सुपरनोवा विस्फोट, न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल जैसे खगोलीय पिंड अत्यधिक ऊर्जा वाली गामा किरणें उत्सर्जित करते हैं।
गामा किरणों का स्वरूप
गामा किरणें कण नहीं बल्कि तरंगें हैं। ये विद्युतचुंबकीय तरंगें होती हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे प्रकाश, रेडियो तरंगें और एक्स-किरणें। यही कारण है कि:
- इनमें द्रव्यमान नहीं होता
- इनमें आवेश नहीं होता
- ये प्रकाश की गति ((3 X 10^8) m/s) से चलती हैं
गामा किरणों पर आवेश क्यों नहीं होता?
यह प्रश्न इस लेख का केंद्रीय विषय है। इसे समझने के लिए हमें अल्फा, बीटा और गामा विकिरणों की प्रकृति की तुलना करनी होगी।
अल्फा किरणें
- अल्फा किरणें वास्तव में हीलियम नाभिक He^2+ होती हैं।
- इनमें +2 धनात्मक आवेश होता है
- द्रव्यमान अधिक होता है
बीटा किरणें
- बीटा किरणें इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन होती हैं।
- इलेक्ट्रॉन पर −1 ऋणात्मक आवेश
- पॉज़िट्रॉन पर +1 धनात्मक आवेश
गामा किरणें
- गामा किरणें न तो नाभिक हैं और न ही इलेक्ट्रॉन।
- ये फोटॉन (Photon) के रूप में होती हैं
- फोटॉन का कोई विद्युत आवेश नहीं होता
इसी कारण गामा किरणें पूर्णतः आवेश-रहित होती हैं।
फोटॉन और आवेशहीनता
फोटॉन विद्युतचुंबकीय ऊर्जा का मूल कण है।
- इसका विश्राम द्रव्यमान शून्य होता है
- इसका विद्युत आवेश शून्य होता है
चूँकि गामा किरणें फोटॉनों से बनी होती हैं इसलिए उन पर भी किसी प्रकार का आवेश नहीं पाया जाता।
विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों पर प्रभाव
किसी भी आवेशित कण पर विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र बल लगाते हैं।
- अल्फा और बीटा किरणें विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र में मुड़ जाती हैं
- गामा किरणें नहीं मुड़तीं क्योंकि उन पर कोई आवेश नहीं होता
यह प्रयोगशाला में गामा किरणों की पहचान का एक प्रमुख तरीका है।
गामा किरणों की भेदन क्षमता
गामा किरणों की भेदन क्षमता अत्यधिक होती है।
- कागज़ अल्फा को रोक लेता है
- पतली धातु बीटा को रोक लेती है
- मोटी सीसा (Lead) या कंक्रीट की दीवारें ही गामा किरणों को आंशिक रूप से रोक पाती हैं
इस उच्च भेदन क्षमता का भी एक कारण इनका आवेशहीन होना है क्योंकि आवेश न होने के कारण ये पदार्थों के परमाणुओं से कम क्रिया करती हैं।
गामा किरणों की ऊर्जा
गामा किरणों की ऊर्जा बहुत अधिक होती है प्रायः
- कुछ keV से लेकर कई MeV तक
उच्च ऊर्जा के कारण ये जैविक ऊतकों पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
जैविक प्रभाव (Biological Effects)
गामा किरणें आयनीकरण विकिरण (Ionizing Radiation) होती हैं।
- ये कोशिकाओं के DNA को क्षति पहुँचा सकती हैं
- अधिक मात्रा में संपर्क कैंसर, आनुवंशिक विकार और कोशिका मृत्यु का कारण बन सकता है
हालाँकि नियंत्रित मात्रा में इन्हें चिकित्सा में उपयोग किया जाता है।
चिकित्सा में गामा किरणों का उपयोग
कैंसर उपचार (Radiotherapy)
- गामा किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
गामा नाइफ (Gamma Knife)
- मस्तिष्क ट्यूमर के उपचार में अत्यंत सटीक तकनीक।
चिकित्सीय उपकरणों की नसबंदी
- सिरिंज, सर्जिकल औज़ार आदि को जीवाणु-मुक्त करने में।
उद्योग में उपयोग
- धातुओं में दरारों की जाँच (Non-Destructive Testing)
- खाद्य पदार्थों का संरक्षण
- औद्योगिक रेडियोग्राफी
खगोल विज्ञान में महत्व
गामा किरण खगोल विज्ञान (Gamma Ray Astronomy) ब्रह्मांड की अत्यधिक ऊर्जावान घटनाओं का अध्ययन करता है जैसे:
- गामा रे बर्स्ट
- सुपरनोवा
- ब्लैक होल
गामा किरणें बनाम एक्स-किरणें
दोनों विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं पर गामा किरणें नाभिकीय प्रक्रियाओं से एक्स-किरणें इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होती हैं। दोनों पर कोई आवेश नहीं होता।
सुरक्षा और सावधानियाँ
गामा किरणों से सुरक्षा के लिए:
- सीसा ढाल (Lead Shielding)
- दूरी बनाए रखना
- न्यूनतम समय तक संपर्क
%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6%20%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4.jpg)