ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर क्यों उबलता है?
ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर क्यों उबलता है?
ऊँचे स्थानों पर पानी 100°C से कम ताप पर इसलिए उबलता है क्योंकि वहाँ वायुमण्डलीय दाब कम होता है । हम सभी जानते हैं कि समुद्र तल (Sea Level) पर शुद्ध पानी 100°C तापमान पर उबलता है। यह तथ्य विद्यालय स्तर से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक बार-बार पूछा जाता है। परंतु जैसे ही हम किसी ऊँचे स्थान जैसे पहाड़ी क्षेत्र, पठार, या पर्वतीय इलाकों पर जाते हैं तो यह नियम बदल जाता है। वहाँ पानी 100°C से कम तापमान पर ही उबलने लगता है। यह प्रश्न केवल एक तथ्य नहीं बल्कि इसके पीछे भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत छिपा है जो वायुमण्डलीय दाब, वाष्प दाब, उबलनांक और अणुओं की गति से संबंधित है। उबलना क्या है? (What is Boiling?) किसी द्रव का उबलना वह अवस्था है जब: द्रव के भीतर से वाष्प के बुलबुले बनने लगते हैं और वे सतह तक आकर फूटने लगते हैं। सरल शब्दों में: जब द्रव का वाष्प दाब (Vapour Pressure) बाहरी वायुमण्डलीय दाब (Atmospheric Pressure) के बराबर हो जाता है तो द्रव उबलने लगता है। इसलिए उबलना केवल तापमान पर नहीं बल्कि दाब पर भी निर्भर करता है। वाष्प दाब (Vapour Pressure) क्या है? किसी द्रव के अणु निरंतर गति में रह…