श्वेत प्रकाश की प्रकृति
श्वेत प्रकाश किसी एक रंग का नहीं बल्कि विभिन्न तरंगदैर्ध्यों (wavelengths) वाले अनेक रंगों का मिश्रण है। सामान्यतः दृश्य प्रकाश का तरंगदैर्ध्य क्षेत्र लगभग 400 nm से 700 nm के बीच होता है। इस सीमा में क्रमशः बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल रंग आते हैं।
- बैंगनी का तरंगदैर्ध्य सबसे कम (लगभग 400–450 nm)
- लाल का तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक (लगभग 620–700 nm)
यही तरंगदैर्ध्य का अंतर आगे चलकर विचलन के अंतर का मूल कारण बनता है।
प्रिज्म क्या है?
प्रिज्म एक पारदर्शी ठोस माध्यम (अधिकतर काँच) होता है जिसकी दो अपवर्तक सतहें समतल होती हैं और वे एक निश्चित कोण पर झुकी रहती हैं। जब प्रकाश प्रिज्म में प्रवेश करता है तो वह दो बार अपवर्तित होता है:
- पहली बार प्रवेश सतह पर
- दूसरी बार निर्गम सतह पर
इन दोनों अपवर्तनों के संयुक्त प्रभाव से प्रकाश का मार्ग बदल जाता है जिसे विचलन (Deviation) कहते हैं।
अपवर्तन और स्नेल का नियम
प्रकाश का अपवर्तन तब होता है जब वह एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है और उसकी चाल बदलती है। इसे स्नेल के नियम द्वारा व्यक्त किया जाता है:
- n = sin i/sin r
जहाँ
(n) = अपवर्तनांक
(i) = आपतन कोण
(r) = अपवर्तन कोण
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अपवर्तनांक (n) प्रकाश के रंग (तरंगदैर्ध्य) पर निर्भर करता है। यही निर्भरता वर्ण विक्षेपण का कारण है।
वर्ण विक्षेपण (Dispersion) की अवधारणा
जब श्वेत प्रकाश प्रिज्म से गुजरता है तो प्रत्येक रंग का अपवर्तनांक अलग-अलग होता है। परिणामस्वरूप, हर रंग अलग-अलग मात्रा में मुड़ता (विचलित होता) है। इस अलग-अलग विचलन के कारण रंग एक-दूसरे से अलग दिखाई देते हैं और VIBGYOR क्रम में वर्णक्रम बनता है।
बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक क्यों?
तरंगदैर्ध्य का प्रभाव
किसी माध्यम में प्रकाश का वेग (v) उसके अपवर्तनांक (n) से इस प्रकार संबंधित होता है:
- v = c/n
जहाँ (c) निर्वात में प्रकाश की चाल है।
कम तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश (जैसे बैंगनी) के लिए काँच का अपवर्तनांक अधिक होता है। इसलिए उसका वेग कम हो जाता है। वेग में यह अधिक परिवर्तन अधिक अपवर्तन और अंततः अधिक विचलन पैदा करता है।
अपवर्तनांक का रंग पर निर्भर होना
काँच के लिए सामान्यतः:
- n_{बैंगनी} > n_{नीला} > n_{हरा} > n_{पीला} > n_{नारंगी} > n_{लाल}
अर्थात बैंगनी रंग के लिए अपवर्तनांक सबसे अधिक है इसलिए वही सबसे अधिक मुड़ता है।
प्रिज्म का विचलन सूत्र
प्रिज्म के लिए विचलन कोण (delta) लगभग इस पर निर्भर करता है:
- delta = approx (n - 1)A
जहाँ (A) प्रिज्म का कोण है। चूँकि (n) बैंगनी के लिए अधिक है इसलिए (\delta) भी अधिक होगा। इस प्रकार बैंगनी का विचलन अधिकतम सिद्ध होता है।
तरंग सिद्धांत की भूमिका
प्रकाश का तरंग सिद्धांत बताता है कि माध्यम के भीतर विभिन्न तरंगदैर्ध्य अलग-अलग वेग से चलते हैं। काँच में छोटी तरंगदैर्ध्य (बैंगनी) अधिक प्रभावित होती हैं जबकि बड़ी तरंगदैर्ध्य (लाल) कम। इसलिए बैंगनी का मार्ग अधिक मुड़ता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ण विक्षेपण की वैज्ञानिक व्याख्या का श्रेय महान वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन को जाता है। उन्होंने 17वीं शताब्दी में प्रिज्म प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया कि श्वेत प्रकाश विभिन्न रंगों का मिश्रण है और प्रिज्म रंगों को बनाता नहीं बल्कि अलग करता है। न्यूटन के प्रयोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक रंग का विचलन अलग होता है और बैंगनी सबसे अधिक विचलित होता है।
वर्णक्रम का क्रम (VIBGYOR)
प्रिज्म से प्राप्त वर्णक्रम का क्रम इस प्रकार होता है:
बैंगनी → जामुनी → नीला → हरा → पीला → नारंगी → लाल
इस क्रम में बैंगनी सबसे ऊपर/अधिक मुड़ा हुआ तथा लाल सबसे नीचे/कम मुड़ा हुआ दिखाई देता है।
दैनिक जीवन और तकनीकी अनुप्रयोग
- इंद्रधनुष: वर्षा की बूंदें प्राकृतिक प्रिज्म की तरह काम करती हैं। इंद्रधनुष में भी बैंगनी अंदर की ओर और लाल बाहर की ओर दिखता है। कारण वही अधिक-कम विचलन।
- स्पेक्ट्रोस्कोपी: पदार्थों की पहचान उनके वर्णक्रम से की जाती है।
- ऑप्टिकल डिज़ाइन: लेंसों में वर्ण विक्षेपण कम करने के लिए अक्रोमैटिक लेंस बनाए जाते हैं।
- फोटोग्राफी व टेलिस्कोप: रंग-विकृति को नियंत्रित करने के लिए तरंगदैर्ध्य-निर्भर प्रभावों का ध्यान रखा जाता है।
भ्रांतियाँ और उनका निवारण
- भ्रांति: प्रिज्म रंग उत्पन्न करता है।
- सत्य: प्रिज्म रंग उत्पन्न नहीं करता; वह श्वेत प्रकाश में उपस्थित रंगों को अलग करता है।
- भ्रांति: सभी रंग समान रूप से विचलित होते हैं।
- सत्य: प्रत्येक रंग का अपवर्तनांक अलग होने से विचलन भी अलग होता है।
